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Ghaziabad News: कंपनी का डाटा लौटाने के लिए पूर्व कर्मी ने मांगे 10 लाख रुपये
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गाजियाबाद। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मजदूर और कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कंपनी के मालिक ने पूर्व कर्मचारी पर डाटा वापस नहीं करने का आरोप लगाया है। पूर्व कर्मचारी ने डाटा देने के बदले 10 लाख रुपये मांगे हैं। पीड़ित का आरोप है कि कुछ पूर्व कर्मचारियों ने मिलकर उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाने के लिए गठजोड़ किया है। पीड़ित की तहरीर पर विजयनगर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि सिद्धार्थ विहार निवासी सादाब आलम के मुताबिक वह नोएडा स्थित अपनी कंपनी के माध्यम से मल्टीनेशनल कंपनियों को कर्मचारी उपलब्ध कराते हैं। उनके अनुसार विकास डागर नामक व्यक्ति ने खुद को आईटी कंपनियों का विशेषज्ञ बताकर कंपनी में नौकरी हासिल की। पहले उसने अपनी पत्नी को नौकरी दिलाने का दबाव बनाया और बाद में स्वयं 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन पर सितंबर 2023 में नियुक्त हुआ। आरोप है कि विकास डागर अनुभवहीन निकला और कंपनी के कामकाज पर असर पड़ा। उसके कहने पर एक अन्य कर्मचारी को भी 50 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया। बाद में कंपनी विरोधी गतिविधियां सामने आने पर 16 मई 2024 को उसे हटा दिया गया। नौकरी से हटाने के बाद आरोपी ने कंपनी का लैपटॉप, डाटा और जरूरी दस्तावेज लौटाने से इनकार कर दिया। उल्टा 10 लाख रुपये की मांग करते हुए धमकी दी कि रकम न देने पर डाटा नष्ट कर देगा और कंपनी को नुकसान पहुंचाएगा। आरोपी विकास डागर, विकल शर्मा, हिमांशु कुमार और जसप्रीत पुरी ने इंटरनेट मीडिया पर कंपनी की छवि खराब करने की साजिश रची। इससे करीब 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ। एसीपी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर चारों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि सिद्धार्थ विहार निवासी सादाब आलम के मुताबिक वह नोएडा स्थित अपनी कंपनी के माध्यम से मल्टीनेशनल कंपनियों को कर्मचारी उपलब्ध कराते हैं। उनके अनुसार विकास डागर नामक व्यक्ति ने खुद को आईटी कंपनियों का विशेषज्ञ बताकर कंपनी में नौकरी हासिल की। पहले उसने अपनी पत्नी को नौकरी दिलाने का दबाव बनाया और बाद में स्वयं 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन पर सितंबर 2023 में नियुक्त हुआ। आरोप है कि विकास डागर अनुभवहीन निकला और कंपनी के कामकाज पर असर पड़ा। उसके कहने पर एक अन्य कर्मचारी को भी 50 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया। बाद में कंपनी विरोधी गतिविधियां सामने आने पर 16 मई 2024 को उसे हटा दिया गया। नौकरी से हटाने के बाद आरोपी ने कंपनी का लैपटॉप, डाटा और जरूरी दस्तावेज लौटाने से इनकार कर दिया। उल्टा 10 लाख रुपये की मांग करते हुए धमकी दी कि रकम न देने पर डाटा नष्ट कर देगा और कंपनी को नुकसान पहुंचाएगा। आरोपी विकास डागर, विकल शर्मा, हिमांशु कुमार और जसप्रीत पुरी ने इंटरनेट मीडिया पर कंपनी की छवि खराब करने की साजिश रची। इससे करीब 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ। एसीपी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर चारों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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