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कचरे के निस्तारण में निगम के अफसरों ने किया घपला : मेयर
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गाजियाबाद। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के बीच शुरू हुई फाइलों की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। रविवार को महापौर ने नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कचरा निस्तारण के काम में बड़ा घपला होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कचरा उठाने वाली एजेंसी जेएस एनवायरो को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
नगर निगम में रविवार को पत्रकार वार्ता करते हुए महापौर ने कहा कि कचरा उठाने वाले 350 वाहनों के संचालन और अनुरक्षण के लिए प्रत्येक पर 30 हजार रुपये माह खर्च का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने आकलन कराया तो 20 हजार रुपये प्रतिमाह निकला। आरोप है कि जेएस एनवायरो कंपनी को एक वाहन के संचालन के लिए 30 हजार की जगह 61,499 रुपये में दस वर्ष के लिए जिम्मा दे दिया गया, जबकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
वहीं, पहले से नेचर ग्रीन कंपनी पांच वर्ष के अनुबंध पर 41,422 रुपये प्रति वाहन के हिसाब से काम कर रही है। जानकारी मिलने पर जेएस एनवायरो कंपनी की फाइल नगर स्वास्थ्य अधिकारी से मांगी गई, लेकिन यह नहीं मिली। दोबारा फाइल मांगे जाने पर महापौर कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर का स्थानांतरण कर दिया गया। बाद में फाइल मिली तो उसमें से दस्तावेज गायब थे। केवल एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज ही फाइल में दिए गए।
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महापौर का आरोप है कि वाहनों के संचालन व अनुरक्षण की निविदा में भी बड़ी अनियमितता बरती गई। स्वास्थ्य विभाग का प्रभारी संयुक्त नगर आयुक्त को बना दिया गया जो गंभीर बीमारी के कारण लंबे समय से अवकाश पर रहे या कभी-कभी कार्यालय आते हैं। निविदा समिति का अध्यक्ष भी उन्हेंं ही बना दिया, जबकि वह किसी बैठक में नहीं आए और उनके हस्ताक्षर भी नहीं है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में नेचर ग्रीन कंपनी को भी शामिल किया गया, जिससे 59,500 रुपये प्रति वाहन के संचालन का प्रस्ताव कराया गया और बाद में नियमों का हवाला देकर उसे प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जो कंपनी पहले से 41,422 रुपये प्रति वाहन के हिसाब से भुगतान ले रही है वो 59,500 रुपये का प्रस्ताव कैसे रख सकती है। अगर प्रस्ताव रखती है तो पुरानी निविदा को निरस्त करना होगा।
अफसरों ने प्रेस कांफ्रेंस
न करने का दबाव बनाया
महापौर ने कहा, तीन दिन से अधिकारी मुझ पर प्रेस काॅन्फ्रेंस नहीं करने का दबाव बना रहे हैं। मुझे त्यागपत्र देना मंजूर है लेकिन अपमान नहीं सहूंगी। घपले-घोटालों को बर्दाश्त नहीं करूंगी।
नगर आयुक्त की तरफ से आरोप लगाया गया कि उनके पति घर पर फाइलें मंगाते हैं। नगर आयुक्त ने झूठे आरोप लगाए हैं।
नगर आयुक्त ने मुझे ही नहीं महिला पार्षदों को भी अपमानित किया है। इस मामले की शिकायत महिला आयोग से करूंगी। नगर आयुक्त खुद मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं और आरोप हम पर लगाते हैं।
नगर निगम बोर्ड में लिए गए फैसले के अनुसार संपत्ति कर निर्धारण दो वर्ष (1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025) किया जा चुका है। इसके विपरीत अधिकारी शासन में वाहवाही लूटने के लिए संपत्ति कर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
महापौर ने कहा कि रैली इंफ्रा प्रा. लि. नामक फर्म को जुलाई 2022 में पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम हस्तांतरित किया गया। फर्म के चेकडिसऑनर होने के बाद भी निगम अधिकारियों ने कोई कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की, यह भी बड़ा सवाल है।
नियमों के दायरे में किया कंपनी का चयन
नगर आयुक्त कार्यालय का जवाब
महापौर की तरफ से लगाए गए आरोपों पर नगर आयुक्त ने जवाब नहीं दिया। उनके कार्यालय की ओर से सफाई दी है कि वाहनों की खरीद पारदर्शी तरीके से हुई। तकनीकी परीक्षण में 100 अंकों में से सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली फर्म का चयन किया जाना था, जिसमें मैसर्स जेएस एनवायरो प्रा. लि. ने 94.82 अंक प्राप्त किए। इस फर्म ने 61,499 रुपये धनराशि अंकित की थी। अनुबंध की शर्तों के अनुसार ही फर्म का आठ वर्ष की अवधि के लिए चयन किया गया, दो वर्ष कार्य संतोषजनक रहने की स्थिति में बढ़ाने का प्रावधान किया गया। कचरा उठाने वाले वाहन लीचेट के उत्सर्जन के कारण पांच से छह वर्ष तक ही चल पाते हैं। इस कारण अवधि को आठ वर्ष किया गया। समय से पहले जर्जर होने पर फर्म को अपने व्यय पर वाहन खरीदने की शर्त रखी गई। नगर निगम ऑडिटोरियम और रमतेराम रोड स्थित शॉपिंग कांप्लेक्स का बकाया जमा नहीं कराने पर सात अगस्त को मैसर्स रैली इंफ्रा के विरुद्ध वसूली की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से आरसी जारी की गई है।
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नगर निगम में रविवार को पत्रकार वार्ता करते हुए महापौर ने कहा कि कचरा उठाने वाले 350 वाहनों के संचालन और अनुरक्षण के लिए प्रत्येक पर 30 हजार रुपये माह खर्च का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने आकलन कराया तो 20 हजार रुपये प्रतिमाह निकला। आरोप है कि जेएस एनवायरो कंपनी को एक वाहन के संचालन के लिए 30 हजार की जगह 61,499 रुपये में दस वर्ष के लिए जिम्मा दे दिया गया, जबकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
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वहीं, पहले से नेचर ग्रीन कंपनी पांच वर्ष के अनुबंध पर 41,422 रुपये प्रति वाहन के हिसाब से काम कर रही है। जानकारी मिलने पर जेएस एनवायरो कंपनी की फाइल नगर स्वास्थ्य अधिकारी से मांगी गई, लेकिन यह नहीं मिली। दोबारा फाइल मांगे जाने पर महापौर कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर का स्थानांतरण कर दिया गया। बाद में फाइल मिली तो उसमें से दस्तावेज गायब थे। केवल एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज ही फाइल में दिए गए।
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महापौर का आरोप है कि वाहनों के संचालन व अनुरक्षण की निविदा में भी बड़ी अनियमितता बरती गई। स्वास्थ्य विभाग का प्रभारी संयुक्त नगर आयुक्त को बना दिया गया जो गंभीर बीमारी के कारण लंबे समय से अवकाश पर रहे या कभी-कभी कार्यालय आते हैं। निविदा समिति का अध्यक्ष भी उन्हेंं ही बना दिया, जबकि वह किसी बैठक में नहीं आए और उनके हस्ताक्षर भी नहीं है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में नेचर ग्रीन कंपनी को भी शामिल किया गया, जिससे 59,500 रुपये प्रति वाहन के संचालन का प्रस्ताव कराया गया और बाद में नियमों का हवाला देकर उसे प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जो कंपनी पहले से 41,422 रुपये प्रति वाहन के हिसाब से भुगतान ले रही है वो 59,500 रुपये का प्रस्ताव कैसे रख सकती है। अगर प्रस्ताव रखती है तो पुरानी निविदा को निरस्त करना होगा।
अफसरों ने प्रेस कांफ्रेंस
न करने का दबाव बनाया
महापौर ने कहा, तीन दिन से अधिकारी मुझ पर प्रेस काॅन्फ्रेंस नहीं करने का दबाव बना रहे हैं। मुझे त्यागपत्र देना मंजूर है लेकिन अपमान नहीं सहूंगी। घपले-घोटालों को बर्दाश्त नहीं करूंगी।
नगर आयुक्त की तरफ से आरोप लगाया गया कि उनके पति घर पर फाइलें मंगाते हैं। नगर आयुक्त ने झूठे आरोप लगाए हैं।
नगर आयुक्त ने मुझे ही नहीं महिला पार्षदों को भी अपमानित किया है। इस मामले की शिकायत महिला आयोग से करूंगी। नगर आयुक्त खुद मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं और आरोप हम पर लगाते हैं।
नगर निगम बोर्ड में लिए गए फैसले के अनुसार संपत्ति कर निर्धारण दो वर्ष (1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025) किया जा चुका है। इसके विपरीत अधिकारी शासन में वाहवाही लूटने के लिए संपत्ति कर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
महापौर ने कहा कि रैली इंफ्रा प्रा. लि. नामक फर्म को जुलाई 2022 में पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम हस्तांतरित किया गया। फर्म के चेकडिसऑनर होने के बाद भी निगम अधिकारियों ने कोई कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की, यह भी बड़ा सवाल है।
नियमों के दायरे में किया कंपनी का चयन
नगर आयुक्त कार्यालय का जवाब
महापौर की तरफ से लगाए गए आरोपों पर नगर आयुक्त ने जवाब नहीं दिया। उनके कार्यालय की ओर से सफाई दी है कि वाहनों की खरीद पारदर्शी तरीके से हुई। तकनीकी परीक्षण में 100 अंकों में से सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली फर्म का चयन किया जाना था, जिसमें मैसर्स जेएस एनवायरो प्रा. लि. ने 94.82 अंक प्राप्त किए। इस फर्म ने 61,499 रुपये धनराशि अंकित की थी। अनुबंध की शर्तों के अनुसार ही फर्म का आठ वर्ष की अवधि के लिए चयन किया गया, दो वर्ष कार्य संतोषजनक रहने की स्थिति में बढ़ाने का प्रावधान किया गया। कचरा उठाने वाले वाहन लीचेट के उत्सर्जन के कारण पांच से छह वर्ष तक ही चल पाते हैं। इस कारण अवधि को आठ वर्ष किया गया। समय से पहले जर्जर होने पर फर्म को अपने व्यय पर वाहन खरीदने की शर्त रखी गई। नगर निगम ऑडिटोरियम और रमतेराम रोड स्थित शॉपिंग कांप्लेक्स का बकाया जमा नहीं कराने पर सात अगस्त को मैसर्स रैली इंफ्रा के विरुद्ध वसूली की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से आरसी जारी की गई है।