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उंगली के निशान, बताएंगे अपराधी की पहचान
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 25 Apr 2017 12:34 AM IST
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पुलिस घटनास्थल से फिंगर प्रिंट उठाते हुए
- फोटो : amarujala
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सौरभ पांडेय
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गाजियाबाद। फोरेंसिक लैब भले ही दिसंबर में शुरू होगी लेकिन पुलिस ने पेशेवर अपराधियों के फिंगरप्रिंट्स का डाटा अभी से इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। लैब बनने के बाद घटना के खुलासे में उंगली के निशान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
तब लूट, डकैती और चोरी जैसी बड़ी वारदातों में पेशेवर अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। गाजियाबाद पुलिस भी सीबीआई और सीआईडी की तर्ज पर फिंगरप्रिंट्स के जरिए अपराधियों को ट्रेस कर सकेगी।
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दरअसल, किसी भी बड़ी हत्या, लूट, डकैती और चोरी के मामले में फोरेंसिक टीम फिंगरप्रिंट्स जरूर जुटाती है। फिंगरप्रिंट्स इकट्ठा कर उसे घटना के जांच अधिकारी को सौंप दिया जाता है। जांच अधिकारी फिंगरप्रिंट्स को जांच के लिए लखनऊ फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजता है।
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वहां से रिपोर्ट आने में करीब एक से डेढ़ माह का समय लग जाता है। ऐसे में घटना की जांच में फिंगरप्रिंट्स का अहम रोल नहीं रहता था, लेकिन गाजियाबाद में लैब होने से यह दिक्कत अब नहीं रहेगी। फोरेंसिक लैब के निर्माण के साथ ही करीब 10 हजार पेशेवर अपराधियों के फिंगरप्रिंट्स का डाटा तैयार किया जा रहा है।
एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि लैब शुरू होते ही सभी घटनास्थलों से फिंगरप्रिंट्स लेकर उसे सबसे पहले मिलान के लिए लैब भेजा जाएगा। सभी अपराधियों के फिंगरप्रिंट्स लेना शुरू कर दिया गया है, जिससे आसानी से उन्हें पकड़ा जा सके।
फिंगरप्रिंट्स तो लिए जाते हैं, मगर नहीं होता खुलासा
फिंगरप्रिंट्स का डाटा नहीं होने से अभी तक घटनाओं के दौरान लिए गए फिंगरप्रिंट्स का कोई प्रयोग ही नहीं हो पाता था। पुलिस बड़ी घटनाओं की जांच में सिर्फ मोबाइल सर्विलांस पर ही निर्भर रहती है। डाटा बनने के बाद मोबाइल सर्विलांस के साथ ही फिंगरप्रिंट्स का अहम रोल होगा।
सॉफ्टवेयर में स्कैन करते ही सामने होगा अपराधी
पुलिस अभी जो डाटा तैयार कर रही है, उसमें फिंगरप्रिंट्स के साथ अपराधी की पूरी डिटेल और फोटो इकट्ठा की जा रही हैं। पूरे डाटा को एक साफ्टवेयर में फीड किया जाएगा। घटना के बाद वहां से मिले फिंगरप्रिंट्स को सॉफ्टवेयर में स्कैन करते ही अपराधी की फोटो और डिटेल सामने आ जाएगी।
आधार से जोड़ने की योजना
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आधार के डाटा का कंट्रोल भी पुलिस को दिया जा सकता है। जिसके बाद सिर्फ पेशेवर अपराधी ही नहीं बल्कि फिंगरप्रिंट्स के जरिए वे सभी लोग पकड़े जाएंगे जिन्होंने अपराध किया है। ऐसे में मर्डर और अन्य घटनाओं में भी उंगली के निशान अहम भूमिका निभाएंगे।