{"_id":"5929b43a4f1c1b7e4e5371d9","slug":"game-in-madhuban-bapudham-scheme","type":"story","status":"publish","title_hn":"मधुबन-बापूधाम योजना में हुआ खेल ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मधुबन-बापूधाम योजना में हुआ खेल
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 27 May 2017 10:45 PM IST
विज्ञापन
जीडीए
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वीकृत दर से ज्यादा के भुगतान के मामले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कई योजनाएं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रडार पर आ गईं हैं। जीडीए का ऑडिट कर रही कैग टीम ने मधुबन-बापूधाम योजना से जुड़े फ्लैट के निर्माण में कार्यदायी संस्था को लिमिट से अधिक के भुगतान का मामला पकड़ा है।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि इस गड़बड़ी के बाद कैग की नजर जीडीए की दूसरी योजनाओं पर भी है, जिनकी जांच की जा रही है। अब तक कैग टीम 57 प्रोजेक्ट की फाइलों का ऑडिट कर रही है, जिनमें मधुबन-बापूधाम योजना में भुगतान से जुड़ी बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है।
विज्ञापन
प्रदेश की भाजपा सरकार ने बीते वर्षों में घोटाले का केंद्र रहे जीडीए का कैग से ऑडिट कराने का फैसला लिया था, जिसके बाद से कैग की टीम ऑडिट कर रही है। अब तक की जांच में कई बड़ी वित्तीय अनियमितताएं पकड़ में आईं हैं।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि बीते दिनों कैग टीम ने 57 प्रोजेक्ट की जांच शुरू की, जिनमें मधुबन-बापूधाम योजना में बहुमंजिला 198 फ्लैट के निर्माण में स्वीकृत दर से ज्यादा का भुगतान फ्लैट बनाने वाली कंपनी को किया गया।
बताया जा रहा है कि इन फ्लैट का निर्माण धर्मराज कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म द्वारा किया जा रहा था, जिसे टेंडर रेट से ज्यादा का भुगतान किया गया। बाजार में कंस्ट्रक्शन से जुड़ी सामग्री का रेट बढ़ने का हवाला देकर भुगतान कर दिया गया जबकि रिवाइज्ड रेट देने से पहले किसी तरह की तकनीकी राय भी नहीं ली गई।
उधर, बताया जा रहा है कि मधुबन-बापूधाम योजना के साथ ही अब जीडीए के अन्य प्रोजेक्ट भी कैग की राडर पर हैं। इसके लिए इंजीनियरिंग सेक्शन से अन्य प्रोजेक्ट की फाइलें भी मांगी जा रही हैं, हालांकि सेक्शन टीम को फाइलें मुहैया कराने में देरी कर रहा है।
इस बीच ज्यादा भुगतान किए जाने से साफ हो चुका है कि जीडीए की तमाम योजनाओं में अफसरों व ठेकेदारों की सेटिंग से जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाकर खेल हुआ।
जीडीए में हुई बिल्डर व एओए की मध्यस्थता बैठक
राजनगर एक्सटेंशन के गुलमोहर गार्डन में बिल्डर और अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को लेकर शनिवार को जीडीए में मध्यस्थता बैठक आयोजित की गई। एसोसिएशन के पदाधिकारी गजेंद्र आर्य ने कहा कि बिल्डर अपार्टमेंट में बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं करा रहा है।
पूरे टावर में एक ही गेट दिया गया है जबकि फ्लैट बुक कराते वक्त दो गेट बताए गए थे। वहीं, बिल्डर विजय जिंदल ने कहा कि फ्लैट बुक करते समय जो वादे किए थे वो सभी पूरे किए गए हैं। आवंटियों ने जो भी शिकायतें रखीं उन्हें दूर करने का प्रयास किया गया।
जीडीए सचिव की अध्यक्षता आयोजित बैठक में एसोसिएशन ने कहा कि गुलमोहर गार्डन में 600 से ज्यादा परिवार रहते हैं, जिनकी शिकायतों को नहीं सुना जा रहा है। इसी बीच सचिव ने बिल्डर से समाधान निकालने के लिए कहा। काफी देर तक चली बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।