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गृह कर बढ़ाने पर पार्षद-अधिकारी आए आमने-सामने
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गृह कर बढ़ाने पर पार्षद-अधिकारी आए आमने-सामने
गाजियाबाद। नगर निगम की 17 मई को होने वाली बोर्ड बैठक में सर्किल रेट के आधार पर गृह कर लागू करने और दुकानों का किराया बढ़ाने समेत अन्य प्रस्तावों को शामिल करने पर पार्षद अधिकारियों के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने इन प्रस्तावों का सीधा विरोध करने की बजाय बजट बैठक में अन्य प्रस्ताव शामिल कर निगम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने प्रस्ताव भले ही एजेंडे में शामिल कर लिए हो लेकिन बैठक में सिर्फ बजट पर चर्चा होगी। ऐसे में मंगलवार को होने वाली यह बैठक हंगामेदार हो सकती है।
नगर निगम के अधिकारियों ने 29 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी बजट के साथ-साथ बैठक के दूसरे सत्र में 12 अन्य प्रस्ताव भी शामिल किए थे। इनमें सर्किल रेट के आधार पर गृह कर की दरें तय करने, गृह कर में छूट की अवधि का पुनर्निर्धारण करने, छतों पर मोबाइल टावर लगाने के संबंध में उपविधि बनाने, केबल ऑपरेटर्स से शुल्क वसूले जाने, स्मार्ट पार्किंग बनाए जाने और करीब 300 से ज्यादा विकास कार्यों का प्रस्ताव शामिल था। 12 पार्षदों वाली कार्यकारिणी समिति ने गृह कर और स्मार्ट पार्किंग के प्रस्ताव को पास या निरस्त करने पर निर्णय लेने से इनकार कर इन्हें बोर्ड बैठक के लिए रेफर कर दिया था और बजट समेत बाकी प्रस्तावों को पास कर दिया था। अब उन्हीं प्रस्तावों को बोर्ड बैठक में लाया गया तो पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया है।
इसलिए है विरोध
दरअसल, इसी वर्ष नवंबर में नगर निगम के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनावी वर्ष में सत्तादल के पार्षद नहीं चाहते कि गृह कर में बढ़ोतरी हो। कर में बढ़ोतरी हुई तो निकाय चुनाव में न सिर्फ पार्षदों को बल्कि सत्ता दल को भी जवाब देना पड़ेगा। ऐसे में पार्षद इस प्रस्ताव को लंबित रखना चाहते हैं। वहीं, नगर निगम की दुकानों के किराए में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी पार्षद अभी नहीं चाहते कि निर्णय हो।
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नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि नगर निगम बोर्ड बैठक के एजेंडे में उन्हीं प्रस्तावों को शामिल किया है जो कार्यकारिणी समिति की बैठक में थे। इनमें कोई अतिरिक्त प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है। एजेंडे पर चर्चा के दौरान बोर्ड जो भी निर्णय ले, यह बोर्ड का अधिकार है।
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गाजियाबाद। नगर निगम की 17 मई को होने वाली बोर्ड बैठक में सर्किल रेट के आधार पर गृह कर लागू करने और दुकानों का किराया बढ़ाने समेत अन्य प्रस्तावों को शामिल करने पर पार्षद अधिकारियों के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने इन प्रस्तावों का सीधा विरोध करने की बजाय बजट बैठक में अन्य प्रस्ताव शामिल कर निगम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने प्रस्ताव भले ही एजेंडे में शामिल कर लिए हो लेकिन बैठक में सिर्फ बजट पर चर्चा होगी। ऐसे में मंगलवार को होने वाली यह बैठक हंगामेदार हो सकती है।
नगर निगम के अधिकारियों ने 29 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी बजट के साथ-साथ बैठक के दूसरे सत्र में 12 अन्य प्रस्ताव भी शामिल किए थे। इनमें सर्किल रेट के आधार पर गृह कर की दरें तय करने, गृह कर में छूट की अवधि का पुनर्निर्धारण करने, छतों पर मोबाइल टावर लगाने के संबंध में उपविधि बनाने, केबल ऑपरेटर्स से शुल्क वसूले जाने, स्मार्ट पार्किंग बनाए जाने और करीब 300 से ज्यादा विकास कार्यों का प्रस्ताव शामिल था। 12 पार्षदों वाली कार्यकारिणी समिति ने गृह कर और स्मार्ट पार्किंग के प्रस्ताव को पास या निरस्त करने पर निर्णय लेने से इनकार कर इन्हें बोर्ड बैठक के लिए रेफर कर दिया था और बजट समेत बाकी प्रस्तावों को पास कर दिया था। अब उन्हीं प्रस्तावों को बोर्ड बैठक में लाया गया तो पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया है।
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इसलिए है विरोध
दरअसल, इसी वर्ष नवंबर में नगर निगम के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनावी वर्ष में सत्तादल के पार्षद नहीं चाहते कि गृह कर में बढ़ोतरी हो। कर में बढ़ोतरी हुई तो निकाय चुनाव में न सिर्फ पार्षदों को बल्कि सत्ता दल को भी जवाब देना पड़ेगा। ऐसे में पार्षद इस प्रस्ताव को लंबित रखना चाहते हैं। वहीं, नगर निगम की दुकानों के किराए में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी पार्षद अभी नहीं चाहते कि निर्णय हो।
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नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि नगर निगम बोर्ड बैठक के एजेंडे में उन्हीं प्रस्तावों को शामिल किया है जो कार्यकारिणी समिति की बैठक में थे। इनमें कोई अतिरिक्त प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है। एजेंडे पर चर्चा के दौरान बोर्ड जो भी निर्णय ले, यह बोर्ड का अधिकार है।