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Ghaziabad News: डासना सीएचसी के पूर्व कार्यवाहक अधीक्षक पर भ्रष्टाचार का आरोप
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गाजियाबाद। डासना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के पूर्व कार्यवाहक अधीक्षक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग लखनऊ में शिकायत की गई है। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी को भेजते हुए मेरठ मंडल के अपर आयुक्त शमशाद हुसैन ने पूरे प्रकरण की जांच कराने के बाद कार्रवाई का आदेश दिया है।
लखनऊ निवासी सुनील वाल्मिकी ने शिकायती पत्र में कहा है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच स्वास्थ्य केंद्र पर कराए गए कार्याें में अधीक्षक ने हेराफेरी करते हुए कमीशन लिया है। मदवार खर्च का विवरण देते हुए सुनील ने कहा है कि अस्पताल परिसर में आवास आवंटित कराने के बावजूद अधीक्षक द्वारा किराया भत्ता लिया जा रहा था। आरोप है कि तत्कालीन कार्यवाहक अधीक्षक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डासना के अधीन ग्रामीण उप स्वास्थ्य उप केंद्रों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले मद से 20 लाख रुपये रोगी कल्याण समिति, सीएचसी के अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोगी कल्याण समिति के एकत्र लगभग 30 लाख रुपये, साज सज्जा एवं अन्य मदों से लगभग 20 लाख रुपये, एनक्यूएएस से 22 लगभग लाख रुपये, कायाकल्प से चार लाख, जननी सुरक्षा आहार से लगभग छह लाख, यूजर चार्जेज से तीन लाख, पीपीएन यूनिट वाहन से 12 लाख, अल्टरनेटिव वैक्सीन डिलीवरी से 12 लाख, कोरोना टीकाकरण, उपचार एवं वाहन पर 20 लाख रुपये खर्च दिखाए हैं और इसमें 50 फीसदी रिश्वतखोरी की गई है। नियम विपरीत संविदा कर्मियों को सरकारी आवास देकर उनके तीन हजार रुपये लिया जा रहा था। सरकारी आवास में रहने वाले इन कर्मचारियों द्वारा उपभोग की जा रही बिजली और पानी का शुल्क भी राजकीय कोष से जमा किया जा रहा है।
कोट
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि आरोपी चिकित्सा अधीक्षक को सीएचसी से हटा दिया गया है। मामले की जांच रिपोर्ट जल्द ही मेरठ मंडल आयुक्त और शासन को भेज दी जाएगी। शिकायतकर्ता को बयान दर्ज कराने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा गया है। अभी तक कार्यालय में बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं।
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लखनऊ निवासी सुनील वाल्मिकी ने शिकायती पत्र में कहा है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच स्वास्थ्य केंद्र पर कराए गए कार्याें में अधीक्षक ने हेराफेरी करते हुए कमीशन लिया है। मदवार खर्च का विवरण देते हुए सुनील ने कहा है कि अस्पताल परिसर में आवास आवंटित कराने के बावजूद अधीक्षक द्वारा किराया भत्ता लिया जा रहा था। आरोप है कि तत्कालीन कार्यवाहक अधीक्षक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डासना के अधीन ग्रामीण उप स्वास्थ्य उप केंद्रों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले मद से 20 लाख रुपये रोगी कल्याण समिति, सीएचसी के अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोगी कल्याण समिति के एकत्र लगभग 30 लाख रुपये, साज सज्जा एवं अन्य मदों से लगभग 20 लाख रुपये, एनक्यूएएस से 22 लगभग लाख रुपये, कायाकल्प से चार लाख, जननी सुरक्षा आहार से लगभग छह लाख, यूजर चार्जेज से तीन लाख, पीपीएन यूनिट वाहन से 12 लाख, अल्टरनेटिव वैक्सीन डिलीवरी से 12 लाख, कोरोना टीकाकरण, उपचार एवं वाहन पर 20 लाख रुपये खर्च दिखाए हैं और इसमें 50 फीसदी रिश्वतखोरी की गई है। नियम विपरीत संविदा कर्मियों को सरकारी आवास देकर उनके तीन हजार रुपये लिया जा रहा था। सरकारी आवास में रहने वाले इन कर्मचारियों द्वारा उपभोग की जा रही बिजली और पानी का शुल्क भी राजकीय कोष से जमा किया जा रहा है।
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सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि आरोपी चिकित्सा अधीक्षक को सीएचसी से हटा दिया गया है। मामले की जांच रिपोर्ट जल्द ही मेरठ मंडल आयुक्त और शासन को भेज दी जाएगी। शिकायतकर्ता को बयान दर्ज कराने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा गया है। अभी तक कार्यालय में बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं।
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