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जान पर खेलकर महिला ने बचाई बेटे की जान
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:50 AM IST
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अपराध्ा
- फोटो : अमर उजाला
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ट्रेन में चढ़ने के दौरान शनिवार सुबह आठ बजे आरपीएफ सब इंस्पेक्टर रवि कुमार की पत्नी मीनू (30) का पैर फिसल गया, तभी ट्रेन चलने लगी। मीनू ने सूझबूझ दिखाते हुए गोद में लिए अपने साढ़े तीन साल के बेटे को ट्रेन के गेट पर खडे़ यात्री को थमा दिया। इससे उनके बच्चे की जान बच गई।
प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों ने मीनू को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं संभल पाई और ट्रैक व प्लेटफार्म के बीच गिर गई। दो कोच उसके ऊपर से गुजर गए। यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रुकवाई और घायल मीनू को बाहर निकाला।
रवि कुमार ने बताया कि वह मेरठ के गंगनहर थानाक्षेत्र स्थित राजपुर गांव के रहने वाले हैं। खुर्जा में तैनात हैं और इन दिनों दिल्ली में रेलवे बोर्ड कार्यालय पर स्पेशल ड्यूटी पर हैं। वह चार दिन पहले पत्नी और बेटे के साथ छुट्टियां मनाने शिमला गए थे।
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शनिवार को हावड़ा-कालका ट्रेन से वापस लौटे। गाजियाबाद में ट्रेन से उतरकर मेरठ जाने के लिए बांद्रा देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने लगे। पत्नी गोद में बेटे को लेकर ट्रेन में चढ़ रही थीं, उनसे थोड़ी दूरी पर वह बैग लेकर आ रहे थे।
ट्रेन में चढ़ते वक्त अचानक ट्रेन चलने से पत्नी का पैर फिसल गया। रवि ने बताया कि पत्नी की समझदारी और उनके लिए फरिश्ता बनकर आए दूसरे यात्री की वजह से उनके बेटे की जान बची। बेटे की जान बचाने के लिए मीनू ने अपनी जान की परवान नहीं की।
अगर वह बेटे को यात्री को न थमातीं तो बेटे की जान खतरे में पड़ जाती। उन्होंने बताया कि मीनू के कूल्हे में फैक्चर हो गया है, यशोदा अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया है।
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प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों ने मीनू को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं संभल पाई और ट्रैक व प्लेटफार्म के बीच गिर गई। दो कोच उसके ऊपर से गुजर गए। यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रुकवाई और घायल मीनू को बाहर निकाला।
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रवि कुमार ने बताया कि वह मेरठ के गंगनहर थानाक्षेत्र स्थित राजपुर गांव के रहने वाले हैं। खुर्जा में तैनात हैं और इन दिनों दिल्ली में रेलवे बोर्ड कार्यालय पर स्पेशल ड्यूटी पर हैं। वह चार दिन पहले पत्नी और बेटे के साथ छुट्टियां मनाने शिमला गए थे।
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शनिवार को हावड़ा-कालका ट्रेन से वापस लौटे। गाजियाबाद में ट्रेन से उतरकर मेरठ जाने के लिए बांद्रा देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने लगे। पत्नी गोद में बेटे को लेकर ट्रेन में चढ़ रही थीं, उनसे थोड़ी दूरी पर वह बैग लेकर आ रहे थे।
ट्रेन में चढ़ते वक्त अचानक ट्रेन चलने से पत्नी का पैर फिसल गया। रवि ने बताया कि पत्नी की समझदारी और उनके लिए फरिश्ता बनकर आए दूसरे यात्री की वजह से उनके बेटे की जान बची। बेटे की जान बचाने के लिए मीनू ने अपनी जान की परवान नहीं की।
अगर वह बेटे को यात्री को न थमातीं तो बेटे की जान खतरे में पड़ जाती। उन्होंने बताया कि मीनू के कूल्हे में फैक्चर हो गया है, यशोदा अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया है।