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डायरिया ने किया बेहाल...अस्पताल के एक बेड पर दो नौनिहाल

Thu, 20 Apr 2017 12:59 AM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Thu, 20 Apr 2017 12:59 AM IST
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Diarrhea has done unhealthy ... two nineteen on a hospital bed
एक बेड पर दो नौनिहाल - फोटो : अमर उजाला

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 गर्मी के बदलते तेवर से मासूमों की सेहत बिगड़ने लगी है। अस्पतालों में डायरिया सहित सर्दी-जुकाम और फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सामान्य दिनों में एमएमजी और संयुक्त चिकित्सालय में  प्रतिदिन होने वाली ओपीडी में मरीजों की संख्या जहां 1500-2000 होती थी, वह अब तीन हजार तक पहुंच गई है।

मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है।एमएमजी में एक बेड पर दो मरीजएमएमजी अस्पताल के हालात अपने आप में गर्मी के प्रकोप की कहानी को बयां कर रहे हैं। मरीजों की संख्या में इस कदर इजाफा हुआ है कि यहां बेड कम पड़ गए हैं। अब हालत यह है कि एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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सबसे ज्यादा बच्चे डायरिया यानी उल्टी, दस्त व बुखार से पीड़ित हैं। इनमें से अधिकांश की उम्र छह माह से पांच साल के बीच है।टेंशन में मरीज, अस्पताल में नहीं दवा
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एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में अभी तक दवाओं की कमी बनी हुई है।

अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्रीटमेंट से जुड़ी बेसिक दवा पैरासिटामोल तक नहीं है तो कहीं पर फ्लूड की कमी है। बच्चों को दिया जाने वाला सीरप भी खत्म है।गर्मी में जरा सेहत का रखे ख्याल

संयुक्त जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरसी गुप्ता कहते है कि गर्मी में सन बर्न, डी-हाईड्रेशन, फ्लू, आई फ्लू, डायरिया, चिकनपाक्स, स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए लू एवं गर्मी का असर उनकी सेहत पर सबसे पहले पड़ता है।

कोशिश करें कि बच्चों को धूप से बचाएं और उन्हें ज्यादा लिक्विड खाद्य पदार्थ  दें।

बोले सीएमएस:
गर्मी के बाद मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। डायरिया पीड़ित बच्चे अधिक आ रहे हैं। अस्पताल में बेड की कमी पड़ गई है, लेकिन मरीजों को वापस नहीं किया जा सकता है इसलिए एक बेड पर दो मरीजों को रखना पड़ रहा है। - डॉ. जेके त्यागी, एमएमजी सीएमएस


कैसे करें बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी तिवारी ने बताया कि बाहर निकलते समय बच्चों के शरीर को कपड़े से ढक कर रखेें।
- सिर पर मोटा कपड़ा या तौलिया रखें।

- तेज धूप से आने के बाद तत्काल पानी न पिलाएं।
- बच्चे को केला, खरबूजा, तरबूज, खिचड़ी, नींबू पानी और मौसमी फल देते रहें।

-न् इसके अलावा बच्चों को पहले से कटे फल या बासी खाना खिलाने से बचें।

सभी जिलों के सीएमओ और प्रमुख अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि गर्मी के मौसम में बीमारियों से निपटने के लिए मरीजों के इलाज और दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करा लें। कहीं से शिकायत आती है तो संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी - डॉ. मंजू वैश्य शर्मा, एडिशनल डायरेक्टर मेरठ मंडल

 

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