{"_id":"6a1b436d222425b07a0ad3db","slug":"complaint-to-cmo-in-case-of-death-of-newborn-ghaziabad-news-c-306-1-gha1004-122414-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: नवजात की मौत के मामले में सीएमओ से शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: नवजात की मौत के मामले में सीएमओ से शिकायत
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक परिवार ने नवजात की मौत के मामले में जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीडि़त परिवार का आरोप है कि प्रसव के दौरान बरती गई लापरवाही और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण नवजात की हालत लगातार बिगड़ती गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
गांव हैदरपुर निवासी अरविंद कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र दिया है। जिसमें उल्लेख किया है कि 17 मई को उनकी गर्भवती पत्नी दुर्वेश कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर गढ़ स्थित सीएचसी में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अगले दिन दोपहर में प्रसव कराया गया, लेकिन जन्म के बाद नवजात बच्ची की हालत गंभीर होने लगी। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में स्थिति संभालने के बजाय नवजात को हापुड़ रेफर कर दिया गया। अरविंद ने बताया कि हापुड़ से भी बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली ले जाया गया, जहां से बाद में मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। काफी प्रयासों और उपचार के बावजूद नवजात को बचाया नहीं जा सका। परिजनों का आरोप है कि यदि सीएचसी में प्रसव और उपचार के दौरान आवश्यक सावधानी बरती जाती और समय रहते उचित चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। पीडि़त ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. शशिभूषण सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव हैदरपुर निवासी अरविंद कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र दिया है। जिसमें उल्लेख किया है कि 17 मई को उनकी गर्भवती पत्नी दुर्वेश कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर गढ़ स्थित सीएचसी में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अगले दिन दोपहर में प्रसव कराया गया, लेकिन जन्म के बाद नवजात बच्ची की हालत गंभीर होने लगी। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में स्थिति संभालने के बजाय नवजात को हापुड़ रेफर कर दिया गया। अरविंद ने बताया कि हापुड़ से भी बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली ले जाया गया, जहां से बाद में मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। काफी प्रयासों और उपचार के बावजूद नवजात को बचाया नहीं जा सका। परिजनों का आरोप है कि यदि सीएचसी में प्रसव और उपचार के दौरान आवश्यक सावधानी बरती जाती और समय रहते उचित चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। पीडि़त ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. शशिभूषण सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विज्ञापन