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Ghaziabad News: उद्यमियों को गाजियाबाद में नहीं मिल रही जमीन, अब बायबैक ही एक सहारा
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गाजियाबाद। जिले में नए उद्योग स्थापित कराने के लिए अब यूपीसीडा के सामने जमीन न होने की वजह से बड़ी चुनौती है। उद्यमियों ने नए विकल्पों को तलाशना शुरू कर दिया है। यूपीसीडा अब नए उद्योगों को स्थापित कराने के लिए आखिरी विकल्प के रूप में पिछली व्यवस्था का सहारा लेने को मजबूर हो रहा है। स्थिति यह है कि जिले में 95 फीसदी बंजर पड़ी जमीन पर भी उद्योग स्थापित हो चुके हैं। इसकी वजह से अब जमीन का टोटा है।
वर्तमान में गाजियाबाद में 10 औद्योगिक क्षेत्रों में 27 हजार विनिर्माण कारखाने, 1200 लघु उद्योग, 149 मध्यम उद्योग और 45 भारी उद्योग हैं। इस औद्योगिक क्षेत्र में 5.4 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल पिस्टन और रिंग उद्योग, होम फर्निशिंग उद्योग, ऑटोमोटिव फैब्रिक उद्योग, फैशन एक्सेसरीज और स्टील इनगॉट्स उद्योग कुछ प्रसिद्ध उद्योग स्थापित किए जा चुके हैं। इन उद्योगों का उत्पाद यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और एशिया के पूर्वी क्षेत्रों समेत 30 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है।
हाल ही में यूपीसीडा की ओर से नया औद्योगिक क्षेत्र 345 एकड़ में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 141 एकड़ भूमि को ग्राम समाज और एमएलसी की मिश्रित भूमि से लिया जाना था। इसके लिए शासन को पत्र भेजे करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन करने की प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई है। अब यूपीसीडा के पास भूमि न होने की वजह से नए उद्योगों को स्थापित कर पाना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह से बायबैक व्यवस्था का सहारा लेना मजबूरी हो गई है। ताकि नए उद्योगों को स्थापित कराया जा सके।
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भूमि नहीं होने की वजह से नए उद्योग नहीं स्थापित हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसर भी नहीं सृजित हो रहे हैं। उद्यमी अन्य जिलों में विकल्पों की तलाश करने में लगे हैं।
यह है बायबैक व्यवस्था
बायबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत पुराने उद्यम बंद होने की स्थिति में यूपीसीडा की ओर से उस उद्यमी से भूमि को नए उद्यमी को दिलाई जाती है। ताकि उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि की तलाश कर रहे उद्यमी को आसानी से भूमि उपलब्ध कराई जा सके।
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप कुमार सत्यार्थी ने कहा कि जिले में नए उद्यम स्थापित करने के लिए अब भूमि नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से बायबैक व्यवस्था के माध्यम से नए उद्योगों को स्थापित किया जा रहा है। ताकि रोजगार के अवसर सृजित हो सकें।
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वर्तमान में गाजियाबाद में 10 औद्योगिक क्षेत्रों में 27 हजार विनिर्माण कारखाने, 1200 लघु उद्योग, 149 मध्यम उद्योग और 45 भारी उद्योग हैं। इस औद्योगिक क्षेत्र में 5.4 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल पिस्टन और रिंग उद्योग, होम फर्निशिंग उद्योग, ऑटोमोटिव फैब्रिक उद्योग, फैशन एक्सेसरीज और स्टील इनगॉट्स उद्योग कुछ प्रसिद्ध उद्योग स्थापित किए जा चुके हैं। इन उद्योगों का उत्पाद यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और एशिया के पूर्वी क्षेत्रों समेत 30 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है।
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हाल ही में यूपीसीडा की ओर से नया औद्योगिक क्षेत्र 345 एकड़ में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 141 एकड़ भूमि को ग्राम समाज और एमएलसी की मिश्रित भूमि से लिया जाना था। इसके लिए शासन को पत्र भेजे करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन करने की प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई है। अब यूपीसीडा के पास भूमि न होने की वजह से नए उद्योगों को स्थापित कर पाना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह से बायबैक व्यवस्था का सहारा लेना मजबूरी हो गई है। ताकि नए उद्योगों को स्थापित कराया जा सके।
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भूमि नहीं होने की वजह से नए उद्योग नहीं स्थापित हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसर भी नहीं सृजित हो रहे हैं। उद्यमी अन्य जिलों में विकल्पों की तलाश करने में लगे हैं।
यह है बायबैक व्यवस्था
बायबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत पुराने उद्यम बंद होने की स्थिति में यूपीसीडा की ओर से उस उद्यमी से भूमि को नए उद्यमी को दिलाई जाती है। ताकि उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि की तलाश कर रहे उद्यमी को आसानी से भूमि उपलब्ध कराई जा सके।
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप कुमार सत्यार्थी ने कहा कि जिले में नए उद्यम स्थापित करने के लिए अब भूमि नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से बायबैक व्यवस्था के माध्यम से नए उद्योगों को स्थापित किया जा रहा है। ताकि रोजगार के अवसर सृजित हो सकें।