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Ghaziabad News: दहेज की मांग बनी विवाहिता की मौत की वजह, पति को आजीवन कारावास
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गाजियाबाद। दहेज की मांग और घरेलू प्रताड़ना के बीच हुई विवाहिता की मौत के करीब 12 साल पुराने मामले में एससी/एसटी की विशेष अदालत ने पति गुलशन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने दोषी पर 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने देवर मोनू और ननद आसमा को दोषमुक्त कर दिया। सास जरीना और ससुर सगीर की मामले के विचारण के दौरान मौत हो चुकी है।
अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, मोहम्मद शमशाद ने शिकायत में बताया था कि उनकी बहन नसरीन की शादी 15 मई 2011 को मसूरी थाना क्षेत्र निवासी गुलशन से हुई थी। आरोप था कि शादी के कुछ दिन बाद ही पति गुलशन, ससुर सगीर, सास जरीना, ननद आसमा और देवर मोनू दहेज के लिए नसरीन को प्रताड़ित करने लगे। उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाती थी।
शिकायत के मुताबिक, ससुराल पक्ष एक लाख रुपये नकद और मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था। शमशाद ने किसी तरह गुलशन को 50 हजार रुपये दिए। इसके बाद भी प्रताड़ना बंद नहीं हुई। आरोप है कि 25 मार्च 2012 की रात नसरीन को जला दिया गया। गंभीर हालत में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद 26 मार्च 2012 को गुलशन और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
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मृत्युकालिक बयान बना अहम आधार
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि नसरीन को शादी के बाद से दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। उसका मृत्युकालिक बयान विधिक प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया था और चिकित्सक ने उसे बयान देने के लिए सक्षम बताया था। अभियोजन ने गवाहों के बयानों को भी अपने पक्ष में साक्ष्य के रूप में पेश किया।
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बचाव पक्ष ने मानसिक रोग से पीड़ित होने का किया दावा
बचाव पक्ष ने नसरीन के मानसिक रोग से पीड़ित होने का दावा किया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मायके वालों ने यह बात छिपाकर उसकी शादी कराई थी। यह भी कहा गया कि गुलशन ही नसरीन को अस्पताल लेकर गया था, जो उसे बचाने की कोशिश को दर्शाता है। बचाव पक्ष ने मृत्युकालिक बयान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गुलशन की कम उम्र, अच्छे आचरण और परिवार में अकेला कमाने वाला सदस्य होने का हवाला देते हुए राहत की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने गुलशन को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, मोहम्मद शमशाद ने शिकायत में बताया था कि उनकी बहन नसरीन की शादी 15 मई 2011 को मसूरी थाना क्षेत्र निवासी गुलशन से हुई थी। आरोप था कि शादी के कुछ दिन बाद ही पति गुलशन, ससुर सगीर, सास जरीना, ननद आसमा और देवर मोनू दहेज के लिए नसरीन को प्रताड़ित करने लगे। उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाती थी।
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शिकायत के मुताबिक, ससुराल पक्ष एक लाख रुपये नकद और मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था। शमशाद ने किसी तरह गुलशन को 50 हजार रुपये दिए। इसके बाद भी प्रताड़ना बंद नहीं हुई। आरोप है कि 25 मार्च 2012 की रात नसरीन को जला दिया गया। गंभीर हालत में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद 26 मार्च 2012 को गुलशन और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
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मृत्युकालिक बयान बना अहम आधार
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि नसरीन को शादी के बाद से दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। उसका मृत्युकालिक बयान विधिक प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया था और चिकित्सक ने उसे बयान देने के लिए सक्षम बताया था। अभियोजन ने गवाहों के बयानों को भी अपने पक्ष में साक्ष्य के रूप में पेश किया।
बचाव पक्ष ने मानसिक रोग से पीड़ित होने का किया दावा
बचाव पक्ष ने नसरीन के मानसिक रोग से पीड़ित होने का दावा किया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मायके वालों ने यह बात छिपाकर उसकी शादी कराई थी। यह भी कहा गया कि गुलशन ही नसरीन को अस्पताल लेकर गया था, जो उसे बचाने की कोशिश को दर्शाता है। बचाव पक्ष ने मृत्युकालिक बयान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गुलशन की कम उम्र, अच्छे आचरण और परिवार में अकेला कमाने वाला सदस्य होने का हवाला देते हुए राहत की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने गुलशन को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।