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नोटिस का जवाब आया तो जीडीए चकराया

Sat, 14 Jan 2017 10:43 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Sat, 14 Jan 2017 10:43 PM IST
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GDA has replied to the notice so confused
जीडीए - फोटो : अमर उजाला

 एनजीटी की सख्ती पर जीडीए ने लोगों को ग्रीन बेल्ट से निर्माण हटाने के आदेश जारी किए तो नया विवाद खड़ा हो गया। अब लोगों ने जीडीए के मास्टर प्लान-2021 पर ही सवाल उठा दिए हैं।

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नोटिस पाने वाले लोगों का आरोप है कि 2001 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीन ग्रीन बेल्ट नहीं थी और मकान इससे भी पहले वर्ष 1985 से 1995 के बीच बन चुके थे। बावजूद इसके जीडीए के मास्टर प्लान 2021 में आबादी वाली जमीन को ग्रीन बेल्ट दर्शा दिया गया।
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इस आधार पर अब लोग जीडीए की कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में जीडीए को यह मामला उल्टा पड़ सकता है।महरौली, बम्हेटा, दुहाई, मुरादनगर, साहिबाबाद क्षेत्र समेत जीडीए ने विभिन्न जोनों में कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
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नोटिस में उनके मकानों को ग्रीन बेल्ट में बना हुआ बताया गया है और निर्माण को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए थे। जीडीए की इस कार्रवाई से लोगों में आक्रोश है। करीब 500 से ज्यादा लोग जीडीए को अपना जवाब दे चुके हैं।

बम्हेटा और महरौली क्षेत्र के लोग इस मामले में महापौर अशु वर्मा से मिलकर मामले में हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। हालांकि जीडीए अधिकारी एनजीटी के आदेश बताते हुए अपने निर्णय पर कायम है और खुद निर्माण न हटाए जाने पर ध्वस्तीकरण की तैयारी कर रहे हैं।

उधर, नोटिस पाने वाले लोग भी जीडीए के खिलाफ लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लोगों ने जो जवाब दाखिल किए हैं, उनमें कहा गया है कि जीडीए अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन के मास्टर प्लान-2021 बना दिया है।

भौतिक सत्यापन करते तो आबादी वाले क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट में न दर्शाया जाता। बम्हेटा और महरौली के लोगों का कहना है कि वह जीडीए के मास्टर प्लान के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। इससे पहले जीडीए ने कार्रवाई की तो वह विरोध करेंगे।

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अधिकारी बोले
जीडीए अधिकारियों का कहना है कि नोटिस के जवाब में संबंधित लोगों ने मास्टर प्लान-2001 में ग्रीन बेल्ट न दर्शाए जाने की बात तो कही है, लेकिन इसके साथ-साथ वह संबंधित जमीन के स्वामित्व का प्रमाण भी नहीं दे पाए हैं। निर्माण से संबंधित स्वीकृत मानचित्र भी नहीं दिखा पाए हैं। ऐसे में उनके जवाबों में कोई तथ्य नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एनजीटी में 19 जनवरी को सुनवाई होनी है। इससे पहले जीडीए की ओर से एनजीटी में जवाब दाखिल किया जाना है। ऐसे में जिन मकानों को अभी तक नहीं हटाया गया है, उनके ध्वस्तीकरण के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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