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Ghaziabad News: पादरी को फंसाने के लिए बनाई पुलिस की फर्जी मुहर
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मसूरी। एक पादरी को झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए फर्जी पुलिस मुहर और कूटरचित दस्तावेज बनाने के आरोप में एक युवती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई है। पादरी जैकब जोसेफ ने युवती पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसीपी मसूरी सुनील कुमार ने बताया कि पादरी जैकब जोसेफ के मुताबिक वह वर्ष 2021 में ज्योति निकेतन सेमिनरी मसूरी में मुख्य पादरी थे। उसी वर्ष, सेमिनरी से जुड़े ख्रीस्त राजा स्कूल के चपरासी हुकुम सिंह को 31 मार्च 2021 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद, हुकुम सिंह और उनके परिजनों ने पादरियों से अवैध रूप से पैसों की मांग की। मांग पूरी न होने पर उन्होंने झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। हुकुम सिंह की पुत्री प्रियंका और पुत्र प्रमोद ने 2022 में मसूरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पादरी व अन्य के खिलाफ छेड़छाड़, दुष्कर्म के प्रयास, गाली-गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी, एससी/एसटी अधिनियम और आईटी अधिनियम जैसी धाराओं में मामला दर्ज हुआ। पुलिस जांच में दुष्कर्म के प्रयास और आईटी अधिनियम के आरोप झूठे पाए गए, जिन्हें हटा दिया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2024 के आदेश से एससी/एसटी अधिनियम की धाराओं को भी निरस्त कर दिया। एसीपी ने बताया कि युवती के खिलाफ फर्जी दस्तावेज बनाने, जाली मुहर इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी के आरोप में प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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फर्जी शिकायतों का खुलासा
प्रियंका की साजिश का खुलासा तब हुआ जब पादरी ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। उसने अपनी शिकायतों को पुराना दिखाने के लिए 22 दिसंबर 2020 और चार अक्तूबर 2021 की दो फर्जी शिकायतें तैयार कीं। इन पर थाना मसूरी की फर्जी मुहर भी लगाई गई थी। पादरी जोसेफ की 21 अप्रैल 2025 की आरटीआई के जवाब में पुलिस उपायुक्त ग्रामीण ने 15 मई 2025 को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि थाना मसूरी के रोजनामचा में इन कथित शिकायतों का कोई विवरण दर्ज नहीं है। पादरी जैकब जोसेफ ने 18 नवंबर 2025 को पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत दी थी और एसीपी मसूरी कार्यालय में बयान भी दर्ज कराए थे, लेकिन तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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एसीपी मसूरी सुनील कुमार ने बताया कि पादरी जैकब जोसेफ के मुताबिक वह वर्ष 2021 में ज्योति निकेतन सेमिनरी मसूरी में मुख्य पादरी थे। उसी वर्ष, सेमिनरी से जुड़े ख्रीस्त राजा स्कूल के चपरासी हुकुम सिंह को 31 मार्च 2021 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद, हुकुम सिंह और उनके परिजनों ने पादरियों से अवैध रूप से पैसों की मांग की। मांग पूरी न होने पर उन्होंने झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। हुकुम सिंह की पुत्री प्रियंका और पुत्र प्रमोद ने 2022 में मसूरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पादरी व अन्य के खिलाफ छेड़छाड़, दुष्कर्म के प्रयास, गाली-गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी, एससी/एसटी अधिनियम और आईटी अधिनियम जैसी धाराओं में मामला दर्ज हुआ। पुलिस जांच में दुष्कर्म के प्रयास और आईटी अधिनियम के आरोप झूठे पाए गए, जिन्हें हटा दिया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2024 के आदेश से एससी/एसटी अधिनियम की धाराओं को भी निरस्त कर दिया। एसीपी ने बताया कि युवती के खिलाफ फर्जी दस्तावेज बनाने, जाली मुहर इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी के आरोप में प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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फर्जी शिकायतों का खुलासा
प्रियंका की साजिश का खुलासा तब हुआ जब पादरी ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। उसने अपनी शिकायतों को पुराना दिखाने के लिए 22 दिसंबर 2020 और चार अक्तूबर 2021 की दो फर्जी शिकायतें तैयार कीं। इन पर थाना मसूरी की फर्जी मुहर भी लगाई गई थी। पादरी जोसेफ की 21 अप्रैल 2025 की आरटीआई के जवाब में पुलिस उपायुक्त ग्रामीण ने 15 मई 2025 को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि थाना मसूरी के रोजनामचा में इन कथित शिकायतों का कोई विवरण दर्ज नहीं है। पादरी जैकब जोसेफ ने 18 नवंबर 2025 को पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत दी थी और एसीपी मसूरी कार्यालय में बयान भी दर्ज कराए थे, लेकिन तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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