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लपटें, धुएं का गुबार और चीत्कार

Sat, 12 Nov 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /ट्रांस हिंडन
ब्यूरो, अमर उजाला /ट्रांस हिंडन Updated Sat, 12 Nov 2016 01:17 AM IST
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Flames, plumes of smoke and scream
अपराध - फोटो : अमर उजाला
जयपाल चौक पर जैकेट फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में आग की लपटें, धुएं का गुबार और लोगों की चीख पुकार से आसपास के लोगों के भी होश फाख्ता हो गए। आग में फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन धुएं केचलते बाहर खडे़ लोगों को कुछ नजर नहीं आ रहा था।
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कुछ लोग सिर पर हेलमेट पहन कर किसी तरह फैक्ट्री के अंदर तक पहुंचे, जहां से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाशें निकालकर ला रहे थे। यह खौफनाक मंजर देख कर लोगों के रौंगटे खड़े हो गए।
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फैक्ट्री में आग लगने से उठे भीषण धुएं से आसपास के करीब मकानों में रह रहे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। कई परिवार के लोग महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को धुएं की जद से दूर मित्रों और रिश्तेदारों के मकानों में लेकर पहुंचे।
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गनीमत रही कि समय रहते आसपास के लोगा धुएं की जद से दूर हो गए, वरना उनकी तबीयत भी बिगड़ सकती थी। आग इस कदर भयावह थी कि फैक्ट्री से सटे मकानों में रह रहे परिवार सड़क पर निकल आए और कर्मचारियों को बचाने के लिए आग बुझाने लगे।

आग पर काबू पाने के लिए पानी डाला, मिट्टी डाली और यहां तक कि नालियों कागंदा पानी डाल कर आग बुझाने की कोशिश जारी रखी, लेकिन फिर भी 13 कर्मचारी मौत के आगोश में समा गए।

इनके हौसले को सलाम! दांव पर लगा दी अपनी जान:
जैकेट फैक्ट्री में हुए अग्निकांड के बीच दो युवकों ने बहादुरी की मिसाल कायम की। आग में फंसे कर्मचारियों की चींख पुकार को सुनकर वह अपनी जान की परवाह किए बगैर फैक्ट्री में जा घुसे। नौशाद और अरकम नामक इन युवकों ने बताया कि अग्निकांड में फंसे कर्मचारियों की चीत्कार सुनाई दे रही थी।

लोगों की भीड़ मौके पर जमा थी, मगर आग इस कदर भयानक थी कि बचाव कार्य केलिए कोई आगे नहीं बढ़ रहा था। वह खुद भी पत्थर बने खडे़ थे, मगर लोगों की चीख-पुकार सुनकर खुद को नहीं रोक सके और आग में कूद पडे़। शटर तोड़कर अंदर घुसे, मगर तब तक कर्मचारी दम तोड़ चुके थे।

कुछ ही देर में आग की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। सात पीसीआर मौके पर आईं। तब तक नौशाद और अकरम दो लाशों को निकाल चुके थे। पुलिस कर्मियों की मदद से फैक्ट्री की पहली मंजिल से एक जली हुई लाश और निकाली गई, जिसके बाद दूसरी मंजिल से 10 कर्मचारियों की लाशें निकाली गईं।

इसी दौरान पहली मंजिल पर मौजूद कर्मचारी किसी तरह छज्जे पर आ गए। लोगों ने तीनों कर्मचारियों को नीचे कूदने के लिए हौसला बंधाया, जिस पर उनकी जान बची।

शवों के लिए प्रशासन ने मुहैया कराई एंबुलेंस
डीएम ने बताया कि सभी शवों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है। इसके साथ ही शवों को उनके मूल स्थानों तक ले जाने के लिए एंबुलेंस भी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है। मृतक बुलंदशहर, धौलाना-हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बरेली और मथुरा के रहने वाले थे।

मॉर्डन कंट्रोल रूम की खुली पोल 
शहीदनगर में हुई हृदयविदारक घटना में मॉडर्न कंट्रोल रूम की भी पोल खुल गई। घटना की सूचना एसएसपी को करीब ढाई घंटे बाद दी गई। एसएसपी ने एसपी सिटी को मामले की जांच सौंपी है। 

शहीद नगर में आग लगने की घटना तड़के करीब चार बजे हुई। लोगों ने करीब 4:45 बजे साहिबाबाद थाना पुलिस को दी। साहिबाबाद पुलिस ने कंट्रोल रूम में इसकी सूचना माडर्न कंट्रोल रूम में छह बजे दी और वहां से सुबह 6:28 पर एसएसपी के पीआरओ को सूचना दी गई।

एसएसपी को इसकी जानकारी 6:55 बजे पर मिली। इसके बाद एसएसपी मौके पर पहुंचे। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि सूचना देने में साहिबाबाद और मार्डन कंट्रोल रूम पर  तैनात पुलिसकर्मियों की लापरवाही रही है।

इसकी जांच कराई जा रही है कि कम्युनिकेशन होने में इतनी देरी कैसे हुई। साहिबाबाद पुलिस को तुरंत मौके पर पहुंचना चाहिए था और कंट्रोल रूम में इसकी जानकारी पांच बजे तक हो जानी चाहिए थी। बता दें कि यूपी पुलिस लगातार रिस्पांस टाइम कम करने में लगी है, लेकिन पुलिसकर्मी सूचना देने के बावजूद मौके पर देर से ही पहुंच रहे हैं। 

हौसले को सलाम! दांव पर लगा दी अपनी जान

 जैकेट फैक्ट्री में हुए अग्निकांड के बीच दो युवकों ने बहादुरी की मिसाल कायम की। कर्मचारियों को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर धधकती फैक्ट्री में जा घुसे लेकिन अफसोस किसी को जिंदा न निकाल सके। इनके पहुंचने से पहले ही मजदूर दम तोड़ चुके थे। 

तड़के 4:35 बजे सबमर्सिबल की मोटर में हुए शॉर्ट सर्किट से लगी आग की लपटें दो मंजिला फैक्ट्री से उठने पर शहीद नगर के जयपाल चौक पर कोहराम मच गया। अफरातफरी के बीच कर्मचारियों को जिंदा निकालने के लिए नौशाद चौधरी और अकरम आग से दहक रही फैक्ट्री में अपनी परवाह किए बगैर सबसे पहले घुस गए लेकिन वहां उन्हें सिर्फ लाशें ही मिलीं।

कुछ ही मिनट में आग की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। सात पीसीआर मौके पर आईं। तब तक नौशाद और अकरम दो लाशों को निकाल चुके थे। पुलिस कर्मियों की मदद से फैक्ट्री की पहली मंजिल से एक जली हुई लाश और निकाली गई, जिसके बाद दूसरी मंजिल से 10 कर्मचारियों की लाशें निकाली गईं।

इसी दौरान पहली मंजिल पर मौजूद चार कर्मचारी किसी तरह छज्जे पर आ गए। लोगों ने तीनों कर्मचारियों को नीचे कूदने के लिए हौसला बंधाया, जिस पर उनकी जान बची। 
फैक्ट्री से सटे मकानों में रह रहे परिवार सड़क पर उतर आए, कर्मचारियों को बचाने के लिए आग बुझाने लगे।

आग पर काबू पाने के लिए पानी डाला, मिट्टी डाली और यहां तक कि नालियों कागंदा पानी डाल कर आग बुझाने की कोशिश जारी रखी लेकिन उन्हें किसी भी कर्मचारी की जान नहीं बचा पाने का दुख है। 

धुएं का गुबार और लाशें ही लाशें धुएं से लोगों को सांस लेना हुआ मुश्किल 
 जयपाल चौक के माहौल ने लोगों का दिल दहला दिया। इतना ज्यादा धुआं था कि लोगों को कुछ दिख ही नहीं रहा था। लोग सिर पर हेलमेट पहन कर किसी तरह फैक्ट्री तक पहुंचे, जहां से लाशें निकाली जा रही थीं। ये मंजर देख कर लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। 

फैक्ट्री में आग लगने से उठे भीषण धुएं से आसपास के करीब मकानों में रह रहे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। कई परिवार के लोग महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को धुएं की जद से दूर मित्रों और रिश्तेदारों के मकानों में लेकर पहुंचे। गनीमत रही कि समय रहते आसपास के लोगों को धुएं से दूर किया, वरना उनकी तबीयत भी बिगड़ सकती थी। 

बहादुरों ने बयां किया मंजर
करीब साढ़े चार बजे जिम जा रहा था, इस दौरान अचानक शोर मचा। जैकेट फैक्ट्री के पास पहुंचने पर आग लगी दिखी और शटर बंद मिला, जिसे तोड़ कर और दो लाशें निकालीं। लाशों को पुलिस पीसीआर और ई-रिक्शा में जीटीबी अस्पताल भेजा, जिसके बाद एंबुलेंस आई। - नौशाद चौधरी। 

धुआं और आग की लपटें उठने पर शोर मच गया, जिस पर वहां पहुंचा। शटर टूटने के बाद पहली मंजिल पर लाशें मिलीं, दूसरी मंजिल पर मौजूद कर्मचारियों को निकालने के लिए छत तोड़ कर छेद किया लेकिन दम घुटने से उनकी मौत हो चुकी थी। - अकरम  
 
शवों के लिए प्रशासन ने मुहैया कराई एंबुलेंस
डीएम ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है। इसके साथ ही शवों को उनके मूल स्थानों तक ले जाने के लिए एंबुलेंस भी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है। मृतक बुलंदशहर, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बरेली और मथुरा के रहने वाले थे।


- टाइम लाइन
4:00 बजे    जैकेट फैक्ट्री में आग लगी
4:35 बजे    लोग मदद करने पहुंचे
4:36 बजे    दमकल और पुलिस को सूचना दी
4:45 बजे     पुलिस मौके पर पहुंची
5:01 बजे     फैक्ट्री से लाशों को निकालना शुरू किया 
6:15 बजे     फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची
7:00 बजे    एसएसपी और एसपी सिटी समेत पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे 
8:20 बजे    आग पर काबू पाया गया
9:30 बजे    आईजी और डीएम घटनास्थल पर पहुंचे
12:00 बजे    सांसद वीके सिंह मौके पर पहुंचे  

 ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाए गए घायल
 शहीद नगर में 13 जिंदगी अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ गईं हैं। दरअसल, जहां ये फैक्ट्रियां चल रही थीं, वहां सड़कें उखड़ी हैं, गलियां तंग हैं और घरों से सट कर बिजली के तार जा रहे हैं। आग बुझाने के कतई इंतजाम नहीं थे। फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल था।

मृतकों और घायलों को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल पीसीआर और ई-रिक्शा में ले जाया गया। जहां शवों को पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों के सुपुर्द दिया गया, जबकि घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

शहीद नगर में अवैध फैक्ट्रियों और उनसे हो रहे प्रदूषण के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने वाले एक्टीविस्ट राजीव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर 80 अवैध फैक्ट्रियों को सील किया गया था।

इस कार्रवाई से कुछ आस बंधी लेकिन पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से महज तीन महीने में इन फैक्ट्रियों की सील टूट गई और काम फिर से शुरू हो गया, जबकि हाईकोर्ट के रिकार्ड में 80 फैक्ट्रियां सील चल रहीं हैं।

यहां 100 और 50 गज के प्लॉट पर बने मकानों में अवैध तौर पर फैक्ट्री चलाई जा रहीं हैं, इनमें जींस रंगाई, निकल पॉलिस, प्लास्टिक दाना और अन्य फैक्ट्रियां हैं। इनमें से किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है।

रिहाइशी इलाके में फैक्ट्री खोली ही नहीं जा सकती हैं। हर फैक्ट्री में 20 से 30 कर्मचारी होते हैं और काम खत्म होने के बाद यहीं रहते भी हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस, प्रशासन, फायर ब्रिगेड और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  कोई भी इन अवैध फैक्ट्रियों पर गंभीर नहीं है।
 
मानवाधिकार आयोग में होगा अधिकारियों के खिलाफ करेंगे केस
जैकेट फैक्ट्री में आग लगने के मामले में एक्टीविस्ट राजीव शर्मा सोमवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर केस दायर करेंगे। अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

ज्यादा किराए के लालच में फैक्ट्रियों को दे देते हैं मकान
शहीद में लोग ज्यादा किराए के लालच में मकान फैक्ट्रियां चलाने के लिए दे देते हैं। परिवार को किराए पर मकान देने पर एक फ्लोर का महज दो से ढाई हजार किराया मिलता है, जबकि फैक्ट्री को एक फ्लोर देने पर 10 से 15 हजार रुपये तक किराया मिल जाता है।

जिस मकान में आग लगी है, उसकी पहली मंजिल रिजवान ने किराए पर ली थी, जिसके लिए 10 हजार रुपये किराया देता था और दूसरी मंजिल के लिए नजाकत 13 हजार रुपये किराया देता था। यहां कि बिजली के कनेक्शन भी कामर्शियल नहीं लिए जाते हैं, रेजिडेंशियल बिजली के कनेक्शन पर ही फैक्ट्री का संचालन होता है।

चौकी इंचार्ज ने दर्ज कराई रिपोर्ट
इस मामले में शहीदनगर चौकी इंचार्ज विजय कुमार की तहरीर पर मकान मालिक बाबू, फैक्ट्री संचालक नजाकत और रिजवान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।  दोनों संचालकों को गिरफ्तार कर लिया है।

घायलों के नाम
शहाबुद्दीन 25 निवासी गुलावठी जिला बुलंदशहर
शहरुख खान निवासी रसूलपुर बुलंदशहर
फुरकान पुत्र असलम निवासी रसूलपुर बुलंदशहर
रिजवान निवासी बरेली

 मरने वालों और घायलों में छह भाई हैं
मृतक निगेहबान घायल रिजवान निवासी प्रह्लादपुर बरेली का सगा भाई जबकि हशमत एवं आजाद उसके चचेरे भाई हैं। इनके अलावा मृतकों में समीर और नाजिम पुत्र शाहिद निवासी अजराड़ा मेरठ भी सगे भाई हैं।

सीएम ने मृतक आश्रितों को दी दो-दो लाख की सहायता
 शहीदनगर अग्निकांड में मारे गए सभी 13 कर्मचारियों के परिजनों को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो-दो लाख रुपये दिए जाने की घोषणा की है। शुक्रवार शाम को डीएम निधि केसरवानी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीएम राहत कोष से यह राशि जारी की जाएगी। जल्द ही सभी पीड़ित परिजनों के बैंक एकाउंट में यह रकम पहुंच जाएगी।

एडीएम सिटी की अध्यक्षता में कमेटी गठित:
शहीद नगर अग्निकांड की जांच के लिए डीएम ने एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। कमेटी में सीओ साहिबाबाद के अलावा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, लेबर कमिश्नर और जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी शामिल रहेंगे।

कमेटी को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट डीएम को देनी होगी। डीएम ने बताया कि यह जांच कमेटी पूरे इलाके में ही चल रही फैक्ट्रियों पर अपनी रिपोर्ट देगी।


- बोले लोग 
फैक्ट्री में आग लगने का पता चलने पर इलाके में अफरातफरी मच गई। आग आसपास घरों में फैलने के डर से लोगों को घरों से बाहर निकाल लिया गया। -मोहम्मद शरिफ

आग तेजी से फैक्ट्री में फैल रही थी और काफी धुआं था, जिसेे देखते हुए लोगों ने नाले के पानी से आग बुझाने की कोशिश की। -नासिर 

फैक्ट्री में फंसे लोगों को बचाने की काफी कोशिश की गई। सीढ़ियों में आग और धुआं होने की वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका। -मोहम्मद गुलफाम कुरैशी

लोगों ने दीवार और छत तोड़ कर लोगों को बाहर निकालने के लिए रास्ता बनाया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। - आशिक अली सैफी 

- आठ घंटे शहीद नगर में बिजली गुल रही
फैक्ट्री में लगी आग की लपटें बिजली के तारों तक पहुंच रही थीं। हादसे की आशंका को देखते हुए लोगों ने बिजली सप्लाई बंद करा दी। करीब साढ़े चार बजे सप्लाई बंद हुई थी। आग बुझने के बाद दोपहर करीब साढ़े 11 बजे सप्लाई शुरू की गई लेकिन लाइन ट्रिप कर गई।

इसके बाद कर्मचारियों ने जांच की तो पता चला कि आग की चपेट में आने की वजह से बिजली की लाइन में कार्बन आ गया है। इसके बाद कर्मचारियों ने मरम्मत की। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सप्लाई सुचारु हुई और लोगों ने राहत की सांस ली।  

 राजनीतिक पार्टियों के  नेताओं का आना लगा रहा  
घटना की सूचना मिलते ही राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का आना शुरू हो गया। सबसे पहले सुबह साहिबाबाद विधायक अमरपाल शर्मा मौके पर पहुंचे। समाजवादी पार्टी से साहिबाबाद विधानसभा प्रत्याशी राशिद मलिक और जिलाध्यक्ष साजिद हुसैन भी घटनास्थल पर पहुंचे।

इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरेंद्र कसाना, प्रदेश संगठन मंत्री नरेंद्र राठी ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। विदेश राज्यमंत्री और सांसद गाजियाबाद वीके सिंह समेत भाजपा महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। वीके सिंह ने लोगों से बात की और निरीक्षण किया। लोगों ने उनसे मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिलाए जाने की मांग की, जिस पर उन्हें मदद का आश्वासन दिया। 

 फैक्ट्री में ये सामान जला 
सिलाई मशीनें, जैकेट बनाने के लिए रखी रैक्सीन की थान, फोम, पॉलिश, केमिकल, फर्नीचर और जनरेटर 

बीड़ी से आग लगने की चर्चा रही 
प्रथम दृष्टया सबमर्सिबल की मोटर के तारों में शॉर्ट सर्किट से आग लगना सामने आया है लेकिन मौके पर किसी कर्मचारी की ओर से जलती हुई बीड़ी फेंकी जाने से आग लगने की भी चर्चा रही। फिलहाल, पुलिस और फायर ब्रिगेड शॉर्ट सर्किट से आग लगना ही मान कर चल रहे हैं। 

 दुख में बंद रही शहीद नगर मार्केट 
जैकेट फैक्ट्री में लगी आग में 13 लोगों की मौत से दुखी शहीद नगर के व्यापारियों और दुकानदारों ने शुक्रवार को मार्केट बंद रखी। आशिक अली सैफी ने बताया कि कभी इतना बड़ा हादसा नहीं हुई। इस घटना पर सभी निवासी दुखी हैं। यहां तक कि पूरी मार्केट बंद है। कुछ लोग तो मदद के लिए जीटीबी अस्पताल तक गए। 

 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्वीट कर दुख प्रकट किया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर जैकेट फैक्ट्री में आग से हुई मौतों पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि वह इस हादसे का पता चलने के बाद काफी दुखी हैं और वे हादसे में प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं। 

एसी ब्लास्ट मामला: 180 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

राजनगर में एसी ब्लास्ट में हुई पांच कंपनी कर्मियों की मौत के मामले में 180 दिन बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। मृतकों के परिजन कई बार कार्रवाई की गुहार लगा चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

बता दें कि 14 मई को राजनगर स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में इंडिया मार्ट के ऑफिस में आग लग गई थी, जिसमें पांच कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन ने खिड़की से कूदकर जान बचाई थी। इस मामले में कविनगर थाने में पांच एफआईआर दर्ज कराई गई। इस मामले में केस आईओ का कहना है कि मामले की छानबीन चल रही है।


कार्बन मोनो आक्साइड बनी मौत का सबब
कमरे में वेंटिलशन नहीं होने पर धुआं बेहद खतरनाक हो जाता है। आग या धुएं से कमरे के अंदर मौजूद ऑक्सीजन नष्ट हो जाती है, जिसके बाद कार्बन-मोनो-ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है। सांस के रूप में इन दोनों गैसों को लेना मौत का कारण बन जाता है।

पहले भी हुए हादसे
14 मई 16- राजनगर में इंडिया मार्ट के ऑफिस में एसी फटा, पांच की मौत
14 नंवबर 10 - लोनी में एसी में लीकेज से लगी आग, दम घुटने से पांच मरे
22 अप्रैल 16 - आरडीसी की बिल्डिंग में एसी में आग, 150 लोगों को बचाया
 
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