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30 आईसीयू बेड खाली, फिर भी भटक रहे हैं मरीज
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ज़िला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के साथ आए लोग। इलाज ना मिलने के कारण रही अव्यवस्थाएं?
30 आईसीयू बेड खाली, फिर भी भटक रहे हैं मरीज
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के बेकाबू होने के साथ ही इलाज के लिए मारामारी मची है। बड़ी संख्या में मरीज हर दिन अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन बहुत से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कई तो इलाज के अभाव में अस्पताल की दहलीज पर ही दम तोड़ दे रहे हैं। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिले के अस्पतालों में आईसीयू के सभी बेड फुल हो चुके हैं। ऐसे में मरीज को भर्ती न कर पाना उनकी मजबूरी है। लेकिन शनिवार को इसकी पड़ताल की गई तो सच्चाई इसके उलट पाई गई।
शनिवार को जिले के कोरोना अस्पतालों में 30 आईसीयू बेड खाली रहे बावजूद इसके जिला अस्पताल में एक महिला ने बेड न मिलने से इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता होने पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
जिले में चार सरकारी और 38 निजी कोरोना अस्पताल संचालित हैं। कुल 42 अस्पतालों में कोरोना के सामान्य मरीजों के लिए 3014 बेड उपलब्ध हैं। जिनमें से 2410 पर मरीज भर्ती हैं जबकि 680 बेड खाली हैं। इन अस्पतालों में 688 आईसीयू बेड और वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं। इनमें से 658 भरे हुए हैं जबकि शनिवार को 30 बेड खाली रहे। शासन का आदेश है कि अस्पताल हर दिन बेड की उपलब्धता की जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर देंगे साथ ही भर्ती के लिए डॉक्टरों के नंबर भी जारी करेंगे। लेकिन लोगों का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के लिए अस्पताल की ओर से जो नंबर जारी किए गए हैं, उन पर फोन करने पर कॉल पिक नहीं की जाती या फिर या पिक हो भी जाए तो सीधे न में जवाब मिलता है।
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शनिवार को कोरोना अस्पतालों में खाली आईसीयू बेड की स्थिति
रामा मेडिकल कॉलेज - 5
पाल्मोनिक हॉस्पिटल - 6
पलेटिव हॉस्पिटल - 4
सुशीला अस्पताल - 8
मेधा हॉस्पिटल - 3
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एमएमजी में पिछले दिनों से लगातार मौत
एमएमजी अस्पताल में पिछले सप्ताह भर में पांच से अधिक मौत हुई हैं। ऑक्सीजन की आस में पहुंचे लोगों की गोद में उनके अपने दम तोड़ गए। कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों को राहत के नाम पर आफत ही मिली। दिल्ली से पहुंची सुनीता कक्कड़, छपरौला निवासी रविन्द्र की तरह पांच से ज्यादा परिवारों ने इलाज के अभाव में अपनों को खो दिया। हालांकि एमएमजी कोविड अस्पताल नहीं है लेकिन यहां से अगर मरीजों को सही समय पर एंबुलेंस से कोरोना अस्पतालों में ले जाया जाए तो कुछ जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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एमएमजी में फिर एक महिला की मौत
एमएमजी अस्पताल में शनिवार को फरुखनगर से उषा नाम की महिला को लेकर उसके परिजन पहुंचे। उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजन भर्ती करने की गुहार लगाते रहे लेकिन डॉक्टरों ने पहले कोरोना टेस्ट कराने को कहा। टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसी दौरान ऑक्सीजन न मिलने से महिला की मौत हो गई। रोते बिलखते परिजन ऑटो से शव लेकर लौट गए।
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जिला एमएमजी अस्पताल में दोपहर करीब 12.30 बजे बीमार व्यक्ति को लेकर परिजन पहुंचे। कुछ देर तक इलाज मिलने का इंतजार किया, लेकिन नंबर आने में देरी थी। इसके बाद परिजन बीमार व्यक्ति को लेकर दूसरे अस्पताल की तलाश में चले गए। व्यथित परिजन बात करने की भी हालत में नहीं थे। इसके अलावा एक महिला भी सांस लेने की तकलीफ के चलते इलाज के लिए इंतजार करती दिखी।
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चेकिंग के लिए डीएम ने बनाईं 34 टीमें
अस्पतालों की मिल रही शिकायतों के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने 34 टीमों का गठन किया है। इन टीमों में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। ये टीमें कोरोना अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर वहां बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता की जानकारी लेंगी। डीएम ने बताया कि कुछ अस्पतालों की शिकायत मिल रही है कि कम लक्षणों वाले मरीज को छुट्टी नहीं दी जा रही है, ऐसे में बेड खाली होने में मुश्किल आ रही है। ये टीम अपनी रिपोर्ट एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी को देंगी, जो शिकायत पर एक्शन लेंगे।
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अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता देखकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अगर कोई अस्पताल खाली आईसीयू बीएड पर मरीज को भर्ती नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के बेकाबू होने के साथ ही इलाज के लिए मारामारी मची है। बड़ी संख्या में मरीज हर दिन अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन बहुत से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कई तो इलाज के अभाव में अस्पताल की दहलीज पर ही दम तोड़ दे रहे हैं। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिले के अस्पतालों में आईसीयू के सभी बेड फुल हो चुके हैं। ऐसे में मरीज को भर्ती न कर पाना उनकी मजबूरी है। लेकिन शनिवार को इसकी पड़ताल की गई तो सच्चाई इसके उलट पाई गई।
शनिवार को जिले के कोरोना अस्पतालों में 30 आईसीयू बेड खाली रहे बावजूद इसके जिला अस्पताल में एक महिला ने बेड न मिलने से इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता होने पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
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जिले में चार सरकारी और 38 निजी कोरोना अस्पताल संचालित हैं। कुल 42 अस्पतालों में कोरोना के सामान्य मरीजों के लिए 3014 बेड उपलब्ध हैं। जिनमें से 2410 पर मरीज भर्ती हैं जबकि 680 बेड खाली हैं। इन अस्पतालों में 688 आईसीयू बेड और वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं। इनमें से 658 भरे हुए हैं जबकि शनिवार को 30 बेड खाली रहे। शासन का आदेश है कि अस्पताल हर दिन बेड की उपलब्धता की जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर देंगे साथ ही भर्ती के लिए डॉक्टरों के नंबर भी जारी करेंगे। लेकिन लोगों का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के लिए अस्पताल की ओर से जो नंबर जारी किए गए हैं, उन पर फोन करने पर कॉल पिक नहीं की जाती या फिर या पिक हो भी जाए तो सीधे न में जवाब मिलता है।
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शनिवार को कोरोना अस्पतालों में खाली आईसीयू बेड की स्थिति
रामा मेडिकल कॉलेज - 5
पाल्मोनिक हॉस्पिटल - 6
पलेटिव हॉस्पिटल - 4
सुशीला अस्पताल - 8
मेधा हॉस्पिटल - 3
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एमएमजी में पिछले दिनों से लगातार मौत
एमएमजी अस्पताल में पिछले सप्ताह भर में पांच से अधिक मौत हुई हैं। ऑक्सीजन की आस में पहुंचे लोगों की गोद में उनके अपने दम तोड़ गए। कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों को राहत के नाम पर आफत ही मिली। दिल्ली से पहुंची सुनीता कक्कड़, छपरौला निवासी रविन्द्र की तरह पांच से ज्यादा परिवारों ने इलाज के अभाव में अपनों को खो दिया। हालांकि एमएमजी कोविड अस्पताल नहीं है लेकिन यहां से अगर मरीजों को सही समय पर एंबुलेंस से कोरोना अस्पतालों में ले जाया जाए तो कुछ जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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एमएमजी में फिर एक महिला की मौत
एमएमजी अस्पताल में शनिवार को फरुखनगर से उषा नाम की महिला को लेकर उसके परिजन पहुंचे। उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजन भर्ती करने की गुहार लगाते रहे लेकिन डॉक्टरों ने पहले कोरोना टेस्ट कराने को कहा। टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसी दौरान ऑक्सीजन न मिलने से महिला की मौत हो गई। रोते बिलखते परिजन ऑटो से शव लेकर लौट गए।
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जिला एमएमजी अस्पताल में दोपहर करीब 12.30 बजे बीमार व्यक्ति को लेकर परिजन पहुंचे। कुछ देर तक इलाज मिलने का इंतजार किया, लेकिन नंबर आने में देरी थी। इसके बाद परिजन बीमार व्यक्ति को लेकर दूसरे अस्पताल की तलाश में चले गए। व्यथित परिजन बात करने की भी हालत में नहीं थे। इसके अलावा एक महिला भी सांस लेने की तकलीफ के चलते इलाज के लिए इंतजार करती दिखी।
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चेकिंग के लिए डीएम ने बनाईं 34 टीमें
अस्पतालों की मिल रही शिकायतों के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने 34 टीमों का गठन किया है। इन टीमों में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। ये टीमें कोरोना अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर वहां बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता की जानकारी लेंगी। डीएम ने बताया कि कुछ अस्पतालों की शिकायत मिल रही है कि कम लक्षणों वाले मरीज को छुट्टी नहीं दी जा रही है, ऐसे में बेड खाली होने में मुश्किल आ रही है। ये टीम अपनी रिपोर्ट एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी को देंगी, जो शिकायत पर एक्शन लेंगे।
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अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता देखकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अगर कोई अस्पताल खाली आईसीयू बीएड पर मरीज को भर्ती नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ