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बचाओ.. खतरे में मछली रानी
ब्यूरो,अमर उजाला मोदीनगर
Updated Mon, 10 Oct 2016 12:50 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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एक बार फिर गंगनहर के किनारे मछली माफिया की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। 11 अक्तूबर की रात से एक महीने के लिए हरिद्वार से गंगनहर का पानी रोक दिया जाएगा। इसी के साथ शुरू होगा पानी में जहर डालकर मछलियों के शिकार का खेल।
हैरत की बात तो यह है कि पुलिस प्रशासन भी इस खेल को रोक नहीं पाते। यह सिलसिला सालों से चल रहा है और पता नहीं कब थमेगा। हालांकि अभी तक प्रशासन की कोई तैयारी नहीं दिखती।
अक्तूबर महीने में हर साल सफाई के लिए गंगनहर को हरिद्वार से बंद किया जाता है। इस बीच मेरठ के सिवाल खास से मुरादनगर गंगनहर तक मछली माफिया जगह-जगह मछलियों का शिकार करने के लिए जाल बिछाते हैं।
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इतना ही नहीं मछलियों को मारने के लिए माफिया पानी में कीटनाशक नोवान और ब्लीचिंग पाउडर मिला देते हैं। इससे मछलियां मरने के बाद पानी के ऊपर आ जाती हैं।
इसके बाद करनाल, मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली, कानपुर आदि में इनकी तस्करी की जाती है। सूत्र बताते हैं कि करीब 15 दिन तक चलने वाले इस धंधे से माफिया लाखों कमाते हैं। सूत्रों के मुताबिक यह धंधा पुलिस की सरपरस्ती में चलता है।
प्रशासन का दावा-मछली माफिया पर है पैनी नजर
एसडीएम अतुल कुमार का कहना है कि निवाड़ी और मुरादनगर पुलिस को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वह मछली माफियाओं पर पैनी नजर रखें। अन्य अफसरों को भी गंगनहर का दौरा करने को कहा गया है। सहायक निदेशक मत्स्य एके गौतम ने बताया कि प्रशासन के साथ मिलकर इस धंधे को रोकने के लिए टीम गठित की जाएंगी।
मेरठ के सिवाल खास में धंधा जोरों पर
मेरठ से मुरादनगर तक मछलियों को गंगनहर से निकलने का धंधा सबसे अधिक मेरठ के सिवाल खास गंगनहर पुल के पास होता है। फल की ठेली लगाने वाले सिवाल खास के एक व्यक्ति ने बताया कि माफिया मछली पकड़ने के धंधे में अपने गुर्गों के अलावा छोटे बच्चों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस को शक न हो।
सेहत के लिए भी खतरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरादनगर प्रभारी डा. सुर्यांशु ओझा ने बताया कि दवाई के जरिए मारी जाने वाली मछलियां सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। रसायन द्वारा मारी गई मछलियों के सेवन से किडनी फेल होने और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
2014 से अब तक नहीं हुई कार्रवाई
प्रशासन भले ही इस बार धंधा रोकने के दावे कर रहा हो मगर यह संभव नहीं लगता। 2014 में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। तब प्रशासन जरूर हरकत में आया और गंगनहर पर पुलिस गश्त बढ़ाते हुए निगरानी रखने के निर्देश हुए थे।
धंधे में सफेदपोश भी शामिल
खास बात यह है कि चंद रुपयों की खातिर इंसान के जीवन से खिलवाड़ करने वाले माफिया पर पुलिस हाथ नहीं डाल पाती। सूत्र बताते हैं कि इस कारोबार में कई सफेदपोश नेता शामिल हैं, जो लखनऊ की सत्ता में अच्छी पकड़ रखते हैं।
मेरठ-गाजियाबाद पुलिस को दे रहे चुनौती
गंगनहर में जहर डालकर मछलियों का कारोबार करने वाले माफिया मेरठ और गाजियाबाद दोनों जिलों की पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस खानापूर्ति करती है। पिछले कई साल से देखा जा रहा है कि अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दिखावे के लिए चौकसी बढ़ा दी जाती है। कार्य बदस्तूर जारी रहता है।
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हैरत की बात तो यह है कि पुलिस प्रशासन भी इस खेल को रोक नहीं पाते। यह सिलसिला सालों से चल रहा है और पता नहीं कब थमेगा। हालांकि अभी तक प्रशासन की कोई तैयारी नहीं दिखती।
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अक्तूबर महीने में हर साल सफाई के लिए गंगनहर को हरिद्वार से बंद किया जाता है। इस बीच मेरठ के सिवाल खास से मुरादनगर गंगनहर तक मछली माफिया जगह-जगह मछलियों का शिकार करने के लिए जाल बिछाते हैं।
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इतना ही नहीं मछलियों को मारने के लिए माफिया पानी में कीटनाशक नोवान और ब्लीचिंग पाउडर मिला देते हैं। इससे मछलियां मरने के बाद पानी के ऊपर आ जाती हैं।
इसके बाद करनाल, मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली, कानपुर आदि में इनकी तस्करी की जाती है। सूत्र बताते हैं कि करीब 15 दिन तक चलने वाले इस धंधे से माफिया लाखों कमाते हैं। सूत्रों के मुताबिक यह धंधा पुलिस की सरपरस्ती में चलता है।
प्रशासन का दावा-मछली माफिया पर है पैनी नजर
एसडीएम अतुल कुमार का कहना है कि निवाड़ी और मुरादनगर पुलिस को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वह मछली माफियाओं पर पैनी नजर रखें। अन्य अफसरों को भी गंगनहर का दौरा करने को कहा गया है। सहायक निदेशक मत्स्य एके गौतम ने बताया कि प्रशासन के साथ मिलकर इस धंधे को रोकने के लिए टीम गठित की जाएंगी।
मेरठ के सिवाल खास में धंधा जोरों पर
मेरठ से मुरादनगर तक मछलियों को गंगनहर से निकलने का धंधा सबसे अधिक मेरठ के सिवाल खास गंगनहर पुल के पास होता है। फल की ठेली लगाने वाले सिवाल खास के एक व्यक्ति ने बताया कि माफिया मछली पकड़ने के धंधे में अपने गुर्गों के अलावा छोटे बच्चों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस को शक न हो।
सेहत के लिए भी खतरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरादनगर प्रभारी डा. सुर्यांशु ओझा ने बताया कि दवाई के जरिए मारी जाने वाली मछलियां सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। रसायन द्वारा मारी गई मछलियों के सेवन से किडनी फेल होने और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
2014 से अब तक नहीं हुई कार्रवाई
प्रशासन भले ही इस बार धंधा रोकने के दावे कर रहा हो मगर यह संभव नहीं लगता। 2014 में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। तब प्रशासन जरूर हरकत में आया और गंगनहर पर पुलिस गश्त बढ़ाते हुए निगरानी रखने के निर्देश हुए थे।
धंधे में सफेदपोश भी शामिल
खास बात यह है कि चंद रुपयों की खातिर इंसान के जीवन से खिलवाड़ करने वाले माफिया पर पुलिस हाथ नहीं डाल पाती। सूत्र बताते हैं कि इस कारोबार में कई सफेदपोश नेता शामिल हैं, जो लखनऊ की सत्ता में अच्छी पकड़ रखते हैं।
मेरठ-गाजियाबाद पुलिस को दे रहे चुनौती
गंगनहर में जहर डालकर मछलियों का कारोबार करने वाले माफिया मेरठ और गाजियाबाद दोनों जिलों की पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस खानापूर्ति करती है। पिछले कई साल से देखा जा रहा है कि अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दिखावे के लिए चौकसी बढ़ा दी जाती है। कार्य बदस्तूर जारी रहता है।