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जीडीए बिल्डिंग करेगा सील
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Mon, 16 May 2016 01:34 AM IST
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अपराध्ा
- फोटो : अमर उजाला
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राजनगर की जिस बिल्डिंग में शनिवार को इंडियामार्ट के पांच कर्मचारियों की जान चली गई थी, जीडीए उस बिल्डिंग को सील करेगा। दूसरी तरफ, रविवार को बिल्डिंग के आसपास की दुकानें बंद रहीं।
वहीं, घटना की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट बीडी सिंह को जांच सौंपी है। इस मामले में दूसरे दिन भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। कविनगर पुलिस ने घटना सिर्फ जीडी में दर्ज की है।
जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने ने बताया कि जीडीए ने इस बिल्डिंग का चालान करीब दो साल पहले अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग करने के आरोप में काटा था। अब जीडीए इस बिल्डिंग को सील करने की कार्रवाई करेगा।
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उन्होंने बताया कि शनिवार को हादसे के बाद इस बिल्डिंग का रिकार्ड निकलवाया गया तो पता चला कि आवासीय इलाके में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधि चलाने के आरोप में अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग एक्ट 1973 की धारा 26 व 27 के तहत बिल्डिंग का चालान काटा गया था।
उन्होंने बताया कि नियमानुसार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ सुनवाई की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले जीडीए ने अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधि चलाने के आरोप में अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग एक्ट के तहत आठ हजार भवनों का चालान काटा था।
इनमें से कई केस की सुनवाई सीजीएम के यहां भी चल रही है। वहीं, कविनगर एसएचओ अशोक सिसौदिया ने बताया कि तहरीर नहीं मिली है, जिस वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
हादसे-दर-हादसे...कार्रवाई सिफर
आग से हादसे-दर-दर होते हैं, मगर कार्रवाई नहीं होती। मेरठ रोड पर फैक्ट्री में लगी आग के बाद तीन लोगों की जान जानें का मामला हो या क्लार्क इन एप्पल ट्री होटल में निजी कंपनी के अधिकारी की मौत का मामला। पांच साल पहले लोनी में भी एसी में आग से पांच की जान गई थी। इन हादसों के बाद फायर ब्रिगेड ने कमियां गिनाईं, कार्रवाई का दावा किया, मगर नतीजा सिफर ही रहा। इन मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।
गाजियाबाद में पिछले तीन साल में आग से हुए हादसों में 24 लोगों की जान गई है। अरबों रुपये का नुकसान हुआ है, मगर कार्रवाई जीरो है। इस संबंध में फायर ब्रिगेड जांच करने, रिपोर्ट तैयार करने का दावा करती है, मगर करती कुछ नहीं। कोई आरोपी नहीं बनता, जिस कारण सभी साफ बच जाते हैं। एफएसओ आरके यादव का कहना है कि इस तरह के हादसों के बाद फायर ब्रिगेड यह रिपोर्ट देती है कि बिना पूरे फायर इंतजाम के फैक्ट्री, होटल या उस बिल्डिंग में कोई काम न हो।
नियम पूरे करने पर ही एनओसी दी जाती है। कार्रवाई का काम प्रशासन का है, फायर ब्रिगेड का नहीं। बता दें कि इंडियामार्ट के कर्मचारियों की तरह एक मई 2015 को आरडीसी के क्लार्क इन एप्पल ट्री होटल में एसी में ब्लास्ट के बाद धुआं फैल गया था, जिस कारण दम घुटने से सुशांत खरे (50) की मौत हो गई थी, वह ग्रीन प्लाई इंडस्ट्रीज की कोलकाता यूनिट के असिस्टेंट वाइज प्रेजीडेंट थे। फायर ब्रिगेड ने शुरुआती जांच में होटल प्रबंधन की लापरवाही बताई थी।
तीन सालों में हुए अग्निकांड और अनुमानित नुकसान
वर्ष घटनाएं क्षति (रुपये में) मौत
2013 831 27,35,09,250 मनुष्य-8, पशु-02
2014 769 40,68,00,800 मनुष्य-2, पशु-03
2015 888 45,64,42,200 मनुष्य-14, पशु-02
मृतकों के परिवारों में मातम
मृतकों के परिवारों में मातम है। रविवार को दो मृतकों का मोदीनगर और दो का गाजियाबाद में अंतिम संस्कार किया गया। एक के शव को परिजन लखनऊ ले गए। दूसरी तरफ, घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
बता दें कि राजनगर की दो फ्लोर की एक बिल्डिंग में लगे विंडो एसी में ब्लास्ट के बाद आग लग गई थी और धुआं फैल गया था। शनिवार सुबह हुए इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। चार की मौत धुएं में दम घुटने से हुई और एक की बिल्डिंग से कूदने के दौरान गिरकर। वहीं छह लोग बिल्डिंग से कूदने के दौरान घायल हो गए थे।
बिल्डिंग के पास की दुकानें रहीं बंद
रविवार को बिल्डिंग के पास की दुकानें बंद रहीं। बिल्डिंग को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
शरीर में भरा था धुआं
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि पांचों के शरीर में धुआं भरा हुआ था। ऑक्सीजन न मिलने और धुएं के जरिए कार्बन मोनो आक्साइड सांस के जरिए शरीर में जाने से दम घुट गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
इंडियामार्ट कंपनी उठा रहा खर्च
इंडियामार्ट प्रबंधन ने बताया कि घायलों का खर्च इंडियामार्ट कंपनी उठा रही है। इसके अलावा सभी मृतक कर्मचारियों का इंश्योरेंस था। उनके परिजनों से बातचीत की जा रही है। उनकी हरसंभव मदद की जाएगी।
मेंटनेंस में लापरवाही से होता एसी में धमाका
वैशाली। एयर कंडीशनर एक्सपर्ट की मानें तो अनाड़ी मैकेनिक की वजह से एसी में धमाका होता है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ती है और कंप्रेशर में धमाके के साथ ही आग लग जाती है। धमाका इतना भीषण हो सकता है कि लोगों की जान तक जा सकती है।
एसी एक्सपर्ट फिरोज ने बताया कि एसी की मेंटनेंस के दौरान लीकेज चेक करने के लिए नाइट्रोजन गैस का प्रयोग किया जाता है। लीकेज का पता उसे ठीक कर नाइट्रोजन गैस को पूरी तरह से हटाना होता है।
कई बार लापरवाही से मैकेनिक नाइट्रोजन गैस पूरी तरह से साफ नहीं करता है। ऐसे में, एसी स्टार्ट करने पर धमाका हो जाता है। साथ ही वोल्टेज फ्लक्चुएशन से भी धमाका हो सकता है।
जरूरी है कि जानकार से ही एसी की मेंटनेंस कराएं और एक ही मैकेनिक को मेंटनेंस के लिए रखे। अलग-अलग मैकेनिक के जरिए मेंटनेंस होने पर एसी में खराबी आ जाती है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अंकुर अग्निहोत्री ने बताया कि वोल्टेज फ्लक्चुएशन का असर भी पड़ सकता है।
अचानक तेज वोल्टेज होने पर एसी बंद कर देना चाहिए। साथ ही एसी की मेंटनेंस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिससे उसमें धमाके की स्थिति नहीं बने। जो बड़ा खतरा है।
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वहीं, घटना की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट बीडी सिंह को जांच सौंपी है। इस मामले में दूसरे दिन भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। कविनगर पुलिस ने घटना सिर्फ जीडी में दर्ज की है।
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जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने ने बताया कि जीडीए ने इस बिल्डिंग का चालान करीब दो साल पहले अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग करने के आरोप में काटा था। अब जीडीए इस बिल्डिंग को सील करने की कार्रवाई करेगा।
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उन्होंने बताया कि शनिवार को हादसे के बाद इस बिल्डिंग का रिकार्ड निकलवाया गया तो पता चला कि आवासीय इलाके में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधि चलाने के आरोप में अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग एक्ट 1973 की धारा 26 व 27 के तहत बिल्डिंग का चालान काटा गया था।
उन्होंने बताया कि नियमानुसार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ सुनवाई की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले जीडीए ने अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधि चलाने के आरोप में अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग एक्ट के तहत आठ हजार भवनों का चालान काटा था।
इनमें से कई केस की सुनवाई सीजीएम के यहां भी चल रही है। वहीं, कविनगर एसएचओ अशोक सिसौदिया ने बताया कि तहरीर नहीं मिली है, जिस वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
हादसे-दर-हादसे...कार्रवाई सिफर
आग से हादसे-दर-दर होते हैं, मगर कार्रवाई नहीं होती। मेरठ रोड पर फैक्ट्री में लगी आग के बाद तीन लोगों की जान जानें का मामला हो या क्लार्क इन एप्पल ट्री होटल में निजी कंपनी के अधिकारी की मौत का मामला। पांच साल पहले लोनी में भी एसी में आग से पांच की जान गई थी। इन हादसों के बाद फायर ब्रिगेड ने कमियां गिनाईं, कार्रवाई का दावा किया, मगर नतीजा सिफर ही रहा। इन मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।
गाजियाबाद में पिछले तीन साल में आग से हुए हादसों में 24 लोगों की जान गई है। अरबों रुपये का नुकसान हुआ है, मगर कार्रवाई जीरो है। इस संबंध में फायर ब्रिगेड जांच करने, रिपोर्ट तैयार करने का दावा करती है, मगर करती कुछ नहीं। कोई आरोपी नहीं बनता, जिस कारण सभी साफ बच जाते हैं। एफएसओ आरके यादव का कहना है कि इस तरह के हादसों के बाद फायर ब्रिगेड यह रिपोर्ट देती है कि बिना पूरे फायर इंतजाम के फैक्ट्री, होटल या उस बिल्डिंग में कोई काम न हो।
नियम पूरे करने पर ही एनओसी दी जाती है। कार्रवाई का काम प्रशासन का है, फायर ब्रिगेड का नहीं। बता दें कि इंडियामार्ट के कर्मचारियों की तरह एक मई 2015 को आरडीसी के क्लार्क इन एप्पल ट्री होटल में एसी में ब्लास्ट के बाद धुआं फैल गया था, जिस कारण दम घुटने से सुशांत खरे (50) की मौत हो गई थी, वह ग्रीन प्लाई इंडस्ट्रीज की कोलकाता यूनिट के असिस्टेंट वाइज प्रेजीडेंट थे। फायर ब्रिगेड ने शुरुआती जांच में होटल प्रबंधन की लापरवाही बताई थी।
तीन सालों में हुए अग्निकांड और अनुमानित नुकसान
वर्ष घटनाएं क्षति (रुपये में) मौत
2013 831 27,35,09,250 मनुष्य-8, पशु-02
2014 769 40,68,00,800 मनुष्य-2, पशु-03
2015 888 45,64,42,200 मनुष्य-14, पशु-02
मृतकों के परिवारों में मातम
मृतकों के परिवारों में मातम है। रविवार को दो मृतकों का मोदीनगर और दो का गाजियाबाद में अंतिम संस्कार किया गया। एक के शव को परिजन लखनऊ ले गए। दूसरी तरफ, घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
बता दें कि राजनगर की दो फ्लोर की एक बिल्डिंग में लगे विंडो एसी में ब्लास्ट के बाद आग लग गई थी और धुआं फैल गया था। शनिवार सुबह हुए इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। चार की मौत धुएं में दम घुटने से हुई और एक की बिल्डिंग से कूदने के दौरान गिरकर। वहीं छह लोग बिल्डिंग से कूदने के दौरान घायल हो गए थे।
बिल्डिंग के पास की दुकानें रहीं बंद
रविवार को बिल्डिंग के पास की दुकानें बंद रहीं। बिल्डिंग को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
शरीर में भरा था धुआं
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि पांचों के शरीर में धुआं भरा हुआ था। ऑक्सीजन न मिलने और धुएं के जरिए कार्बन मोनो आक्साइड सांस के जरिए शरीर में जाने से दम घुट गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
इंडियामार्ट कंपनी उठा रहा खर्च
इंडियामार्ट प्रबंधन ने बताया कि घायलों का खर्च इंडियामार्ट कंपनी उठा रही है। इसके अलावा सभी मृतक कर्मचारियों का इंश्योरेंस था। उनके परिजनों से बातचीत की जा रही है। उनकी हरसंभव मदद की जाएगी।
मेंटनेंस में लापरवाही से होता एसी में धमाका
वैशाली। एयर कंडीशनर एक्सपर्ट की मानें तो अनाड़ी मैकेनिक की वजह से एसी में धमाका होता है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ती है और कंप्रेशर में धमाके के साथ ही आग लग जाती है। धमाका इतना भीषण हो सकता है कि लोगों की जान तक जा सकती है।
एसी एक्सपर्ट फिरोज ने बताया कि एसी की मेंटनेंस के दौरान लीकेज चेक करने के लिए नाइट्रोजन गैस का प्रयोग किया जाता है। लीकेज का पता उसे ठीक कर नाइट्रोजन गैस को पूरी तरह से हटाना होता है।
कई बार लापरवाही से मैकेनिक नाइट्रोजन गैस पूरी तरह से साफ नहीं करता है। ऐसे में, एसी स्टार्ट करने पर धमाका हो जाता है। साथ ही वोल्टेज फ्लक्चुएशन से भी धमाका हो सकता है।
जरूरी है कि जानकार से ही एसी की मेंटनेंस कराएं और एक ही मैकेनिक को मेंटनेंस के लिए रखे। अलग-अलग मैकेनिक के जरिए मेंटनेंस होने पर एसी में खराबी आ जाती है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अंकुर अग्निहोत्री ने बताया कि वोल्टेज फ्लक्चुएशन का असर भी पड़ सकता है।
अचानक तेज वोल्टेज होने पर एसी बंद कर देना चाहिए। साथ ही एसी की मेंटनेंस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिससे उसमें धमाके की स्थिति नहीं बने। जो बड़ा खतरा है।