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Ghaziabad News: दिल्ली में कैमरे पास, गाजियाबाद में एप फेल
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गाजियाबाद। पड़ोसी राज्य दिल्ली में एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों के जरिए वाहनों की पीयूसीसी वैधता जांचने की व्यवस्था जहां एक अक्तूबर से सुचारू रूप से लागू हो गई, वहीं गाजियाबाद में यह योजना लगातार दूसरे दिन भी पूरी तरह पस्त नजर आई। जिले में लागू किए गए नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम के तहत 125 पंपों पर तैनात 1300 कर्मचारियों के मोबाइल फोन में डाउनलोड कराया गया सरकारी विशेष एप लगातार दूसरे दिन भी ऐन मौके पर धोखा दे गया। शुक्रवार सुबह करीब एक घंटे तक चले तकनीकी ड्रामे और पंपों पर मची भारी अव्यवस्था के बाद अंततः कर्मचारियों ने बिना किसी जांच के ही वाहनों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी भरना शुरू कर दिया।
तकनीकी खामी से थमे पहिए, कतारों में उलझे लोग : आपूर्ति विभाग ने जिले के करीब सवा सौ पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर तैनात कर्मचारियों के मोबाइल फोन में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की जांच के लिए एक विशेष मोबाइल एप इंस्टॉल कराया था। बृहस्पतिवार को पहले ही दिन यह एप धड़ाम हो गया था और शुक्रवार को भी स्थिति में रत्ती भर सुधार नहीं देखा गया। सुबह के वक्त जब पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगने लगीं और सर्वर डाउन होने से एप ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया तो पंप कर्मियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई। वाहन चालकों से तीखी बहस और बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए कर्मचारियों ने विभागीय आदेशों को दरकिनार कर बिना जांच के ही ईंधन देना शुरू कर दिया।
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-विभागीय दलील और जमीनी हकीकत : इस पूरी अव्यवस्था पर जिला आपूर्ति अधिकारी अमित तिवारी का कहना है कि एप में आ रही तकनीकी दिक्कतों के संबंध में आईटी और तकनीकी टीम से तत्काल संपर्क साधा गया है। जल्द ही इस समस्या को दुरुस्त कर लिया जाएगा। हालांकि, दो दिनों से जारी इस तकनीकी नाकामी ने विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। दिल्ली की स्वचालित कैमरे वाली प्रणाली के मुकाबले गाजियाबाद का यह एप आधारित मैनुअल सिस्टम पहले ही कदम पर पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।-
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कैमरों पर छिड़ी जंग, हाईकोर्ट पहुंची पंप एसोसिएशन
योजना को स्थाई रूप से चलाने के लिए आपूर्ति विभाग अब पंप स्वामियों पर ही एएनपीआर कैमरे लगाने का दबाव बना रहा है। दूसरी ओर, पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने अपने खर्चे पर कैमरे लगाने से साफ शब्दों में इन्कार कर दिया है। स्वामियों का कहना है कि यह आर्थिक बोझ उन पर डालना तर्कसंगत नहीं है। इस खींचतान के बीच एसोसिएशन ने मामले में हाईकोर्ट का रुख किया है, जहां फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर सुनवाई चल रही है। अदालत के फैसले से पहले इस योजना का परवान चढ़ना मुश्किल दिख रहा है।