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35 की उम्र में ही टिक रहे नौजवानों के घुटने
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35 की उम्र में ही टिक रहे नौजवानों के घुटने
गाजियाबाद। आराम तलबी और सुविधाएं बढ़ने से घुटनों की संक्रियता कम हो गई है, इस कारण से पिछले दस साल में घुटना प्रत्यारोपण की उम्र 60 वर्ष से घटकर 35 साल हो गई है। कोरोना संक्रमण में दो साल तक वर्क फ्रॉम होम होने के पर लोगों की शारीरिक सक्रियता कम हो गई थी। अब दोबारा सक्रियता बढ़ने पर युवा भी घुटने के दर्द से परेशान हो रहे हैं। जिला अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से 150 से 170 मरीज घुटना में दर्द वाले होते हैं।
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड लिगामेंट विशेषज्ञ डॉ. अमित नाथ मिश्रा का कहना है कि अगर लोग बहुमंजिला इमारतों में बने फ्लैट में रहते हैं तो आवागमन के लिए सीढ़ियों के बजाए लिफ्ट का प्रयोग करते हैं। कमोड पाश्चात्य सभ्यता वाला प्रयोग करते हैं। साइकिल चलाना भी लोग भूल चुके हैं। घुटनों का पर्याप्त संचालन न होने से इस कारण से घुटने में दर्द की परेशानी अधिक बढ़ रही है। स्थिति यह हो जाती है कि मरीजों को बदलवाना ही पड़ता है।
मोटापा खराब कर रहा घुटने
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. अजय पवार का कहना है फास्ट फूड और अधिक बसा युवक्त वाली चीजें खाने से मोटापा बढ़ रहा है। इस कारण से घुटने पर दबाव बढ़ने से दर्द बढ़ जाता है जो पांच से छह साल में बदलना पड़ता है। इसमें घुटने के मसल्स, लिगामेंट और टेंडन को अधिक काम करना पड़ता है। इससे घुटने के जोड़ के अंदर कार्टिलेज की परत कमजोर हो रही है। युवाओं को भी घुटना बदलवाना पड़ता है।
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कम या अधिक प्रयोग दोनों स्थिति खतरनाक
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एवं आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डीएम सक्सेना का कहना है कि कम उम्र के लोगों में घुटने का दर्द अधिक प्रयोग और बदल रही जीवन शैली के कारण होता है। ज्यादातर ऐसा तब होता है, जब कुछ मांसपेशियां अन्य मांसपेशियों की अपेक्षा अधिक काम करती हैं। ऐसे में असंतुलन के कारण घुटने में दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके अलावा चोट लगना, गठिया, फ्रेक्चर होना, आर्थराइटिस, बर्साइटिस, बैठने का गलत तरीका आदि के कारण भी कम उम्र के लोगों में घुटने की परेशानी बढ़ जाती है।
घुटने के दर्द के लक्षण
घुटने को पूरी तरह से सीधा करने में मुश्किल होना
घुटने में कमजोरी महसूस होना
चलने में घुटने से बैलेंस न बनना
घुटना मोड़ने में दर्द होना
सूजन और जकड़न
घुटने का लाल होना
घुटने का गर्म होना
घुटने के दर्द को कैसे रोके
घुटने में दर्द होने पर बर्फ लगाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे सूजन कम होती है और फि र दर्द कम हो सकता है।
गैरस्टेरायडल एंटीइंफ्लामेंशन दवाइयों का किसी डॉक्टर से परामर्श करके सेवन कर सकते हैं।
घुटने को के दर्द को कम करने के लिए थैरेपी या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।
घुटने में अगर दर्द होता है तो सबसे अच्छा तरीका है कि घुटने को आराम दें।
घुटने में दर्द होने पर इंटेंस एक्टिविटी से बचना चाहिए।
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गाजियाबाद। आराम तलबी और सुविधाएं बढ़ने से घुटनों की संक्रियता कम हो गई है, इस कारण से पिछले दस साल में घुटना प्रत्यारोपण की उम्र 60 वर्ष से घटकर 35 साल हो गई है। कोरोना संक्रमण में दो साल तक वर्क फ्रॉम होम होने के पर लोगों की शारीरिक सक्रियता कम हो गई थी। अब दोबारा सक्रियता बढ़ने पर युवा भी घुटने के दर्द से परेशान हो रहे हैं। जिला अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से 150 से 170 मरीज घुटना में दर्द वाले होते हैं।
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड लिगामेंट विशेषज्ञ डॉ. अमित नाथ मिश्रा का कहना है कि अगर लोग बहुमंजिला इमारतों में बने फ्लैट में रहते हैं तो आवागमन के लिए सीढ़ियों के बजाए लिफ्ट का प्रयोग करते हैं। कमोड पाश्चात्य सभ्यता वाला प्रयोग करते हैं। साइकिल चलाना भी लोग भूल चुके हैं। घुटनों का पर्याप्त संचालन न होने से इस कारण से घुटने में दर्द की परेशानी अधिक बढ़ रही है। स्थिति यह हो जाती है कि मरीजों को बदलवाना ही पड़ता है।
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मोटापा खराब कर रहा घुटने
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. अजय पवार का कहना है फास्ट फूड और अधिक बसा युवक्त वाली चीजें खाने से मोटापा बढ़ रहा है। इस कारण से घुटने पर दबाव बढ़ने से दर्द बढ़ जाता है जो पांच से छह साल में बदलना पड़ता है। इसमें घुटने के मसल्स, लिगामेंट और टेंडन को अधिक काम करना पड़ता है। इससे घुटने के जोड़ के अंदर कार्टिलेज की परत कमजोर हो रही है। युवाओं को भी घुटना बदलवाना पड़ता है।
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कम या अधिक प्रयोग दोनों स्थिति खतरनाक
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एवं आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डीएम सक्सेना का कहना है कि कम उम्र के लोगों में घुटने का दर्द अधिक प्रयोग और बदल रही जीवन शैली के कारण होता है। ज्यादातर ऐसा तब होता है, जब कुछ मांसपेशियां अन्य मांसपेशियों की अपेक्षा अधिक काम करती हैं। ऐसे में असंतुलन के कारण घुटने में दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके अलावा चोट लगना, गठिया, फ्रेक्चर होना, आर्थराइटिस, बर्साइटिस, बैठने का गलत तरीका आदि के कारण भी कम उम्र के लोगों में घुटने की परेशानी बढ़ जाती है।
घुटने के दर्द के लक्षण
घुटने को पूरी तरह से सीधा करने में मुश्किल होना
घुटने में कमजोरी महसूस होना
चलने में घुटने से बैलेंस न बनना
घुटना मोड़ने में दर्द होना
सूजन और जकड़न
घुटने का लाल होना
घुटने का गर्म होना
घुटने के दर्द को कैसे रोके
घुटने में दर्द होने पर बर्फ लगाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे सूजन कम होती है और फि र दर्द कम हो सकता है।
गैरस्टेरायडल एंटीइंफ्लामेंशन दवाइयों का किसी डॉक्टर से परामर्श करके सेवन कर सकते हैं।
घुटने को के दर्द को कम करने के लिए थैरेपी या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।
घुटने में अगर दर्द होता है तो सबसे अच्छा तरीका है कि घुटने को आराम दें।
घुटने में दर्द होने पर इंटेंस एक्टिविटी से बचना चाहिए।