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नया बस अड्डा मेट्रो निर्माण में 77 करोड़ का अड़ंगा
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:03 AM IST
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दिल्ली मेट्रो
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीडीए और डीएमआरसी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से बिना एनओसी लिए ही नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया। इसके लिए डीएमआरसी को लाइसेंसिंग फीस के तौर पर करीब 77 करोड़ रुपया देना था।
वर्ष 2014 से अब तक मेट्रो का करीब 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन यह रकम जमा नहीं कराई गई। अब पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन ने डीएमआरसी को पत्र भेजकर बिना एनओसी किए जा रहे काम को बंद कर हाईवे पर लगाए गए बेरिकेडिंग को हटाने और क्षतिग्रस्त सड़कों को रिपेयर कराने को कहा है।
ऐसे में अब नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट में लाइसेंसिंग फीस के 77 करोड़ का अड़ंगा लग सकता है। दरअसल, यूपी गेट से मेरठ तिराहे तक मार्ग एनएच-58 का ही हिस्सा है।
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इसे एनएच-58 ई के नाम से जाना जाता है। इसका रखरखाव पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन करती है। मोहननगर से मेरठ तिराहे तक इस मार्ग की करीब 1.65 लाख वर्ग मीटर जमीन पर मेट्रो के लिए पिलर्स बनाए गए हैं।
डीएमआरसी ने इसके लिए न तो रकम जमा कराई और न एनओसी ली और वर्ष 2014 में मेट्रो निर्माण शुरू कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन के अधिशासी अभियंता एपी सिंह की ओर से डीएमआरसी को पत्र भेजकर लाइसेंसिंग फीस की रकम मांगी है।
उन्होंने कहा है कि बिना अनुमति के मेट्रो निर्माण शुरू कराकर एनएच-58 ई के बीच में बेरिकेडिंग करा दी गई है। हाईवे को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। मंत्रालय की एनओसी के बिना मेट्रो निर्माण न किया जाए और सड़क पर लगाई गई बेरिकेडिंग को हटाया जाए। उन्होंने मेट्रो पिलर के लिए क्षतिग्रस्त किए गए एनएच-58ई की तत्काल रिपेयरिंग को कहा है।
लाइसेंसिंग फीस जमा कराने और एनओसी लेने का काम जीडीए का है। डीएमआरसी केवल जीडीए की कार्यदायी संस्था है। इसमें डीएमआरसी को पैसा नहीं देना है। - अनुज दयाल, पीआरओ, डीएमआरसी
इस संबंध में जानकारी कराकर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। - एससी द्विवेदी, चीफ इंजीनियर, जीडीए
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वर्ष 2014 से अब तक मेट्रो का करीब 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन यह रकम जमा नहीं कराई गई। अब पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन ने डीएमआरसी को पत्र भेजकर बिना एनओसी किए जा रहे काम को बंद कर हाईवे पर लगाए गए बेरिकेडिंग को हटाने और क्षतिग्रस्त सड़कों को रिपेयर कराने को कहा है।
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ऐसे में अब नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट में लाइसेंसिंग फीस के 77 करोड़ का अड़ंगा लग सकता है। दरअसल, यूपी गेट से मेरठ तिराहे तक मार्ग एनएच-58 का ही हिस्सा है।
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इसे एनएच-58 ई के नाम से जाना जाता है। इसका रखरखाव पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन करती है। मोहननगर से मेरठ तिराहे तक इस मार्ग की करीब 1.65 लाख वर्ग मीटर जमीन पर मेट्रो के लिए पिलर्स बनाए गए हैं।
डीएमआरसी ने इसके लिए न तो रकम जमा कराई और न एनओसी ली और वर्ष 2014 में मेट्रो निर्माण शुरू कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी की एनएच डिवीजन के अधिशासी अभियंता एपी सिंह की ओर से डीएमआरसी को पत्र भेजकर लाइसेंसिंग फीस की रकम मांगी है।
उन्होंने कहा है कि बिना अनुमति के मेट्रो निर्माण शुरू कराकर एनएच-58 ई के बीच में बेरिकेडिंग करा दी गई है। हाईवे को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। मंत्रालय की एनओसी के बिना मेट्रो निर्माण न किया जाए और सड़क पर लगाई गई बेरिकेडिंग को हटाया जाए। उन्होंने मेट्रो पिलर के लिए क्षतिग्रस्त किए गए एनएच-58ई की तत्काल रिपेयरिंग को कहा है।
लाइसेंसिंग फीस जमा कराने और एनओसी लेने का काम जीडीए का है। डीएमआरसी केवल जीडीए की कार्यदायी संस्था है। इसमें डीएमआरसी को पैसा नहीं देना है। - अनुज दयाल, पीआरओ, डीएमआरसी
इस संबंध में जानकारी कराकर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। - एससी द्विवेदी, चीफ इंजीनियर, जीडीए