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निठारीकांड में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद बयान से मुकरने पर 16 को फैसला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 01:24 AM IST
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निठारीकांड में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद बयान से मुकरने पर 16 को फैसला
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गाजियाबाद। देश के बहुचर्चित निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंधेर के खिलाफ पहली एफ आईआर दर्ज कराने और फि र बयान से मुकरने वाले मृतका के पिता नंदलाल के मुकदमे में 16 मई को फैसला आ सकता है। उसके अधिवक्ता द्वारा दी गई डिस्चार्ज अर्जी अदालत खारिज कर चुकी है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि निठारी कांड के एक मामले में नंदलाल गवाह था। बाद में वह बयान से मुकर गया था। इस मामले में तत्कालीन सीबीआई न्यायाधीश रमा जैन ने संज्ञान लेकर वर्ष 2007 में उसके खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था।
उत्तराखंड में ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर निवासी नंदलाल रोजगार की तलाश में साल- 2005 में यूपी के नोएडा में आया था। सात मई 2006 को उनकी बेटी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। पुलिस ने 29 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर निठारी गांव के डी-पांच कोठी के पीछे बने नाले से पांच लड़कियों के अवशेष बरामद किए।
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नंदलाल ने पहले कहा पंधेर ने मेरे सामने आरी बरामद कराई
इस केस में मृतका के पिता नंदलाल ने मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या का रिपोर्ट दर्ज कराया था। सात जुलाई 2007 को तत्कालीन विशेष न्यायाधीश रमा जैन की अदालत में नंदलाल ने बयान दिया था कि उसके सामने आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर ने तत्कालीन सीओ को 500-500 के नोटों की गड्डियां दी थीं और पंधेर ने हत्या में इस्तेमाल आरी भी बरामद कराई थी।
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बाद में कहा मेरे सामने कुछ नहीं हुआ, रिपोर्ट भी जबरदस्ती दर्ज कराई
नंदलाल 15 नवंबर 2007 को अपने बयानों से मुकर गया। उसने नया बयान दिया कि पंधेर ने न तो उनके सामने आरी बरामद कराई थी और न ही तत्कालीन सीओ को रिश्वत दी थी। नंदलाल ने कोर्ट में कहा कि जब उनकी बेटी लापता हुई तो उन्होंने कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। पुलिस ने जबरन रिपोर्ट लिखवाई थी। नंदलाल के अनुसार उसने बेटी का हुलिया और कपड़ों का रंग बताया था जबकि घटनास्थल से जो कपड़े मिले उनका रंग दूसरा था।

अधिवक्ता और नंदलाल में जिरह हुई पूरी
इस पर सीबीआई कोर्ट ने दो दिसंबर 2007 को नंदलाल के खिलाफ निचली अदालत को रिपोर्ट भेजी। अदालत में नंदलाल के खिलाफ केस दर्ज किया। पिछले 14 साल से यह केस लगातार लंबित चला आ रहा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले में तेजी आई। इस मामले में आठ मई को नंदलाल और निठारी कांड के अधिवक्ता खालिद खान के बीच बहस पूरी हो गई है।
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