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रीयल एस्टेट की मंदी की मार से हिला जीडीए
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Tue, 26 Apr 2016 01:31 AM IST
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जीडीए
- फोटो : अमर उजाला
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रीयल एस्टेट मंदी की मार से जीडीए भी हिल गया है। इस सेक्टर से होने वाली आय लगभग ठप सी हो गई है। हालात यह हैं कि बीते सात माह में सिर्फ एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का ही नक्शा जीडीए ने पास किया है, जबकि दो वर्ष पूर्व औसतन प्रतिमाह दो से चार ऐसे नक्शे पास होते थे।
दूसरी ओर, शहर में जारी कई बड़े विकास कार्यों पर जीडीए मोटी रकम खर्च कर रहा है। बोर्ड बैठक में भाग लेने आए प्रमुख सचिव (आवास) सदाकांत ने जीडीए अधिकारियों को आय बढ़ाने के लिए फाइनेंस एडवाइजर नियुक्त करने को मंजूरी दी है।
जीडीए ने 2009 में सदरपुर के पांच गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर करीब 1400 एकड़ में मधुबन-बापूधाम स्कीम लांच की थी। जमीन की अड़चनों के चलते यह स्कीम अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हो सकी है।
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इसके बाद 2014 में जीडीए ने कोयल एंक्लेव योजना लांच की। इसके बाद से जमीन न मिलने से जीडीए कोई बड़ी स्कीम नहीं लांच कर पाया है। नई स्कीम न आने से जीडीए की कमाई ठप है। रीयल एस्टेट सेक्टर की मंदी से जीडीए की नक्शा पास करने, कंपाउंडिंग आदि से होने वाली आय घट गई है।
जीडीए सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने बताया कि बीते सात माह में सिर्फ कौशांबी स्थित एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का ही नक्शा पास हुआ है। इस श्रेणी के नक्शों के आवेदन भी नहीं हो रहे।
जीडीए वीसी विजय यादव के मुताबिक प्रमुख सचिव (आवास) ने भी बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए फाइनेंस एडवाइडर की नियुक्ति पर सहमति जताई है। एडवाइजर प्राधिकरण की आय बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
लैंडयूज बदला तो मेट्रो को मिलेगा फंड
आवास विकास परिषद की वसुंधरा योजना के सेक्टर सात और आठ की करीब 102 एकड़ जमीन का लैंडयूज बदला तो जीडीए को भी खासी राहत मिलेगी। आवास विकास परिषद ने लैंडयूज बदलने के बाद होने वाली आय से दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो के लिए तय फंड देने की बात कही है। इस रूट से मेट्रो लाने पर परिषद को करीब 400 करोड़ रुपये का अंशदान देना है।
बीते दिनों जीडीए में हुई 145वीं बोर्ड बैठक में दोनों सेक्टरों की जमीन का लैंडयूज मिक्स्ड करने संबंधी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। लैंडयूज मिक्सड होने के बाद दोनों जमीनों पर नीचे दुकान ऊपर-मकान की तर्ज पर निर्माण होंगे। जमीन की बिक्री से आवास विकास को करोड़ों की आय होगी। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही लैंडयूज चेंज की मंजूरी का शासनादेश जारी हो सकता है।
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दूसरी ओर, शहर में जारी कई बड़े विकास कार्यों पर जीडीए मोटी रकम खर्च कर रहा है। बोर्ड बैठक में भाग लेने आए प्रमुख सचिव (आवास) सदाकांत ने जीडीए अधिकारियों को आय बढ़ाने के लिए फाइनेंस एडवाइजर नियुक्त करने को मंजूरी दी है।
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जीडीए ने 2009 में सदरपुर के पांच गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर करीब 1400 एकड़ में मधुबन-बापूधाम स्कीम लांच की थी। जमीन की अड़चनों के चलते यह स्कीम अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हो सकी है।
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इसके बाद 2014 में जीडीए ने कोयल एंक्लेव योजना लांच की। इसके बाद से जमीन न मिलने से जीडीए कोई बड़ी स्कीम नहीं लांच कर पाया है। नई स्कीम न आने से जीडीए की कमाई ठप है। रीयल एस्टेट सेक्टर की मंदी से जीडीए की नक्शा पास करने, कंपाउंडिंग आदि से होने वाली आय घट गई है।
जीडीए सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने बताया कि बीते सात माह में सिर्फ कौशांबी स्थित एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का ही नक्शा पास हुआ है। इस श्रेणी के नक्शों के आवेदन भी नहीं हो रहे।
जीडीए वीसी विजय यादव के मुताबिक प्रमुख सचिव (आवास) ने भी बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए फाइनेंस एडवाइडर की नियुक्ति पर सहमति जताई है। एडवाइजर प्राधिकरण की आय बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
लैंडयूज बदला तो मेट्रो को मिलेगा फंड
आवास विकास परिषद की वसुंधरा योजना के सेक्टर सात और आठ की करीब 102 एकड़ जमीन का लैंडयूज बदला तो जीडीए को भी खासी राहत मिलेगी। आवास विकास परिषद ने लैंडयूज बदलने के बाद होने वाली आय से दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो के लिए तय फंड देने की बात कही है। इस रूट से मेट्रो लाने पर परिषद को करीब 400 करोड़ रुपये का अंशदान देना है।
बीते दिनों जीडीए में हुई 145वीं बोर्ड बैठक में दोनों सेक्टरों की जमीन का लैंडयूज मिक्स्ड करने संबंधी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। लैंडयूज मिक्सड होने के बाद दोनों जमीनों पर नीचे दुकान ऊपर-मकान की तर्ज पर निर्माण होंगे। जमीन की बिक्री से आवास विकास को करोड़ों की आय होगी। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही लैंडयूज चेंज की मंजूरी का शासनादेश जारी हो सकता है।