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धर्मगुरू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश-Ghaziabad city
Updated Sun, 18 Nov 2018 06:07 PM IST
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‘धर्मगुरु’ पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश
गाजियाबाद। सीजेएम कोर्ट ने शनिवार को आस्था के नाम पर लोगों से खिलवाड़ करने वाले एक कथित धर्मगुरु के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इंदिरापुरम पुलिस को मामले में विवेचना पेश करने को भी कहा है।
कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार वैशाली में रहने वाले एक धर्म के लोगों ने वकील की मदद से कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की है। अर्जी के माध्यम से बताया कि उन लोगों की मुलाकात 19 जुलाई 2017 को एक कथित धर्मगुरु से हुई थी। इस दौरान उसने अपना नाम अलग बताया था। समाज के लोगों ने उसे धर्मगुरु मान लिया और वैशाली स्थित एक धर्मस्थान पर छह नवंबर से 17 नवंबर 2017 तक रखा। आठ अगस्त 2018 को विश्राम कक्ष में धर्मगुरु के साथ एक लड़की के होने का वीडियो वायरल हुआ, जिसका पूरे देश में जमकर विरोध हुआ। इस बात को लेकर देशभर में धर्मगुरु की निंदा की गई। आरोप है कि इससे तमाम लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। समाज के लोगों ने इस मामले की शिकायत इंदिरापुरम पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद एसएसपी से शिकायत की, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद समाज के लोगों ने न्याय पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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गाजियाबाद। सीजेएम कोर्ट ने शनिवार को आस्था के नाम पर लोगों से खिलवाड़ करने वाले एक कथित धर्मगुरु के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इंदिरापुरम पुलिस को मामले में विवेचना पेश करने को भी कहा है।
कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार वैशाली में रहने वाले एक धर्म के लोगों ने वकील की मदद से कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की है। अर्जी के माध्यम से बताया कि उन लोगों की मुलाकात 19 जुलाई 2017 को एक कथित धर्मगुरु से हुई थी। इस दौरान उसने अपना नाम अलग बताया था। समाज के लोगों ने उसे धर्मगुरु मान लिया और वैशाली स्थित एक धर्मस्थान पर छह नवंबर से 17 नवंबर 2017 तक रखा। आठ अगस्त 2018 को विश्राम कक्ष में धर्मगुरु के साथ एक लड़की के होने का वीडियो वायरल हुआ, जिसका पूरे देश में जमकर विरोध हुआ। इस बात को लेकर देशभर में धर्मगुरु की निंदा की गई। आरोप है कि इससे तमाम लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। समाज के लोगों ने इस मामले की शिकायत इंदिरापुरम पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद एसएसपी से शिकायत की, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद समाज के लोगों ने न्याय पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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