{"_id":"637d2569509cf65ebc53786e","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd2481449160","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: बेटी के मिलने की आस में थाने के बाहर बैठा रहा परिवार... आई मौत की सूचना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: बेटी के मिलने की आस में थाने के बाहर बैठा रहा परिवार... आई मौत की सूचना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेटी के मिलने की आस में थाने के बाहर बैठा रहा परिवार... आई मौत की सूचना
गाजियाबाद। बिटिया के अपहरण होने की सूचना मिलते ही रविवार की शाम सोनू परिवार के साथ सोनीपत से गाजियाबाद नंदग्राम पहुंच गया। दो दिन तीन रात से थाने के बाहर ठंड में बैठा परिवार बिटिया के लौटने की आस लगाए हुआ था लेकिन उन्हें क्या पता था कि बिटिया की मौत की सूचना मिलेगी। बिटिया की मौत की सूचना मिलते ही परिवार टूट गया।
नम आंखों से खुशी के दादा जयवीर ने बताया कि कुछ दिन पहले पोती ने फोन कर कहा था बाबा गाड़ी भेज दो मुझे आना है। उन्होंने जल्दी ही गाड़ी भेजने की बात कही थी। अब उन्हें थोड़ी पता था उन्हें पोती का मरा हुआ चेहरा देखना पड़ेगा।
किसी को न हो शक इसलिए दोस्तों को किया शामिल
बबलू ने खुशी की हत्या करने की साजिश पहले से ही रच ली थी। साजिश में उसने अपने दोनों दोस्तों को इसलिए शामिल किया जिससे पुलिस को उस पर शक न हो। वह मौके पर न रहे और मोहल्ले में वापस आ जाए। साजिश के तहत उसने बच्ची को अमित को दिया अमित ने गंभीर को और गंभीर ने वारदात को अंजाम दिया।
विज्ञापन
जिसे अपना समझा, वही निकला कातिल
परिजनों का कहना है कि बबलू का उनके घर आना जाना था। खुशी के नाना ने बीते दिनों कहीं से रुपये आने और प्लाट खरीदने की बात की थी। उन्होंने इसका जिक्र बबूल से भी किया था। बबलू ने रुपये के लालच में खुशी का अपहरण करने की साजिश रच ली। परिजन खुद को भी दोष देते हुए बोले आखिर उन्होंने जिसे अपना समझा वही कातिल निकला। अगर वह उससे अपने पास न बैठाते तो उनकी बेटी के साथ ऐसी अनहोनी न होती।
विज्ञापन
गाजियाबाद। बिटिया के अपहरण होने की सूचना मिलते ही रविवार की शाम सोनू परिवार के साथ सोनीपत से गाजियाबाद नंदग्राम पहुंच गया। दो दिन तीन रात से थाने के बाहर ठंड में बैठा परिवार बिटिया के लौटने की आस लगाए हुआ था लेकिन उन्हें क्या पता था कि बिटिया की मौत की सूचना मिलेगी। बिटिया की मौत की सूचना मिलते ही परिवार टूट गया।
नम आंखों से खुशी के दादा जयवीर ने बताया कि कुछ दिन पहले पोती ने फोन कर कहा था बाबा गाड़ी भेज दो मुझे आना है। उन्होंने जल्दी ही गाड़ी भेजने की बात कही थी। अब उन्हें थोड़ी पता था उन्हें पोती का मरा हुआ चेहरा देखना पड़ेगा।
विज्ञापन
किसी को न हो शक इसलिए दोस्तों को किया शामिल
बबलू ने खुशी की हत्या करने की साजिश पहले से ही रच ली थी। साजिश में उसने अपने दोनों दोस्तों को इसलिए शामिल किया जिससे पुलिस को उस पर शक न हो। वह मौके पर न रहे और मोहल्ले में वापस आ जाए। साजिश के तहत उसने बच्ची को अमित को दिया अमित ने गंभीर को और गंभीर ने वारदात को अंजाम दिया।
विज्ञापन
जिसे अपना समझा, वही निकला कातिल
परिजनों का कहना है कि बबलू का उनके घर आना जाना था। खुशी के नाना ने बीते दिनों कहीं से रुपये आने और प्लाट खरीदने की बात की थी। उन्होंने इसका जिक्र बबूल से भी किया था। बबलू ने रुपये के लालच में खुशी का अपहरण करने की साजिश रच ली। परिजन खुद को भी दोष देते हुए बोले आखिर उन्होंने जिसे अपना समझा वही कातिल निकला। अगर वह उससे अपने पास न बैठाते तो उनकी बेटी के साथ ऐसी अनहोनी न होती।