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‘25 हजार दो...फर्जी आईडी पर पासपोर्ट लो’

Sat, 14 Jan 2017 11:09 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Sat, 14 Jan 2017 11:09 PM IST
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Take passport on fake ID '25 thousand two
पासपोर्ट - फोटो : demo pic

मास्टर माइंड इब्राहिम 25 से 35 हजार रुपये में बांग्लादेशियों के फर्जी आईडी पर पासपोर्ट बनवा देता था, वह अब तक 10 लोगों के पासपोर्ट बनवाने का दावा कर रहा है। बिना पासपोर्ट इंडिया में रह रहे बांग्लादेशियों का इंडियन पासपोर्ट बनाए जाने का अगर यह दावा सही है, तो यह न सिर्फ हैरतभरा है बल्कि सनसनीखेज भी है।

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अगर ऐसा है तो इसमें न सिर्फ पासपोर्ट कर्मचारियों की, बल्कि पुलिसकर्मियों की भी मिलीभगत रही होगी। हालांकि पकड़े गए आरोपियों के पास से कोई पासपोर्ट नहीं मिला है, लिहाजा अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनका पासपोर्ट बनाए जाने का दावा कितना सही है।
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सीओ एलआईयू अलका ने बताया कि इब्राहिम को रिमांड पर लेकर इस मामले की तह तक पहुंचा जाएगा। इसका एक साथी भागा हुआ है, उसकी भी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पहले आधार कार्ड बनवाकर बैंक अकाउंट खुलवाता था, इसके बाद पासपोर्ट बनवाता था। इस पूरे पैकैज केलिए 25 से 35 हजार रुपये लेता था।
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इसके अलावा व्यक्ति की हैसियत के हिसाब से पैसे कम ज्यादा भी कर लेता था। सूत्रों के मुताबिक, पता यह भी चला है कि पासपोर्ट के लिए अगर बर्थ सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती थी तो वह आरोपी पश्चिम बंगाल के कंगला जिले से बनवाते थे।

पकड़े गए दंपति नजरुल और वर्षा का कहना है कि उन्हें एक युवक ने बताया था कि  लोनी की अशोक नगर कालोनी में रहने वाला इब्राहिम और उसका एक साथी 25 हजार रुपये लेकर एक व्यक्ति का पासपोर्ट बनवाते हैं।  नजरुल ने इब्राहिम को दो पासपोर्ट बनवाने के लिए 50 हजार में सौदा किया था, हालांकि रुपये अभी नहीं दिए गए थे।

क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी सुब्रोतो हाजरा ने कहा कि मामला उनकेसंज्ञान में नही हैं, अगर पुलिस जांच में किसी पासपोर्ट कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है तो जांच में पुलिस का पूरा सहयोग किया जाएगा।

गाजियाबाद है बांग्लादेशियों की पनाहगाह
सूत्रों के मुताबिक, ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बांग्लादेशियों की आमद बदस्तूर जारी है। दिल्ली से सटी कुछ कालोनियां इनका प्रमुख ठिकाना हैं। किराए पर मकान लेेकर वह चोरी-चुपके गुजर-बसर कर रहे हैं। पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) इस मामले में सिर्फ कागजी गुडवर्क कर आला अफसराें को खुश करने में लगे हैं।


खुफिया विभाग के पास बांग्लादेशियों की संख्या का पुख्ता आंकड़ा भी नहीं है। इनके परिवार के लोग जहां छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। वहीं, महिलाएं घरों में झाडू-पोंछा के अलावा कबाड़ बीनने के काम करती हैं।

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