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Ghaziabad News: 2001 में बने अवैध चबूतरे पर 2021 में बन गई मजार, अब किया ध्वस्त
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ट्रॉनिका सिटी में अवैध मजार को तोड़ती प्रशासन की टीम। संवाद
गाजियाबाद। ट्रोनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में सरकारी जमीन पर करीब 25 वर्ष पहले हुआ अतिक्रमण धीरे-धीरे चबूतरे से मजार तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की जमीन पर किए गए इस अवैध निर्माण को अब जाकर रविवार को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने ध्वस्त किया है।
कार्रवाई के दौरान एडीएम सिटी विवेक कश्यप, डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी सहित यूपीसीडा के अधिकारी, सात थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी मौके पर मौजूद रही। लगभग आठ घंटे की कार्रवाई के बाद निर्माण को हटाया गया।
प्रशासन के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र के सी-8 प्लॉट स्थित करीब 70 लाख रुपये मूल्य की भूमि पर वर्ष 2001 में अतिक्रमण किया गया था। यहां सबसे पहले एक चबूतरे का निर्माण हुआ, जो बाद में विस्तार पाकर मजार के रूप में विकसित हुआ।
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इस संबंध में पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए थे। एडीएम सिटी ने बताया कि 26 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। मजार पक्ष ने जवाब तो दिया, लेकिन जमीन पर स्वामित्व संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि मजार की देखरेख करने वाला महबूब फिलहाल फरार है।
गुंबद तोड़ने के लिए मंगानी पड़ी पोकलेन
अवैध निर्माण तोड़ने के दौरान टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आठ घंटे बाद रात करीब नौ बजे पूरी हो पाई। मजार के अन्य हिस्सों को जेसीबी की मदद से तोड़ दिया गया, लेकिन गुंबद तोड़ते समय उसका एक हिस्सा जेसीबी पर गिर गया। हालांकि, चालक बाल-बाल बच गया। इसके बाद प्रशासन ने मौके पर पोकलेन मशीन मंगवाई, जिससे गुंबद को ध्वस्त किया गया। डीसीपी देहात ने बताया कि कार्रवाई से पहले घटनास्थल के आसपास का क्षेत्र पहले ही खाली करा लिया गया था, इसलिए किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। निर्माण काफी मजबूत था, इसलिए उसे तोड़ने में अधिक समय लगा।
650 पुलिसकर्मी और दो कंपनी पीएसी रही तैनात
कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। तीन एसीपी के अलावा सात थानों के 650 पुलिसकर्मी और पीएसी की दो कंपनियां मौके पर मौजूद रहीं। डीसीपी देहात ने बताया कि कार्रवाई पूरी होने के बाद भी एहतियातन पुलिस बल की तैनाती जारी रहेगी। साथ ही सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। कार्रवाई के दौरान घटनास्थल के पास भीड़ एकत्र होने लगी थी, जिसे पुलिस ने दूर किया।
कोरोनाकाल में तैयार हुई मजार
ट्रांस सिग्नेचर सिटी परियोजना के तहत यूपीसीडा ने इस भूमि का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1996 में कब्जा दिए जाने के समय यह भूमि किसी मजार के नाम पर दर्ज नहीं थी। बताया जाता है कि वर्ष 2001 में सबसे पहले यहां एक चबूतरा बनाया गया। तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही के चलते कोरोनाकाल में यहां गुंबद बनाकर मजार तैयार कर दी गई।
वर्ष 2017 में अतिक्रमण हटाने के अनुरोध के बावजूद निर्माण
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में अतिक्रमण हटाने की संस्तुति की थी। इसके बाद जनवरी 2018 में एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स ने भी जिलाधिकारी से अवैध निर्माण हटाने की सिफारिश की थी। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण को आगे बढ़ने से रोकने में सिस्टम इतना देर तक निष्क्रिय क्यों रहा?
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कार्रवाई के दौरान एडीएम सिटी विवेक कश्यप, डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी सहित यूपीसीडा के अधिकारी, सात थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी मौके पर मौजूद रही। लगभग आठ घंटे की कार्रवाई के बाद निर्माण को हटाया गया।
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प्रशासन के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र के सी-8 प्लॉट स्थित करीब 70 लाख रुपये मूल्य की भूमि पर वर्ष 2001 में अतिक्रमण किया गया था। यहां सबसे पहले एक चबूतरे का निर्माण हुआ, जो बाद में विस्तार पाकर मजार के रूप में विकसित हुआ।
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इस संबंध में पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए थे। एडीएम सिटी ने बताया कि 26 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। मजार पक्ष ने जवाब तो दिया, लेकिन जमीन पर स्वामित्व संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि मजार की देखरेख करने वाला महबूब फिलहाल फरार है।
गुंबद तोड़ने के लिए मंगानी पड़ी पोकलेन
अवैध निर्माण तोड़ने के दौरान टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आठ घंटे बाद रात करीब नौ बजे पूरी हो पाई। मजार के अन्य हिस्सों को जेसीबी की मदद से तोड़ दिया गया, लेकिन गुंबद तोड़ते समय उसका एक हिस्सा जेसीबी पर गिर गया। हालांकि, चालक बाल-बाल बच गया। इसके बाद प्रशासन ने मौके पर पोकलेन मशीन मंगवाई, जिससे गुंबद को ध्वस्त किया गया। डीसीपी देहात ने बताया कि कार्रवाई से पहले घटनास्थल के आसपास का क्षेत्र पहले ही खाली करा लिया गया था, इसलिए किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। निर्माण काफी मजबूत था, इसलिए उसे तोड़ने में अधिक समय लगा।
650 पुलिसकर्मी और दो कंपनी पीएसी रही तैनात
कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। तीन एसीपी के अलावा सात थानों के 650 पुलिसकर्मी और पीएसी की दो कंपनियां मौके पर मौजूद रहीं। डीसीपी देहात ने बताया कि कार्रवाई पूरी होने के बाद भी एहतियातन पुलिस बल की तैनाती जारी रहेगी। साथ ही सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। कार्रवाई के दौरान घटनास्थल के पास भीड़ एकत्र होने लगी थी, जिसे पुलिस ने दूर किया।
कोरोनाकाल में तैयार हुई मजार
ट्रांस सिग्नेचर सिटी परियोजना के तहत यूपीसीडा ने इस भूमि का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1996 में कब्जा दिए जाने के समय यह भूमि किसी मजार के नाम पर दर्ज नहीं थी। बताया जाता है कि वर्ष 2001 में सबसे पहले यहां एक चबूतरा बनाया गया। तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही के चलते कोरोनाकाल में यहां गुंबद बनाकर मजार तैयार कर दी गई।
वर्ष 2017 में अतिक्रमण हटाने के अनुरोध के बावजूद निर्माण
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में अतिक्रमण हटाने की संस्तुति की थी। इसके बाद जनवरी 2018 में एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स ने भी जिलाधिकारी से अवैध निर्माण हटाने की सिफारिश की थी। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण को आगे बढ़ने से रोकने में सिस्टम इतना देर तक निष्क्रिय क्यों रहा?