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56.5 लाख की ठगी करने वाले तीन ठगों का अपहरण, आठ लोग गिरफ्तार
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ठगी के शिकार पीड़ितों ने ही ठगों का कर लिया अपहरण, आठ गिरफ्तार
गाजियाबाद। बीफार्मा छात्र के अपहरण के खुलासे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। छात्र और उसके साथी सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर लोगों से रुपये की ठगी करते थे। छह महीने में आरोपियों ने 56.50 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। ठगी के शिकार लोगों ने ही 19 जून को छात्र समेत तीन लोगों का अपहरण कर लिया। अपहरण के बाद एक व्यक्ति को रुपये लाने के लिए छोड़ दिया था। अपहरणकर्ता छात्र को बुलंदशहर और दूसरे व्यक्ति को गाजियाबाद और दिल्ली में घुमाते रहे। छात्र के परिजन से पांच लाख रुपये की फिरौती भी मांगी। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
एसपी सिटी श्लोक कुमार ने बताया कि कविनगर थाने में 20 जून को ललित कुमार निवासी कपूरपुर थाना धौलाना ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके छोटा भाई निर्दोष राणा जो कि सुंदरदीप कॉलेज से बीफार्मा पास आउट है, अपने घर से कॉलेज के लिए निकला था। कॉलेज में उसे मार्कशीट से संबंधित कोई काम था। दोपहर करीब दो बजे छात्र के नंबर से पड़ोसी परमानंद गुप्ता के मोबाइल पर कॉल जाती है कि निर्दोष का गाजियाबाद गोविंदपुरम के पास एक्सीडेंट हो गया है। परिजन गोविंदपुरम के पास पहुंचे तो उक्त युवक ने निर्दोष के परिजनों को एनडीआरएफ के पास आने को कहा। परिजन वहां पहुंचे तो आरोपी युवक ने निर्दोष के दोस्त मनोज के नंबर से परिजनों के फोन पर कॉल करके पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस ने निर्दोष और मनोज की मोबाइल कॉल की सीडीआर निकाली तो पता चला कि दोनों के बीच पिछले दो दिन में 25 बार बात हुई है। पुलिस ने दोनों को ट्रेस किया, लेकिन मोबाइल बंद होने के कारण पता नहीं चल सका। 21 जून की तड़के 3:30 बजे निर्दोष और मनोज को बाबू धाम के पास से बरामद कर लिया। उनके साथ आठ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में अपहरण के पूरे राज से पर्दा उठ गया।
तीन लोगों का हुआ था अपहरण
पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी कि तो पता चला कि अपहरण केवल बीफार्मा के छात्र का ही नहीं हुआ है, बल्कि उसके साथ दो अन्य लोगों का भी हुआ था। कुल तीन लोगों का अपहरण किया गया । निर्दोष के साथ उसके साथी मनोज और अजीत का भी अपहरण किया गया था। अजीत को आरोपियों ने रुपये लाने के लिए छोड़ दिया था। जबकि मनोज और निर्दोष को आरोपी दो कारों में लेकर घुमते रहे। बताया कि निर्दोष को बुलंदशहर जिले में पूरे एक दिन घुमाया। जबकि पुलिस ने एक व्यक्ति के अपहरण होने की ही जानकारी दी थी। जांच के बाद पता चला कि तीन लोगों का अपहरण किया गया था। निर्दोष और मनोज को बरामद कर लिया है। आरोपियों से दो कार भी बरामद की है।
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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करते थे ठगी
निर्दोष, सुनील, अजीत और मनोज चार दोस्त हैं। अजीत और मनोज सगे भाई हैं। निर्दोष, मनोज और अजीत नौकरी लगवाने का वादा करते थे। तीनों सुनील को मिले। सुनील लोगों से नौकरी लगवाने के लिए संपर्क करने लगा। सुनील तीनों को नौकरी के नाम पर रुपये दिलवाता रहा। यूपी में पिछले दिनों 40 हजार सिपाही भर्ती की जगह निकली थीं, दो लोगों से 9.5 लाख रुपये ले लिए। पुलिस की भर्ती पूरी होने के बाद उन्होंने डाक विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर 15.5 लाख रुपये और रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर चार लोगों से 26.5 लाख रुपये ले लिए। कुल मिलाकर करीब 56.5 लाख रुपये की ठगी की। सभी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों ने मध्यस्थता करने वाले सुनील पर रुपये के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
अजीत को बनाया सीबीआई का अधिकारी
तीनों आरोपियों ने अजीत को सीबीआई इंस्पेक्टर बताया और निर्दोष की आर्मी के अधिकारियों से सेटिंग होने की बात कही। लोग ठगों की बातों में आते गए और छह महीने में 56 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। जिन-जिन विभागों में नौकरी निकलती रहीं। उन विभागों में आरोपी अपनी जान पहचान बताते रहे। तीन आरोपी टियाना, शेरपुर और भैंसरोली बुलंदशहर के रहने वाले हैं। सुनील और अजीत इसके मास्टरमाइंड हैं। कुल मिलाकर आरोपियों ने आठ लोगों से ठगी की है।
आठ लोगों ने की अपहरण और फिरौती की प्लानिंग
सीओ द्वितीय आतिश कुमार ने बताया कि ठगों ने विक्रम सिंह से 17.5 लाख और इंदर के भतीजे की नौकरी केनाम पर 15 लाख रुपये ले लिए थे। इन लोगों ने मध्यस्थता करने वाले सुनील के माध्यम से अपहरण और फिरौती के माध्यम से रुपये वसूलने की प्लानिंग की। उन्होंने बताया कि विक्रम सिंह निवासी शिवपुरम द्वितीय मिशलगढ़ी गाजियाबाद, राजकुमार, राहुल त्यागी, सुनील कुमार निवासी आकापुर टियाना बीबीनगर बुलंदशहर, अनिल कुमार निवासी जीजी-65 अवंतिका-2 कविनगर, इंदर निवासी ग्राम सहरा बीबीनगर बुलंदशहर, राजकुमार निवासी शेखपुर बाबूगढ़ हापुड़ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से अपहरण किए गए मनोज, निर्दोष और दो कार बरामद की है।
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गाजियाबाद। बीफार्मा छात्र के अपहरण के खुलासे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। छात्र और उसके साथी सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर लोगों से रुपये की ठगी करते थे। छह महीने में आरोपियों ने 56.50 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। ठगी के शिकार लोगों ने ही 19 जून को छात्र समेत तीन लोगों का अपहरण कर लिया। अपहरण के बाद एक व्यक्ति को रुपये लाने के लिए छोड़ दिया था। अपहरणकर्ता छात्र को बुलंदशहर और दूसरे व्यक्ति को गाजियाबाद और दिल्ली में घुमाते रहे। छात्र के परिजन से पांच लाख रुपये की फिरौती भी मांगी। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
एसपी सिटी श्लोक कुमार ने बताया कि कविनगर थाने में 20 जून को ललित कुमार निवासी कपूरपुर थाना धौलाना ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके छोटा भाई निर्दोष राणा जो कि सुंदरदीप कॉलेज से बीफार्मा पास आउट है, अपने घर से कॉलेज के लिए निकला था। कॉलेज में उसे मार्कशीट से संबंधित कोई काम था। दोपहर करीब दो बजे छात्र के नंबर से पड़ोसी परमानंद गुप्ता के मोबाइल पर कॉल जाती है कि निर्दोष का गाजियाबाद गोविंदपुरम के पास एक्सीडेंट हो गया है। परिजन गोविंदपुरम के पास पहुंचे तो उक्त युवक ने निर्दोष के परिजनों को एनडीआरएफ के पास आने को कहा। परिजन वहां पहुंचे तो आरोपी युवक ने निर्दोष के दोस्त मनोज के नंबर से परिजनों के फोन पर कॉल करके पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस ने निर्दोष और मनोज की मोबाइल कॉल की सीडीआर निकाली तो पता चला कि दोनों के बीच पिछले दो दिन में 25 बार बात हुई है। पुलिस ने दोनों को ट्रेस किया, लेकिन मोबाइल बंद होने के कारण पता नहीं चल सका। 21 जून की तड़के 3:30 बजे निर्दोष और मनोज को बाबू धाम के पास से बरामद कर लिया। उनके साथ आठ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में अपहरण के पूरे राज से पर्दा उठ गया।
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तीन लोगों का हुआ था अपहरण
पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी कि तो पता चला कि अपहरण केवल बीफार्मा के छात्र का ही नहीं हुआ है, बल्कि उसके साथ दो अन्य लोगों का भी हुआ था। कुल तीन लोगों का अपहरण किया गया । निर्दोष के साथ उसके साथी मनोज और अजीत का भी अपहरण किया गया था। अजीत को आरोपियों ने रुपये लाने के लिए छोड़ दिया था। जबकि मनोज और निर्दोष को आरोपी दो कारों में लेकर घुमते रहे। बताया कि निर्दोष को बुलंदशहर जिले में पूरे एक दिन घुमाया। जबकि पुलिस ने एक व्यक्ति के अपहरण होने की ही जानकारी दी थी। जांच के बाद पता चला कि तीन लोगों का अपहरण किया गया था। निर्दोष और मनोज को बरामद कर लिया है। आरोपियों से दो कार भी बरामद की है।
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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करते थे ठगी
निर्दोष, सुनील, अजीत और मनोज चार दोस्त हैं। अजीत और मनोज सगे भाई हैं। निर्दोष, मनोज और अजीत नौकरी लगवाने का वादा करते थे। तीनों सुनील को मिले। सुनील लोगों से नौकरी लगवाने के लिए संपर्क करने लगा। सुनील तीनों को नौकरी के नाम पर रुपये दिलवाता रहा। यूपी में पिछले दिनों 40 हजार सिपाही भर्ती की जगह निकली थीं, दो लोगों से 9.5 लाख रुपये ले लिए। पुलिस की भर्ती पूरी होने के बाद उन्होंने डाक विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर 15.5 लाख रुपये और रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर चार लोगों से 26.5 लाख रुपये ले लिए। कुल मिलाकर करीब 56.5 लाख रुपये की ठगी की। सभी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों ने मध्यस्थता करने वाले सुनील पर रुपये के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
अजीत को बनाया सीबीआई का अधिकारी
तीनों आरोपियों ने अजीत को सीबीआई इंस्पेक्टर बताया और निर्दोष की आर्मी के अधिकारियों से सेटिंग होने की बात कही। लोग ठगों की बातों में आते गए और छह महीने में 56 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। जिन-जिन विभागों में नौकरी निकलती रहीं। उन विभागों में आरोपी अपनी जान पहचान बताते रहे। तीन आरोपी टियाना, शेरपुर और भैंसरोली बुलंदशहर के रहने वाले हैं। सुनील और अजीत इसके मास्टरमाइंड हैं। कुल मिलाकर आरोपियों ने आठ लोगों से ठगी की है।
आठ लोगों ने की अपहरण और फिरौती की प्लानिंग
सीओ द्वितीय आतिश कुमार ने बताया कि ठगों ने विक्रम सिंह से 17.5 लाख और इंदर के भतीजे की नौकरी केनाम पर 15 लाख रुपये ले लिए थे। इन लोगों ने मध्यस्थता करने वाले सुनील के माध्यम से अपहरण और फिरौती के माध्यम से रुपये वसूलने की प्लानिंग की। उन्होंने बताया कि विक्रम सिंह निवासी शिवपुरम द्वितीय मिशलगढ़ी गाजियाबाद, राजकुमार, राहुल त्यागी, सुनील कुमार निवासी आकापुर टियाना बीबीनगर बुलंदशहर, अनिल कुमार निवासी जीजी-65 अवंतिका-2 कविनगर, इंदर निवासी ग्राम सहरा बीबीनगर बुलंदशहर, राजकुमार निवासी शेखपुर बाबूगढ़ हापुड़ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से अपहरण किए गए मनोज, निर्दोष और दो कार बरामद की है।