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गाजियाबाद: एक साल में 35 प्रसूताओं ने तोड़ा दम, कारण पर जवाब-तलब, स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है उत्तर

Thu, 04 Mar 2021 02:20 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 04 Mar 2021 02:20 PM IST
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35 pregnant woman dies within one year health department has no answer
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
इलाज की बढ़ती सुविधाओं के बीच गर्भवती महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत के कारण का स्वास्थ्य विभाग के पास जवाब नहीं है। एक साल में प्रसव के दौरान 31 महिलाओं की जान जा चुकी है। प्रदेश के औसत आंकड़े से यह कम जरूर है, लेकिन चिंता की बात है। 15 की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। इस पर शासन ने नाराजगी जाहिर करते हुए रिपोर्ट मांगी है।
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प्रदेश में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मौत की संख्या प्रति एक लाख पर 155 है। देश में मौत यह एक लाख पर 450 है। जिले में यह आंकड़ा काफी कम है, लेकिन दिल्ली नजदीक होने और अस्पतालों के बडे़ सैटअप के हिसाब से देखा जाए तो चिंता की बात है। गाजियाबाद जिले एक साल में करीब 98 हजार प्रसव हुए हैं। 
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इनमें 35 महिलाओं की जान गई है। जिले में दो बड़े सरकारी अस्पताल में प्रसव की सुविधा के अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी प्रसव की सुविधा है। इनके अलावा 125 नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पताल हैं। अस्पताल के जानकारों का कहना है कि आंकड़े में वही मौत दर्ज की जाती हैं, जो अस्पताल में होती हैं। 
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अस्पताल से बाहर और प्राइवेट में होने वाली मौत का आंकड़ा दर्ज ही नहीं किया जाता। स्वास्थ्य विभाग के पूर्व सांख्कीय अधिकारी राजकुमार सिंह का कहना है कि आंकडे़ इसलिए अपडेट नहीं किए जाते, क्योंकि जवाब देना पड़ेगा। जवाब तलबी से बचने के लिए ऐसा किया जाता है।

शासन ने तलब की है रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाएं के मिशन निदेशक ने सीएमओ को भेजे पत्र में कहा है कि प्रदेश में मातृ मृत्यु सर्विलांस समीक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमातृ मृत्यु के कारण पता करके उन्हें दूर किया जाए। गाजियाबाद में 35 मौत हुई है, इसमें 13 मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। मृत्यु के अलग-अलग कारण और पोर्टल पर अपडेट में अंतर है। 

तमाम सुविधाओं का दावा किए जाने के बावजूद जिले में अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर रात में प्रसव नहीं होते हैं। वहीं महिला अस्पताल में रात में एनेस्थेटिस्ट न होने का बहाना बनाकर सिजेरियन वाली महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

समय से एंबुलेंस न पहुंचना भी कारण
शासन के निर्देश पर जिले में 102 एंबुलेंस एवं एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) संचालित है, लेकिन कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस भी देर से पहुंचती है। इस कारण से भी प्रसूता अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं, इन मौतों को विभाग अन्य कारण लिखकर अपने गले की फांस बचा लेता है।

देखभाल के लिए आशा-बहू
गर्भावस्था से लेकर प्रसव होने तक इलाज एवं टीकाकरण की जिम्मेदारी आशा बहुओं की होती है। इसके लिए विभाग द्वारा भुगतान भी किया जाता है। इसके बावजूद सही तरीके से देखभाल और इलाज न होने के कारण प्रसूता दम तोड़ देती हैं।

प्रदेश में एक लाख गर्भवती में 155 मौत का राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ा है। हमारे जिले में सिर्फ 31 मौत हुई हैं। इसका कारण है कि जिले यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर सुधार है। जो सरकारी में प्रसव नहीं कराना चाहते हैं वह प्राइवेट में प्रसव कराते हैं। कुछ स्थिति ऐसी हो जाती है कि उसमें प्रसूता को बचा पाने में डॉक्टर भी असमर्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद प्रयास किया जा रहा है कि प्रसूताओं के मौत की संख्या में कमी आए।

डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
- प्रसव के दौरान रक्तस्राव के कारण - 13
- तेज बुखार के कारण प्रसूता की मौत - 1
- गर्भपात के दौरान मौत - 1
- देर तक प्रसव दर्द होने के दौरान मौत - 1
- प्रसव के दौरान मौत हुई कारण नहीं पता चला - 15
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