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पेशी पर आया हत्यारोपी कोर्ट परिसर से फरार
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:33 AM IST
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अपराध्ा
- फोटो : अमर उजाला
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जेल से पेशी पर आया हत्यारोपी सोनू बृहस्पतिवार दोपहर सिपाही को चकमा देकर कोर्ट परिसर से फरार हो गया। एसएसपी ने पेशी पर ले जाने वाले सिपाही अशोक कुमार के खिलाफ कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उसे गिरफ्तार कर सस्पेंड कर दिया गया।
एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि वर्ष 2009 में टैक्सी ड्राइवर सोनी निवासी राजनगर कालोनी, लोनी की हत्या कर दी गई थी। आरोप उसके चार दोस्तों पर था, जिनमें से सोनू (28) पुत्र जगजीत निवासी सिनौली, बागपत को 2010 में जेल भेजा था।
बृहस्पतिवार को कोर्ट नंबर 13 में उसकी पेशी थी। दोपहर 12 बजे उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे दोपहर दो बजे दोबारा पेश किए जाने का आदेश दिया। दोपहर दो बजे कचहरी हवालात में तैनात सिपाही अशोक कुमार सोनू को पेशी पर लेकर गया।
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बकौल एसपी सिटी, सिपाही अशोक का कहना है कि पेशी के बाद वह बाहर निकला तो कोर्ट परिसर के बाहर सोनू का भाई और मां मिल गए। मां सोनू को देखकर रोने लगी। सोनू ने मां से बात करने के लिए सिपाही से मोहलत मांगी।
इसी दौरान सिपाही के फोन पर उसके परिचित की कॉल आ गई। सिपाही फोन पर बात करने में व्यस्त हो गया। सोनू ने मौके का फायदा उठाया और मां-भाई के साथ कोर्ट से भाग गया।
करीब तीन मिनट बाद सिपाही ने कॉल डिस्कनेक्ट की तो तीनों गायब थे। उसने उन्हें ढूंढने की कोशिश की, नहीं मिलने पर अधिकारियों को सूचना दी। एसपी सिटी, एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया पुलिस बल के साथ कोर्ट परिसर पहुंचे।
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी की तलाश में कई टीमें लगी हैं। उसके घर पर भी दबिश दी जा रही है। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी सिपाही अलीगढ़ का रहने वाला है। पिछले नौ माह से उसकी पुलिस लाइंस से बंदियों को पेशी पर ले जाने ड्यूटी लगी हुई थी।
उन्होंने बताया कि उसे बर्खास्त करने की भी कार्रवाई की जाएगी। सिपाही की गतिविधियां जानने के लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।
हत्यारोपी सोनू ने तीन मिनट में भेद दी पुलिस की ‘हाईटेक’ सिक्योरिटी
कचहरी की सुरक्षा में पुलिसवाले कितने लापरवाह रहते हैं हत्यारोपी सोनू की फरारी इसकी बानगी है। वह महज तीन मिनट में 80 से ज्यादा पुलिसवालों की ‘हाईटेक’ सिक्योरिटी को धता बताते हुए रफूचक्कर हो गया और किसी को भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, बंदियों को कोर्ट में पेश करने के दौरान बरती जाने वाली खामियां बंदियों की फरारी का सबब बन रही हैं। इससे पहले भी जिले में कई बंदी कचहरी और उसकी हवालात से पुलिस को गच्चा देकर भाग चुके हैं।
कभी पुलिसवाले बंदी को होटल में खाना खिलाने ले जाते हैं, तो कभी उसे बिना पकड़े ही घूमने की इजाजत दे देते हैं। पुलिस चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति करती है। सोनू के मामले में भी यही हुआ।
सिपाही ने तीन मिनट तक मोबाइल पर बात की और इसी दौरान हत्यारोपी फरार हो गया। काफी तलाश के बाद भी नहीं मिला। सवाल यह है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद आखिर सोनू को पकड़ा क्यों नहीं जा सका।
फरारी के बाद भी दिखी लापरवाही: घटना के बाद जांच में पता चला कि कोर्ट परिसर में लगे 21 सीसीटीवी कैमरों में से आठ खराब हैं। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग करने के लिए पुलिसकर्मी नहीं था।
कोर्ट से बाहर निकलने वाले लोगों की चेकिंग भी महज दिखावा ही थी। मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे, जिनके साइड से भी लोग आ जा रहे थे। उधर, कचहरी में एंट्री करने वालों की चेकिंग के लिए लगे मेटल डिटेक्टर साइड में रखे हुए थे।
पुलिस कर्मी भी छांव देखकर पेड़ के नीचे और दुकानों के बाहर खडे़ होकर गप्पे लगाते दिखे। 35 पुलिसवाले कचहरी की सुरक्षा में लगे हैं, जबकि 40-45 कचहरी हवालात और बंदियों को लाने-ले जाने में लगे हुए रहते हैं।
एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि कोर्ट परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग चेक की जा रही है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनाई जा रही है। हाईकोर्ट की तर्ज पर जल्द ही पर्ची सिस्टम शुरू होने वाला है।
कब-कब फरार हुए बंदी
04 दिसंबर 12- कचहरी परिसर से बंदी वीरेंद्र हुआ फरार ।
11 अगस्त 11- पुलिस को चकमा देकर कचहरी से भागा शाहनवाज।
03 अगस्त 09- पेशी पर आया हत्यारोपी पुलिस कस्टडी से फरार।
05 अगस्त 08 - बंदी इंद्रपाल, मनोज कचहरी की हवालात से फरार।
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एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि वर्ष 2009 में टैक्सी ड्राइवर सोनी निवासी राजनगर कालोनी, लोनी की हत्या कर दी गई थी। आरोप उसके चार दोस्तों पर था, जिनमें से सोनू (28) पुत्र जगजीत निवासी सिनौली, बागपत को 2010 में जेल भेजा था।
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बृहस्पतिवार को कोर्ट नंबर 13 में उसकी पेशी थी। दोपहर 12 बजे उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे दोपहर दो बजे दोबारा पेश किए जाने का आदेश दिया। दोपहर दो बजे कचहरी हवालात में तैनात सिपाही अशोक कुमार सोनू को पेशी पर लेकर गया।
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बकौल एसपी सिटी, सिपाही अशोक का कहना है कि पेशी के बाद वह बाहर निकला तो कोर्ट परिसर के बाहर सोनू का भाई और मां मिल गए। मां सोनू को देखकर रोने लगी। सोनू ने मां से बात करने के लिए सिपाही से मोहलत मांगी।
इसी दौरान सिपाही के फोन पर उसके परिचित की कॉल आ गई। सिपाही फोन पर बात करने में व्यस्त हो गया। सोनू ने मौके का फायदा उठाया और मां-भाई के साथ कोर्ट से भाग गया।
करीब तीन मिनट बाद सिपाही ने कॉल डिस्कनेक्ट की तो तीनों गायब थे। उसने उन्हें ढूंढने की कोशिश की, नहीं मिलने पर अधिकारियों को सूचना दी। एसपी सिटी, एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया पुलिस बल के साथ कोर्ट परिसर पहुंचे।
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी की तलाश में कई टीमें लगी हैं। उसके घर पर भी दबिश दी जा रही है। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी सिपाही अलीगढ़ का रहने वाला है। पिछले नौ माह से उसकी पुलिस लाइंस से बंदियों को पेशी पर ले जाने ड्यूटी लगी हुई थी।
उन्होंने बताया कि उसे बर्खास्त करने की भी कार्रवाई की जाएगी। सिपाही की गतिविधियां जानने के लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।
हत्यारोपी सोनू ने तीन मिनट में भेद दी पुलिस की ‘हाईटेक’ सिक्योरिटी
कचहरी की सुरक्षा में पुलिसवाले कितने लापरवाह रहते हैं हत्यारोपी सोनू की फरारी इसकी बानगी है। वह महज तीन मिनट में 80 से ज्यादा पुलिसवालों की ‘हाईटेक’ सिक्योरिटी को धता बताते हुए रफूचक्कर हो गया और किसी को भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, बंदियों को कोर्ट में पेश करने के दौरान बरती जाने वाली खामियां बंदियों की फरारी का सबब बन रही हैं। इससे पहले भी जिले में कई बंदी कचहरी और उसकी हवालात से पुलिस को गच्चा देकर भाग चुके हैं।
कभी पुलिसवाले बंदी को होटल में खाना खिलाने ले जाते हैं, तो कभी उसे बिना पकड़े ही घूमने की इजाजत दे देते हैं। पुलिस चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति करती है। सोनू के मामले में भी यही हुआ।
सिपाही ने तीन मिनट तक मोबाइल पर बात की और इसी दौरान हत्यारोपी फरार हो गया। काफी तलाश के बाद भी नहीं मिला। सवाल यह है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद आखिर सोनू को पकड़ा क्यों नहीं जा सका।
फरारी के बाद भी दिखी लापरवाही: घटना के बाद जांच में पता चला कि कोर्ट परिसर में लगे 21 सीसीटीवी कैमरों में से आठ खराब हैं। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग करने के लिए पुलिसकर्मी नहीं था।
कोर्ट से बाहर निकलने वाले लोगों की चेकिंग भी महज दिखावा ही थी। मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे, जिनके साइड से भी लोग आ जा रहे थे। उधर, कचहरी में एंट्री करने वालों की चेकिंग के लिए लगे मेटल डिटेक्टर साइड में रखे हुए थे।
पुलिस कर्मी भी छांव देखकर पेड़ के नीचे और दुकानों के बाहर खडे़ होकर गप्पे लगाते दिखे। 35 पुलिसवाले कचहरी की सुरक्षा में लगे हैं, जबकि 40-45 कचहरी हवालात और बंदियों को लाने-ले जाने में लगे हुए रहते हैं।
एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि कोर्ट परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग चेक की जा रही है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनाई जा रही है। हाईकोर्ट की तर्ज पर जल्द ही पर्ची सिस्टम शुरू होने वाला है।
कब-कब फरार हुए बंदी
04 दिसंबर 12- कचहरी परिसर से बंदी वीरेंद्र हुआ फरार ।
11 अगस्त 11- पुलिस को चकमा देकर कचहरी से भागा शाहनवाज।
03 अगस्त 09- पेशी पर आया हत्यारोपी पुलिस कस्टडी से फरार।
05 अगस्त 08 - बंदी इंद्रपाल, मनोज कचहरी की हवालात से फरार।