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Ghaziabad News: एक साल में चार बार बदला ठिकाना, गिरफ्तारी के बाद परिवार ने भी छोड़ा घर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:34 AM IST
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Changed residence four times in a single year; following the arrest, even the family abandoned their home.
लोनी। सलीम करीब एक वर्ष से लोनी में घर बदल रहा था। बीते 12 महीनों में वह चार घर बदल चुका था। सभी घरों में उसने सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। पत्नी और बच्चों के पास भी कभी-कभार आता था। जानलेवा हमले के बाद चार दिनों तक घायल सलीम को घर में रखने वाले भाई ने भी 25 वर्षों से रिश्ता खत्म होने की बात कही है। गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में जगह-जगह सलीम की चर्चा हो रही है।
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सलीम गाजियाबाद के लोनी में वर्ष 2010 में बसा था। यहां उसने सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक के रूप में नई पहचान बनाई। पूर्व में उसका नाम सलीम खान था। लोनी में सलीम ने नसबंदी कॉलोनी में महिलाओं के कपड़ों व अन्य सामानों की दुकान खोली। साथ ही जैकेट के आयात-निर्यात का कारोबार शुरू किया।
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इसी दौरान उसने ‘सलीम वास्तिक एक्स मुस्लिम’ नाम से यूट्यूब चैनल भी शुरू किया। यूट्यूब चैनल पर सलीम धार्मिक मुद्दों और रूढ़िवादी प्रथाओं पर विचार रखता था। उसने कट्टरता व कुरीतियों की आलोचना करने वाले कई वीडियो और पॉडकास्ट साझा किए थे। पहलगाम हमले का विरोध और ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन को लेकर भी वह चर्चा में रहा।
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इसी क्रम में 27 फरवरी 2026 को लोनी स्थित उसके कार्यालय पर जीशान और गुलफाम नाम के दो हमलावरों ने उस पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में उसकी गर्दन और पेट पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
एक मार्च को यूपी एसटीएफ और गाजियाबाद पुलिस ने मुख्य आरोपी जीशान को लोनी क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मार गिराया, जबकि तीन मार्च को दूसरे आरोपी गुलफाम को इंदिरापुरम के वसुंधरा इलाके में मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया गया। इसके बाद सलीम को सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी। हाल ही में उसको अस्पताल से छुट्टी मिली थी।
एक वर्ष पहले हो गया था पत्नी से अलग
एक वर्ष पहले तक सलीम डाबर तालाब क्षेत्र स्थित नसबंदी कॉलोनी में पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। इसके बाद वह पत्नी से अलग होकर निठोरा गांव मार्ग स्थित अली गार्डन कॉलोनी में 50 वर्ग गज भूखंड पर कार्यालय बनाकर रहने लगा। इसी कार्यालय से वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डालता था। फरवरी में इसी कार्यालय में उस पर हमला हुआ था। उसकी पत्नी अफसाना और बच्चे अशोक विहार पुराना चेकपोस्ट के पास स्थित मकान में रह रहे थे। सलीम ने यहां भी 50 वर्ग गज जमीन खरीदकर मकान बनाया था। 25 मार्च को दिल्ली के निजी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सलीम अपने भाई जहीर के अशोक विहार कॉलोनी स्थित घर गया। वहां चार दिन तक रुकने के बाद पुराना चेकपोस्ट स्थित अपने घर आ गया था। इस मकान में उसका साथी अब्दुल्ला निवासी खुर्जा (बुलंदशहर), अहसान निवासी मुस्तफाबाद भी रह रहे थे। लखनऊ निवासी रिजवाना उससे मिलने आती थी। सलीम की गिरफ्तारी के बाद मकान पर ताला लग गया है। सलीम की पत्नी और बच्चे कहां गए, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
जिस मां ने जमानत कराई, उसे अंतिम समय में देखने तक नहीं गया
भाई जहीर ने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले हत्या के मामले में सलीम की गिरफ्तारी के बाद ही उससे रिश्ता खत्म कर लिया था। उस समय मां जहीरन ने उसकी जमानत कराई थी। इसके बाद उसने परिवार से संपर्क नहीं किया। हत्याकांड के करीब 12 साल बाद मां की मौत होने पर भी सलीम घर नहीं गया। जहीर ने बताया कि सलीम की पत्नी अफसाना खुद काम करके बच्चों का लालन-पालन कर रही है। वह भी हत्याकांड के बाद मुजफ्फरनगर स्थित लाख गांव अपने मायके चली गई थी। मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद वह मायके वालों के साथ लोनी आकर रहने लगी। इसके बाद सलीम भी लोनी आ गया।
चार दिन तक जहीर के घर रहा सलीम
जहीर ने सलीम के घर रुकने की बात से इन्कार किया है। हालांकि, जहीर के पड़ोसी संजय ने बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सलीम करीब चार दिनों तक यहीं रुका था। उस दौरान गली में पुलिस फोर्स तैनात रहती थी। पुलिस ने भी सलीम के जहीर के घर रुकने की बात कही है।
तमाम लोग पहुंचे थे हाल जानने
सलीम पर हमला हुआ तो उसे पुलिस सुरक्षा के साथ खूब सहानुभूति मिली थी। लोनी के लोगों ने उसकी सलामती की दुआ मांगी थी। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर, हिंदूवादी संगठन के नेता पिंकी चौधरी समेत कई बड़े लोग उसका हाल जानने पहुंचे थे।

मार्शल आर्ट शिक्षक से अपराधी बना

मूल रूप से शामली के नानूपुरा निवासी सलीम खान ने मुजफ्फरनगर में संचालित शाओलिन कुंग फू केंद्र से मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लिया था। रोजगार की तलाश में वह परिवार के साथ दिल्ली गया और दरियागंज स्थित एक निजी स्कूल में मार्शल आर्ट प्रशिक्षक के रूप में कार्य करने लगा। बाद में उसने मुस्तफाबाद से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में जैकेट आपूर्ति का कारोबार शुरू किया। इसी दौरान उसकी मुलाकात अनिल कुमार से हुई, जिसने उसे अपहरण कर फिरौती मांगने की साजिश में शामिल किया। 20 जनवरी 1995 को सलीम ने दिल्ली के गोकुलपुरी निवासी 13 वर्षीय संदीप बंसल का अपहरण किया। आरोप है कि इसके बाद उसके परिजनों से 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। अनिल कुमार ने 4 फरवरी 1995 को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि सलीम को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वर्ष 1997 में अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 2000 में दिल्ली उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया।
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