{"_id":"6ae25cd4dd8a7b599200d3c9","slug":"emergency-call-boxes-on-the-highway-are-out-of-order-no-help-available-during-accidents-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-1010824-2026-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: हाईवे पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स खराब, हादसों में नहीं मिल रही मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: हाईवे पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स खराब, हादसों में नहीं मिल रही मदद
विज्ञापन
गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजमार्ग-9 (एनएच-9) और डीएमई (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे)पर सफर करने के दौरान आपात स्थिति में राहगीरों को तत्काल मदद पहुंचाने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। सड़क हादसों, लूटपाट या तकनीकी खराबी के वक्त पुलिस व एंबुलेंस सेवा से तुरंत संपर्क साधने के लिए हाईवे किनारे लगाए गए एसओएस (इमरजेंसी कॉल बॉक्स) खुद बदहाली के शिकार हैं। मार्ग पर लगे आधे से अधिक उपकरण लंबे समय से तकनीकी खामियों के चलते बंद पड़े हैं, जिससे जरूरतमंदों को संकट के समय कोई मदद नहीं मिल पा रही है। डीएमई और एनएच-9 पर बढ़ते हादसों को देखते हुए अमर उजाला की ओर से एसओएस बॉक्सों की पड़ताल की गई। जिसमें कई खराब या बक्से में बंद मिले।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
यहां-यहां खराब है एसओएस बॉक्स :
एनएच-9 पर लालकुआं कट के पास लगा एसओएस बॉक्स बक्से में बंद है। इससे फोन लगाने पर भी यह कार्य नहीं करता है। इसी प्रकार से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रोजाना हादसे होते रहते हैं। इससे लोगों की मदद के लिए सोलर से चलने वाले एसओएस बॉक्स लगाए गए हैं। जिसमें लैंड क्रॉफ्ट सोसायटी और बम्हेटा के सामने लगा एसओएस बॉक्स बाहर से ही पूरी तरह जर्जर नजर आ रहा है।
-- -- -- -- -- -
बटन दबाते रहो, नहीं मिलता जवाब : हाईवे से गुजर रहे वाहन चालक आलोक रंजन ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए ये बॉक्स बेकार साबित हो रहे हैं। आपात स्थिति में जब कोई चालक इनका लाल बटन दबाता है, तो न तो कोई घंटी बजती है और न ही कंट्रोल रूम से कोई आवाज आती है। कई किलोमीटर के दायरे में लगे इन कॉल बॉक्सों के तार टूटे हुए हैं, सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हैं।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -
रात में सुनसान हिस्सों में बढ़ जाता है खतरा : दिन के वक्त तो वाहन चालक आसपास के पेट्रोल पंप, ढाबों या अन्य राहगीरों से मदद ले लेते हैं, लेकिन असली परीक्षा देर रात होती है। रात के अंधेरे में सुनसान जगहों पर गाड़ी पंक्चर या खराब होने पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर मिलने की स्थिति में ये बूथ ही आखिरी सहारा होते हैं। इनके काम न करने से विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे परिवारों को भारी असुरक्षा के बीच घंटों फंसे रहना पड़ता है।
-- -- -- -- -- -- -- -
जहां नेटवर्क नहीं, वहीं पर ज्यादा खतरा : निजामुद्दीन से गाजियाबाद के यूपी गेट के बीच 16 और यूपी गेट से डासना के बीच 40 सोलर-संचालित एसओएस बॉक्स लगे हैं। इनका काम बटन दबाते ही एनएचएआई की क्विक रिस्पॉन्स टीम से संपर्क कराना है। मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने की स्थिति में ये बॉक्स यात्रियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकते थे। हालांकि उचित रखरखाव के अभाव में 50 प्रतिशत सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं।
-- -- -- -- -- -
एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद बहुत कम कॉल आए : एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार 2021 में डीएमई चालू होने के बाद से इन बॉक्सों से बेहद कम कॉल आए हैं और जो आए भी, उनमें से ज्यादातर बच्चों की प्रैंक (शरारती) कॉल थी। यूपी गेट से डासना के कुछ 8 कॉल आई। इसमें 5 बार प्रैंक कॉल थी। डासना से मेरठ के बीच वाले हिस्से में 5 बार कॉल आई। इसमें तीन बार प्रैंक कॉल थी।
एसओएस बॉक्स का उपयोग ऐसे करें
बटन दबाएंः बॉक्स पर दिए गए कॉल बटन को दबाएं
जीपीएस लोकेशनः इसमें जीपीएस लगा होता है, जिससे कंट्रोल रूम को आपकी सटीक जगह का पता चल जाता है।
मदद पाएंः इससे तुरंत एंबुलेंस, पेट्रोलिंग गाड़ी या क्रेन (टोइंग सर्विस) की मदद भेजी जाती है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
बोले अधिकारी :::
- समय-समय पर एसओएस बॉक्सों की जांच की जाती है। जिन भी स्थानों पर एसओएस बॉक्स खराब हैं, उनकी जांच कराकर उसको जल्द हीं दुरुस्त करा दिया जाएगा।
अरविंद कुमार, प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर, एनएचएआई
विज्ञापन
यहां-यहां खराब है एसओएस बॉक्स :
एनएच-9 पर लालकुआं कट के पास लगा एसओएस बॉक्स बक्से में बंद है। इससे फोन लगाने पर भी यह कार्य नहीं करता है। इसी प्रकार से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रोजाना हादसे होते रहते हैं। इससे लोगों की मदद के लिए सोलर से चलने वाले एसओएस बॉक्स लगाए गए हैं। जिसमें लैंड क्रॉफ्ट सोसायटी और बम्हेटा के सामने लगा एसओएस बॉक्स बाहर से ही पूरी तरह जर्जर नजर आ रहा है।
विज्ञापन
बटन दबाते रहो, नहीं मिलता जवाब : हाईवे से गुजर रहे वाहन चालक आलोक रंजन ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए ये बॉक्स बेकार साबित हो रहे हैं। आपात स्थिति में जब कोई चालक इनका लाल बटन दबाता है, तो न तो कोई घंटी बजती है और न ही कंट्रोल रूम से कोई आवाज आती है। कई किलोमीटर के दायरे में लगे इन कॉल बॉक्सों के तार टूटे हुए हैं, सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हैं।
विज्ञापन
रात में सुनसान हिस्सों में बढ़ जाता है खतरा : दिन के वक्त तो वाहन चालक आसपास के पेट्रोल पंप, ढाबों या अन्य राहगीरों से मदद ले लेते हैं, लेकिन असली परीक्षा देर रात होती है। रात के अंधेरे में सुनसान जगहों पर गाड़ी पंक्चर या खराब होने पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर मिलने की स्थिति में ये बूथ ही आखिरी सहारा होते हैं। इनके काम न करने से विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे परिवारों को भारी असुरक्षा के बीच घंटों फंसे रहना पड़ता है।
जहां नेटवर्क नहीं, वहीं पर ज्यादा खतरा : निजामुद्दीन से गाजियाबाद के यूपी गेट के बीच 16 और यूपी गेट से डासना के बीच 40 सोलर-संचालित एसओएस बॉक्स लगे हैं। इनका काम बटन दबाते ही एनएचएआई की क्विक रिस्पॉन्स टीम से संपर्क कराना है। मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने की स्थिति में ये बॉक्स यात्रियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकते थे। हालांकि उचित रखरखाव के अभाव में 50 प्रतिशत सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं।
एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद बहुत कम कॉल आए : एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार 2021 में डीएमई चालू होने के बाद से इन बॉक्सों से बेहद कम कॉल आए हैं और जो आए भी, उनमें से ज्यादातर बच्चों की प्रैंक (शरारती) कॉल थी। यूपी गेट से डासना के कुछ 8 कॉल आई। इसमें 5 बार प्रैंक कॉल थी। डासना से मेरठ के बीच वाले हिस्से में 5 बार कॉल आई। इसमें तीन बार प्रैंक कॉल थी।
एसओएस बॉक्स का उपयोग ऐसे करें
बटन दबाएंः बॉक्स पर दिए गए कॉल बटन को दबाएं
जीपीएस लोकेशनः इसमें जीपीएस लगा होता है, जिससे कंट्रोल रूम को आपकी सटीक जगह का पता चल जाता है।
मदद पाएंः इससे तुरंत एंबुलेंस, पेट्रोलिंग गाड़ी या क्रेन (टोइंग सर्विस) की मदद भेजी जाती है।
बोले अधिकारी :::
- समय-समय पर एसओएस बॉक्सों की जांच की जाती है। जिन भी स्थानों पर एसओएस बॉक्स खराब हैं, उनकी जांच कराकर उसको जल्द हीं दुरुस्त करा दिया जाएगा।
अरविंद कुमार, प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर, एनएचएआई