{"_id":"58f8efd44f1c1b0b52472d34","slug":"tac-checks-of-80-crore-jobs","type":"story","status":"publish","title_hn":"80 करोड़ के कार्यों की होगी टीएसी जांच","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
80 करोड़ के कार्यों की होगी टीएसी जांच
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:46 PM IST
विज्ञापन
टीएसी जांच
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अवस्थापना और 14वें वित्त आयोग के फंड से नगर निगम सीमा में हुए विकास कार्य जांच के घेरे में आ गए हैं। अवस्थापना निधि के 30 लाख रुपये के बजट से दो महीने पहले बनी गोशला अंडरपास की सड़क टूटने के बाद अब महापौर ने एक साल में हुए करीब 80 करोड़ के सभी कार्यों की टीएसी जांच की सिफारिश की है।
विज्ञापन
उन्होंने मंडलायुक्त को निर्माण कार्यों की सूची भेजकर टीएसी जांच कराने को कहा है। माना जा रहा है कि निष्पक्ष जांच हुई तो निगम के कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विज्ञापन
नगर निगम बोर्ड फंड के अलावा अवस्थापना और केंद्र सरकार से 14वें वित्त आयोग की मद में मिली ग्रांट से भी सड़क, नाले, नालियों और इंटरलाकिंग टाइल्स से मार्गों का निर्माण कराता है। अवस्थापना फंड और 14वें वित्त आयोग के फंड से ऐसे काम कराए जाते हैं, जिनका बजट 25-30 लाख से ऊपर होता है।
विज्ञापन
बीते वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने इन दोनों मदों में करीब 80 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। निगम सूत्रों की मानें तो कमीशन भी इन्हीं फंड से होने वाले कामों में ज्यादा बंटता है। इन मदों से ठेकेदारों को समय पर भुगतान मिल जाता है। ऐसे में वह कमीशन ज्यादा देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इसका असर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ता है। महापौर ने बृहस्पतिवार को निर्माण विभाग से एक साल में इन दोनों मदों में हुए कार्यों का डाटा लेकर जांच के लिए मंडलायुक्त को पत्र भेजा है।
जांच की लिस्ट से निगम के दो प्रोजेक्ट बाहर, उठे सवाल
अवस्थापना फंड के दो प्रोजेक्ट की जांच की सिफारिश नहीं की गई है। इनमें करीब 45 करोड़ का रमतेराम रोड कामर्शियल कांपलेक्स और तकरीबन 30 करोड़ की लागत वाला नेहरू नगर ऑडिटोरियम का प्रोजेक्ट शामिल है। निगम सूत्रों की मानें तो सबसे ज्यादा घपला इन्हीं दो प्रोजेक्ट में हुआ है।
निगम इंजीनियरों ने फर्जी बिल बनाकर ठेकेदार फर्म को ज्यादा रकम का भुगतान करा दिया है। महापौर ने इन दोनों प्रोजेक्ट को जांच के दायरे से बाहर रखा है। इससे निष्पक्ष जांच पर सवाल उठने लगे हैं।
---
वित्तीय वर्ष 2016-17 में अवस्थापना और 14वें वित्त आयोग के फंड से करीब 80 करोड़ के विकास कार्य हुए हैं। पूर्व में इन कार्यों की टीएसी जांच हुआ करती थी, लेकिन सपा शासनकाल में यह प्रक्रिया बंद कर दी गई थी। इसकी वजह से कार्यों की गुणवत्ता खराब हो रही थी।
अब मंडलायुक्त को पत्र लिखकर दोनों मदों में हुए सभी विकास कार्यों की जांच के लिए कहा गया है। - अशु वर्मा, महापौर