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जिसने किया काज, जनता के दिल पर उसका राज

Mon, 16 Jan 2017 12:55 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Mon, 16 Jan 2017 12:55 AM IST
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Be the hinge, the rule of the people at heart
चुनाव - फोटो : अमर उजाला
वीआईपी सीट मानी जाने वाली गाजियाबाद विधानसभा सीट का मिजाज कुछ अलग रहा है। यहां जिन नेताओं ने जनता के लिए काम काज किया, लोगों के दिल पर भी उन्हीं ने राज किया। शायद यही वजह रही कि इस सीट पर कई ऐसे विधायक रहे हैं, जिन्हें लोगों ने एक बार नहीं दो या तीन बार चुनकर विधानसभा में भेजा।
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पहले यह गाजियाबाद विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जाती थी। गाजियाबाद को सबसे पहला विधायक भी कांग्रेस से ही मिला। सरदार तेजा सिंह 1957 में पहली बार विधायक चुने गए और 1967 तक लगातार दो बार विधायक रहे।
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1957 से 2016 तक के राजनीतिक सफर में गाजियाबाद विधानसभा सीट सबसे ज्यादा 7 बार कांग्रेस की झोली में रही। तेजा सिंह के बाद प्यारे लाल शर्मा को गाजियाबाद के लोगों ने उनके जनता से जुड़ाव और कामकाज को देखते हुए लगातार तीन बार विधायक चुना।
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उन्होंने गरीबों के लिए कई कालोनियां भी बसाईं। वह तीनों बार अलग-अलग पार्टी से चुनाव जीते। 1991 से यह सीट अधिकांश बीजेपी के पास रही। बालेश्वर त्यागी को गाजियाबाद के लोगों ने उनके कामकाज और मिलनसार व्यवहार के चलते लगातार तीन बार जिताकर विधायक बनाया।

2002 में वैश्य समाज की एकजुटता की वजह से नगर पालिका के चेयरमैन रहे कांग्रेसी नेता सुरेंद्र प्रकाश गोयल विधायक चुने गए। 2004 में वह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए। यूपी चुनाव में गाजियाबाद विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की और महज ढाई साल बाद फिर भाजपा पर पहुंच गई।

2007 में यह सीट भाजपा पर रही और 2012 में बसपा ने इस सीट को जीतकर इतिहास कायम किया। बसपा से सुरेश बंसल को भी उनके काम की वजह से जनता ने अपना सरताज बनाया।

2007 में सुरेश बंसल ने विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद प्रदेश में सत्ता के बल पर अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराए। इसी के चलते 2012 में जीत हासिल की। एक बार फिर सुरेश बंसल अपने काम काज के दम पर चुनाव मैदान में हैं।
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1957 से 2012 तक राजनीतिक सफर 

वर्ष                 विजेता                                        उपविजेता
1957        तेजा सिंह (कांग्रेस)            पी.चंद्रा    (बीेजेएस)
1962        तेजा सिंह (कांग्रेस)            ईश्वर दयाल (जेएस)
1967        प्यारे लाल (रिपब्लिक पार्टी)        आर सिंह     (बीजेएस)
1969        प्यारे लाल (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी)    आफताब अली (कांग्रेस)
1974        प्यारे लाल (कांग्रेस)            बलदेव राज शर्मा (बीजेएस)
1977        राजेंद्र       (जनता पार्टी)            प्यारे लाल
1980        सुरेंद्र कुमार मुन्नी     (कांग्रेस यू)        सतीश चंद शर्मा (कांग्रेस आई)    
1985        केके शर्मा    (कांग्रेस)        दिनेश चंद गर्ग (भाजपा)
1989        सुरेंद्र कुमार मुन्नी (कांग्रेस)        बालेश्वर त्यागी (भाजपा)
1991        बालेश्वर त्यागी    (भाजपा)        अनूप सिंह    (जनता दल)
1993        बालेश्वर त्यागी     (भाजपा)        अनूप सिंह    (जनता दल)
1996        बालेश्वर त्यागी     (भाजपा)        जितेंद्र यादव    (सपा)

2002        सुरेंद्र प्रकाश गोयल (कांग्रेस)        बालेश्व त्यागी (भाजपा)
2004        सुरेंद्र कुमार मुन्नी (सपा)            सतीश त्यागी (कांग्रेस)
2007        सुनील कुमार शर्मा (भाजपा)        सुरेश बंसल (बसपा)
2012         सुरेश बंसल    (बसपा)        अतुल गर्ग (भाजपा)

06 बार कांग्रेस का रहा गाजियाबाद सीट पर कब्जा
04 बार चुने गए भाजपा के विधायक 
01-01 बार बसपा और सपा के खाते में रही सीट

राम मंदिर की लहर से भाजपा के पास गई सीट
वर्ष 1989 से ही राम मंदिर आंदोलन शुरू हो चुका था। ऐसे में भाजपा ने राजनीति में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी थी। यही वजह रही कि राम मंदिर की लहर के दौर में सबसे पहले 1991 में भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की। इससे पहले भाजपा और जनसंघ के प्रत्याशी यहां कई बार हार का सामना कर चुके थे।
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