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Ghaziabad News: चेक बाउंस मामले में 70 वर्षीय दोषी को अदालत से राहत, छह माह की सजा रद्द
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गाजियाबाद। चेक बाउंस के करीब 15 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 70 वर्षीय दोषी को राहत दी है। अदालत ने उसकी उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए निचली अदालत से मिली छह माह के साधारण कारावास की सजा रद्द कर दी। हालांकि दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए 2.25 लाख रुपये का जुर्माना कायम रखा है। अदालत ने पूरी जुर्माना राशि परिवादी आबिद अली को क्षतिपूर्ति के तौर पर देने का आदेश दिया है। निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को छह माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला मसूरी निवासी निर्माण सामग्री कारोबारी आबिद अली की ओर से नोएडा निवासी मूलचंद के खिलाफ दर्ज कराए गए परिवाद से जुड़ा है। परिवादी के अनुसार उन्होंने मूलचंद की साइटों पर रोड़ी की आपूर्ति की थी। बकाया भुगतान के लिए मूलचंद ने 26 मार्च 2011 को दो लाख रुपये का चेक जारी किया था। जून 2011 में बैंक में चेक जमा करने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर आबिद अली ने अदालत की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने चार जनवरी 2019 को मूलचंद को दोषी ठहराया था। अदालत ने छह माह के साधारण कारावास के साथ 2.25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसमें से 2.20 लाख रुपये परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश था।
इस फैसले के खिलाफ मूलचंद ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मूलचंद 70 वर्ष के हैं और पीलिया समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उनकी तीन बार सर्जरी हो चुकी है और वह बिना सहायता के चलने फिरने में भी असमर्थ हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और अभिलेखों का परीक्षण किया। इसमें चेक पर किए गए हस्ताक्षर मूलचंद के ही पाए गए।
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मामला मसूरी निवासी निर्माण सामग्री कारोबारी आबिद अली की ओर से नोएडा निवासी मूलचंद के खिलाफ दर्ज कराए गए परिवाद से जुड़ा है। परिवादी के अनुसार उन्होंने मूलचंद की साइटों पर रोड़ी की आपूर्ति की थी। बकाया भुगतान के लिए मूलचंद ने 26 मार्च 2011 को दो लाख रुपये का चेक जारी किया था। जून 2011 में बैंक में चेक जमा करने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर आबिद अली ने अदालत की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने चार जनवरी 2019 को मूलचंद को दोषी ठहराया था। अदालत ने छह माह के साधारण कारावास के साथ 2.25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसमें से 2.20 लाख रुपये परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश था।
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इस फैसले के खिलाफ मूलचंद ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मूलचंद 70 वर्ष के हैं और पीलिया समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उनकी तीन बार सर्जरी हो चुकी है और वह बिना सहायता के चलने फिरने में भी असमर्थ हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और अभिलेखों का परीक्षण किया। इसमें चेक पर किए गए हस्ताक्षर मूलचंद के ही पाए गए।
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