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Ghaziabad News: टीकाकरण से अब भी दूर बच्चे, लक्ष्य का केवल 80 प्रतिशत पूरा
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गाजियाबाद। अंतरराष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष यूनिसेफ के प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग की नियमित टीकाकरण व्यवस्था के बावजूद जिले में लगभग 20 प्रतिशत बच्चे अभी भी टीकाकरण से वंचित हैं। यह स्थिति भविष्य में बच्चों के लिए गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर तक 56, 480 बच्चों को टीकाकरण से कवर करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सात महीने के दौरान केवल 80 प्रतिशत बच्चों को ही आवश्यक टीके लग पाए। आंकड़े बताते हैं कि बीसीजी, पेंटावेलेंट और अन्य जीवनरक्षक टीकों का पूरा लाभ हर पांच में से चार बच्चों तक ही पहुंच सका है।
यूनिसेफ के जिला समन्वयक मोहम्मद शादाब ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने के लिए यूनिसेफ की ओर से जिले में विशेष पहल की जा रही है। यूनिसेफ दिवस हर साल 11 दिसंबर को मनाया जाता है, इसके माध्यम से बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
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शादाब का कहना है कि जिले में पांच सदस्यों की टीम लगातार समुदायों में जाकर लोगों को टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक करती है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में टीकाकरण के दौरान तकनीकी और सामाजिक बाधाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की मदद से इन चुनौतियों को काफी हद तक दूर कर लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाता है।
सात गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों और महिलाओं को सात से अधिक गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वायरस, आईपीवी, मीजल्स, डीपीटी और विटामिन ए जैसी खुराक दी जाती है। ये टीके टिटनेस, पोलियो, टीबी, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, निमोनिया, डायरिया और खसरे जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है, इसलिए हर अभिभावक को अपने बच्चों के टीके समय पर लगवाने चाहिए।
कुपोषित बच्चों को मिल रहा आहार और उपचार
कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की भी व्यवस्था की गई है। सीएमएस ने बताया कि महिला अस्पताल में संचालित इस केंद्र में गंभीर कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल और पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है। पिछले आठ महीनों में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम की टीम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से 166 बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया गया। एक वर्ष से आठ वर्ष आयु वर्ग के इन बच्चों का इलाज सफलतापूर्वक पूरा होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। सीएमएस का कहना है कि टीकाकरण और पोषण दोनों ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी हैं। जिला प्रशासन और यूनिसेफ की टीमें लगातार इस दिशा में प्रयासरत हैं कि कोई भी बच्चा जीवनरक्षक टीकों और पोषण से वंचित न रह जाए।
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स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर तक 56, 480 बच्चों को टीकाकरण से कवर करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सात महीने के दौरान केवल 80 प्रतिशत बच्चों को ही आवश्यक टीके लग पाए। आंकड़े बताते हैं कि बीसीजी, पेंटावेलेंट और अन्य जीवनरक्षक टीकों का पूरा लाभ हर पांच में से चार बच्चों तक ही पहुंच सका है।
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यूनिसेफ के जिला समन्वयक मोहम्मद शादाब ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने के लिए यूनिसेफ की ओर से जिले में विशेष पहल की जा रही है। यूनिसेफ दिवस हर साल 11 दिसंबर को मनाया जाता है, इसके माध्यम से बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
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शादाब का कहना है कि जिले में पांच सदस्यों की टीम लगातार समुदायों में जाकर लोगों को टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक करती है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में टीकाकरण के दौरान तकनीकी और सामाजिक बाधाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की मदद से इन चुनौतियों को काफी हद तक दूर कर लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाता है।
सात गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों और महिलाओं को सात से अधिक गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वायरस, आईपीवी, मीजल्स, डीपीटी और विटामिन ए जैसी खुराक दी जाती है। ये टीके टिटनेस, पोलियो, टीबी, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, निमोनिया, डायरिया और खसरे जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है, इसलिए हर अभिभावक को अपने बच्चों के टीके समय पर लगवाने चाहिए।
कुपोषित बच्चों को मिल रहा आहार और उपचार
कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की भी व्यवस्था की गई है। सीएमएस ने बताया कि महिला अस्पताल में संचालित इस केंद्र में गंभीर कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल और पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है। पिछले आठ महीनों में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम की टीम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से 166 बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया गया। एक वर्ष से आठ वर्ष आयु वर्ग के इन बच्चों का इलाज सफलतापूर्वक पूरा होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। सीएमएस का कहना है कि टीकाकरण और पोषण दोनों ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी हैं। जिला प्रशासन और यूनिसेफ की टीमें लगातार इस दिशा में प्रयासरत हैं कि कोई भी बच्चा जीवनरक्षक टीकों और पोषण से वंचित न रह जाए।