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मुरादनगर: संदिग्ध परिस्थिति में किशोर की मौत, माता-पिता और बहन की हालत गंभीर, रात में खाना खाकर सोया था पूरा परिवार
Thu, 14 Jan 2021 04:43 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 14 Jan 2021 04:43 PM IST
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अस्पताल में पुलिस को बयान देते रामपाल
- फोटो : अमर उजाला
मुरादनगर थाना क्षेत्र के उखलारसी में फिर एक बड़ी घटना सामने आई है। 12 वर्षीय कुनाल पुत्र रामपाल की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। गुरुवार की सुबह कुनाल अपने कमरे में मृत मिला। वहीं मृतक के पिता रामपाल, उसकी मां अनिता और बहन शगुन की हालत गंभीर है।
एसपी ग्रामीण डॉ. इरज राजा ने बताया कि रामपाल के मुताबिक बुधवार रात वह होटल से साग लेकर आया था। उसे खाकर रामपाल, बेटी और पत्नी के साथ एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो गया। कुनाल दूसरे कमरे में सोया था। पुलिस साग से फूड पॉइजनिंग, अंगीठी से जहरीली गैस और जहर खाने के बिंदु पर जांच कर रही है।
वहीं कुछ दिन पहले मुरादनगर के बंबा रोड श्मशान घाट पर गलियारे की छत गिरने से 24 लोगों की मौत हो गई थी। नीचे दबे कई लोगों की सांसें अटकी रहीं। किसी का पूरा शरीर मलबे में दबा था तो किसी के पैर और हाथ। जेसीबी ने मलबे के बड़े टुकड़े हटाने शुरू किए तो नीचे दबे कई लोगों की आंखों में मौत का भयावह मंजर तैर गया। दहशत से दिल कांप उठा।
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लगा अगर जरा भी चूक हो गई तो भारी पत्थर पूरे जिस्म को कुलचकर रख देगा। मलबे के नीचे से निकले कई घायल यह आपबीती बताते हुए सिहर उठते हैं। हादसे में घायल हुए कई लोग आपबीती बताते हुए कहते हैं जाको राखे सांइया, मार सके न कोय। मौत से एक नहीं दो-दो बार सामना हुआ पर जिंदगी बाकी थी सो बच गए।
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एसपी ग्रामीण डॉ. इरज राजा ने बताया कि रामपाल के मुताबिक बुधवार रात वह होटल से साग लेकर आया था। उसे खाकर रामपाल, बेटी और पत्नी के साथ एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो गया। कुनाल दूसरे कमरे में सोया था। पुलिस साग से फूड पॉइजनिंग, अंगीठी से जहरीली गैस और जहर खाने के बिंदु पर जांच कर रही है।
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वहीं कुछ दिन पहले मुरादनगर के बंबा रोड श्मशान घाट पर गलियारे की छत गिरने से 24 लोगों की मौत हो गई थी। नीचे दबे कई लोगों की सांसें अटकी रहीं। किसी का पूरा शरीर मलबे में दबा था तो किसी के पैर और हाथ। जेसीबी ने मलबे के बड़े टुकड़े हटाने शुरू किए तो नीचे दबे कई लोगों की आंखों में मौत का भयावह मंजर तैर गया। दहशत से दिल कांप उठा।
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लगा अगर जरा भी चूक हो गई तो भारी पत्थर पूरे जिस्म को कुलचकर रख देगा। मलबे के नीचे से निकले कई घायल यह आपबीती बताते हुए सिहर उठते हैं। हादसे में घायल हुए कई लोग आपबीती बताते हुए कहते हैं जाको राखे सांइया, मार सके न कोय। मौत से एक नहीं दो-दो बार सामना हुआ पर जिंदगी बाकी थी सो बच गए।