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बिजली चोरी : एक दरोगा के कंधों पर 23 हजार मुकदमों का बोझ
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बिजली चोरी : एक दरोगा के कंधों पर 23 हजार मुकदमों का बोझ
गाजियाबाद। एंटी पावर थेफ्ट थाने में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी थाना के खुलने के समय से ही बरकरार है। वर्तमान में थाने में तैनात एकमात्र उपनिरीक्षक(दरोगा) के कंधे पर 23 हजार से अधिक मुकदमों का बोझ है। ऐसे में तीन साल बाद केस में चार्जशीट पेश हो रही है।
बिजली चोरी को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा 2019 में एंटी पावर थेफ्ट थाना की शुरूआत की गई थी। वसुंधरा में खोले गए थाने में दो निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक और 10 सिपाही की नियुक्ति का प्रावधान था। थाने को कभी भी पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिला। वर्तमान समय में पूरा थाना उपनिरीक्षक शैलेंद्र शर्मा के भरोसे है। ऐसे में विवेचना और अन्य कामों में देरी के चलते बिजली चोरी करने वाले साल दर साल कोर्ट के सामने पेश नहीं हो पाते। बिना जुर्माना भरे ही वह दोबारा बिजली का उपयोग शुरू कर देते हैं।
जुर्माना भरने पर केस हो जाता है खारिज
बिजली चोरी पकड़े जाने पर सबसे पहले जेई या एसडीओ के द्वारा चेकिंग रिपोर्ट बनाई जाती है। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया जाता है। यदि दो-चार दिनों में बिजली चोरी करने वाला जुर्माना भर देता है, तो अधिशासी अभियंता द्वारा क्लीन चिट दे दी जाती है, जिसके आधार पर रिपोर्ट को खारिज कर दिया जाता है। इसके बाद 600 रुपये का चार्ज लेकर कनेक्शन जोड़ दिया जाता है।
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एक दिन में दो विवेचना, रिपोर्ट दर्ज होती है 50
एंटी पावर थेफ्ट थाने में हर रोज 40 से 50 बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। एक ही उपनिरीक्षक के होने से दिन में एक या दो मुकदमों की विवेचना हो पाती है। लगातार रिपोर्ट दर्ज होने से विवेचना की संख्या बढ़ जाती है। वर्तमान में थाने में 23,328 केस लंबित हैं।
साल- लंबित केस
2019 - 520
2020 - 9000
2021 - 11230
2022 - 2578
महीना काटे कनेक्शन जुर्माना जमा करने वाले लोगों की संख्या
फरवरी- 615 90
मार्च- 714 69
अप्रैल- 537 96
मई - 712 78
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गाजियाबाद। एंटी पावर थेफ्ट थाने में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी थाना के खुलने के समय से ही बरकरार है। वर्तमान में थाने में तैनात एकमात्र उपनिरीक्षक(दरोगा) के कंधे पर 23 हजार से अधिक मुकदमों का बोझ है। ऐसे में तीन साल बाद केस में चार्जशीट पेश हो रही है।
बिजली चोरी को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा 2019 में एंटी पावर थेफ्ट थाना की शुरूआत की गई थी। वसुंधरा में खोले गए थाने में दो निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक और 10 सिपाही की नियुक्ति का प्रावधान था। थाने को कभी भी पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिला। वर्तमान समय में पूरा थाना उपनिरीक्षक शैलेंद्र शर्मा के भरोसे है। ऐसे में विवेचना और अन्य कामों में देरी के चलते बिजली चोरी करने वाले साल दर साल कोर्ट के सामने पेश नहीं हो पाते। बिना जुर्माना भरे ही वह दोबारा बिजली का उपयोग शुरू कर देते हैं।
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जुर्माना भरने पर केस हो जाता है खारिज
बिजली चोरी पकड़े जाने पर सबसे पहले जेई या एसडीओ के द्वारा चेकिंग रिपोर्ट बनाई जाती है। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया जाता है। यदि दो-चार दिनों में बिजली चोरी करने वाला जुर्माना भर देता है, तो अधिशासी अभियंता द्वारा क्लीन चिट दे दी जाती है, जिसके आधार पर रिपोर्ट को खारिज कर दिया जाता है। इसके बाद 600 रुपये का चार्ज लेकर कनेक्शन जोड़ दिया जाता है।
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एक दिन में दो विवेचना, रिपोर्ट दर्ज होती है 50
एंटी पावर थेफ्ट थाने में हर रोज 40 से 50 बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। एक ही उपनिरीक्षक के होने से दिन में एक या दो मुकदमों की विवेचना हो पाती है। लगातार रिपोर्ट दर्ज होने से विवेचना की संख्या बढ़ जाती है। वर्तमान में थाने में 23,328 केस लंबित हैं।
साल- लंबित केस
2019 - 520
2020 - 9000
2021 - 11230
2022 - 2578
महीना काटे कनेक्शन जुर्माना जमा करने वाले लोगों की संख्या
फरवरी- 615 90
मार्च- 714 69
अप्रैल- 537 96
मई - 712 78