{"_id":"6019af118ebc3e3769377082","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd2130592198","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी गेट धरना स्थल पर लगाई गई धारा 144 के खिलाफ कोर्ट में हुई सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी गेट धरना स्थल पर लगाई गई धारा 144 के खिलाफ कोर्ट में हुई सुनवाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी गेट धरना स्थल पर लगाई गई धारा 144 के खिलाफ कोर्ट में हुई सुनवाई
गाजियाबाद। किसान आंदोलन के चलते यूपी गेट पर लगाई गई धारा-144 के खिलाफ दाखिल याचिका पर मंगलवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता नाहर सिंह यादव ने कहा कि जिलाधिकारी को राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारा-144 लगाने का अधिकार नहीं है। सार्वजनिक स्थान जैसे कचहरी, रेलवे स्टेशन, कलक्ट्रेट, सरकारी अस्पताल, प्राइवेट व रोडेवेज बस अड्डा, नेशनल हाइवे पर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह या गृह सचिव ही धारा-144 लगा सकते हैं। इसके साथ ही धारा-133 पर भी अदालत में बहस हुई। अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव ने किसानों का पक्ष रखते हुए अदालत में कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धारा-144 या कर्फ्यू लगाने का अधिकार केवल प्रमुख सचिव गृह या गृह सचिव को ही है। डीएम को ये अधिकार नहीं है। अदालत ने सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राजेशचंद्र शर्मा को शासन व प्रशासन का पक्ष रखने का आदेश दिया। इस पर उन्होंने कहा कि वह जिलाधिकारी का पक्ष रख सकते हैं। शासन का पक्ष रखने के लिए वह अधिकृत नहीं है। इस पर अदालत ने उनसे कहा कि वह शासन को सूचना दें ताकि शासन स्तर से पक्ष रखने के लिए किसी को नामित किया जा सके। इसके बाद आगे की सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार फरवरी की तारीख लगा दी।
जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने जिले में शांति व्यवस्था कायम रखने, बोर्ड परीक्षा एवं त्योहार को देखते हुए 20 जनवरी से 15 मार्च तक धारा-144 लगाई है। यूपी गेट पर धरना दे रहे किसानों का आरोप है कि उन्हें धरना स्थल से हटाने के लिए प्रशासन ने धारा-144 लगाई है। इसके खिलाफ किसानों की तरफ से याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता पूर्व बार अध्यक्ष नाहर सिंह यादव, जयबीर सिंह, जितेंद्र, राजेंद्र चौधरी, अमर पाल, राजकिशोर शर्मा, औरंगजेब खान, लोकेश कुमार, आदिल खां व दीपक कुमार ने किसानों का पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसानों व आम जनता को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद। किसान आंदोलन के चलते यूपी गेट पर लगाई गई धारा-144 के खिलाफ दाखिल याचिका पर मंगलवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता नाहर सिंह यादव ने कहा कि जिलाधिकारी को राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारा-144 लगाने का अधिकार नहीं है। सार्वजनिक स्थान जैसे कचहरी, रेलवे स्टेशन, कलक्ट्रेट, सरकारी अस्पताल, प्राइवेट व रोडेवेज बस अड्डा, नेशनल हाइवे पर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह या गृह सचिव ही धारा-144 लगा सकते हैं। इसके साथ ही धारा-133 पर भी अदालत में बहस हुई। अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव ने किसानों का पक्ष रखते हुए अदालत में कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धारा-144 या कर्फ्यू लगाने का अधिकार केवल प्रमुख सचिव गृह या गृह सचिव को ही है। डीएम को ये अधिकार नहीं है। अदालत ने सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राजेशचंद्र शर्मा को शासन व प्रशासन का पक्ष रखने का आदेश दिया। इस पर उन्होंने कहा कि वह जिलाधिकारी का पक्ष रख सकते हैं। शासन का पक्ष रखने के लिए वह अधिकृत नहीं है। इस पर अदालत ने उनसे कहा कि वह शासन को सूचना दें ताकि शासन स्तर से पक्ष रखने के लिए किसी को नामित किया जा सके। इसके बाद आगे की सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार फरवरी की तारीख लगा दी।
विज्ञापन
जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने जिले में शांति व्यवस्था कायम रखने, बोर्ड परीक्षा एवं त्योहार को देखते हुए 20 जनवरी से 15 मार्च तक धारा-144 लगाई है। यूपी गेट पर धरना दे रहे किसानों का आरोप है कि उन्हें धरना स्थल से हटाने के लिए प्रशासन ने धारा-144 लगाई है। इसके खिलाफ किसानों की तरफ से याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता पूर्व बार अध्यक्ष नाहर सिंह यादव, जयबीर सिंह, जितेंद्र, राजेंद्र चौधरी, अमर पाल, राजकिशोर शर्मा, औरंगजेब खान, लोकेश कुमार, आदिल खां व दीपक कुमार ने किसानों का पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसानों व आम जनता को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है।
विज्ञापन