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Ghaziabad News: शराबियों और कुपोषितों को इंजेक्शन लगाकर होगी टीबी की जांच
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गाजियाबाद। संदिग्ध टीबी मरीजों की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर अब सीवाई-टीबी टेस्ट किया जाएगा। यह जांच शराब का सेवन करने वाले, मधुमेह के मरीज, स्वास्थ्य कर्मी, कुपोषित लोगों की होगी। जांच की शुरुआत जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी। इसकी शुरुआत गाजियाबाद के साथ ही 45 जिलों में होगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. अनिल यादव ने बताया कि सीवाई-टीबी टेस्ट की शुरुआत शराब का सेवन करने वाले, मधुमेह, डायलिसिस लेने वाले या किसी अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित उच्च जोखिम वाले संभावित मरीजों से की जाएगी। विभाग को डोज मिलने के बाद टेस्ट के लिए शासन से निर्देश मिलने का इंतजार था। अब शासन से जांच शुरू करने का निर्देश मिल गया है। डीटीओ ने बताया कि सीवाई-टीबी टेस्ट के लिए उन्हें व एक अन्य डॉक्टर को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विभाग को शासन से सात हजार डोज भी प्राप्त हो चुकी है। अब जल्द ही पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद जांच शुरू कर दी जाएगी।
इस तरह से होगी जांच
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि जांच करने के लिए स्वास्थ्य कर्मी संदिग्ध टीबी मरीजों के हाथ में 0.1 एमएल की डोज देंगे। 48 से 72 घंटे तक उसकी रीडिंग की जाएगी। इससे अगर पांच एमएम की गांठ बनती है तो उस व्यक्ति में टीबी के लक्षण माने जाएंगे। उन्हें बढ़ने से राेकने के लिए तीन माह तक टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाएगी, जिससे कि टीबी होने से पहले ही रोका जा सके। यह दवाई 18 वर्ष से कम उम्र और एचआईवी मरीजों को नहीं दी जाएगी।
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जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. अनिल यादव ने बताया कि सीवाई-टीबी टेस्ट की शुरुआत शराब का सेवन करने वाले, मधुमेह, डायलिसिस लेने वाले या किसी अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित उच्च जोखिम वाले संभावित मरीजों से की जाएगी। विभाग को डोज मिलने के बाद टेस्ट के लिए शासन से निर्देश मिलने का इंतजार था। अब शासन से जांच शुरू करने का निर्देश मिल गया है। डीटीओ ने बताया कि सीवाई-टीबी टेस्ट के लिए उन्हें व एक अन्य डॉक्टर को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विभाग को शासन से सात हजार डोज भी प्राप्त हो चुकी है। अब जल्द ही पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद जांच शुरू कर दी जाएगी।
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इस तरह से होगी जांच
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि जांच करने के लिए स्वास्थ्य कर्मी संदिग्ध टीबी मरीजों के हाथ में 0.1 एमएल की डोज देंगे। 48 से 72 घंटे तक उसकी रीडिंग की जाएगी। इससे अगर पांच एमएम की गांठ बनती है तो उस व्यक्ति में टीबी के लक्षण माने जाएंगे। उन्हें बढ़ने से राेकने के लिए तीन माह तक टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाएगी, जिससे कि टीबी होने से पहले ही रोका जा सके। यह दवाई 18 वर्ष से कम उम्र और एचआईवी मरीजों को नहीं दी जाएगी।
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