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Ghaziabad News: क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर 21 राज्यों के 25 लोगों के साथ ठगी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2024 04:52 AM IST
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25 people from 21 states cheated in the name of investing in crypto currency
गाजियाबाद। क्रिप्टो करंसी में निवेश करने पर 10 गुना मुनाफे का लालच देकर लोगों के साथ ठगी करने वाले गिरोह के तीन शातिरों को साइबर थाना पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया है। विदेश से चलाया जा रहा यह गिरोह अब तक 21 राज्यों के 250 लोगों को अपना शिकार बनाकर पांच करोड़ से ज्यादा की रकम ठग चुका है।
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गिरफ्तार किए गए तीनों शातिरों की भूमिका गिरोह के मास्टरमाइंड के लिए बैंक खाते मुहैया कराने की थी। इसके लिए ये जालसाज लोगों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाते थे। इन खातों में ही रकम जमा कराई जाती थी। खातों को खंगालने पर ही पुलिस को ठगी के शिकार हुए लोगों और उनसे ठगी गई रकम का पता चला।
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एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि पकड़े गए शातिर फर्रुखाबाद के नवाबगंज के गांव चकरपट्टी निवासी प्रदीप कुमार, राजस्थान के अलवर के गांव खोर्रा मलावली निवासी सुमित कुमार और ओडिशा के सुंदरगढ़ निवासी आकिफ फरहान खान उर्फ मनन हैं। इनके साथी ओडिशा निवासी बादल की तलाश की जा रही है।
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इस गिरोह ने गाजियाबाद के संजय कटियार से 24 जनवरी से 25 अप्रैल के बीच क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर 1.37 करोड़ रुपये ठगे थे। शातिरों के पकड़े जाने पर पुलिस ने ठगी गई रकम में से आठ लाख रुपये वापस कराए हैं। इसी तरह लखनऊ की एक महिला के साथ 1.75 करोड़ की ठगी की गई। एडीसीपी ने बताया कि संजय कटियार के साथ हुई ठगी की जांच में ही इस गिरोह का पता चला।


फिल्म निर्देशन का कोर्स

किया...करने लगा ठगी
गिरफ्तार शातिरों में आफिक पेशे से ट्रांसपोर्टर है। उसने बीकाॅम के बाद नोएडा के एक संस्थान से फिल्म निर्देशन का कोर्स किया। उसने पुलिस को बताया है कि कोर्स करने के बाद कई फिल्मों में निर्देशन में वह सहयोगी की भूमिका में रहा। इसके बाद रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में साइबर अपराधियों से गिरोह से जुड़ गया।
प्रदीप नौंवी पास है और ई-रिक्शा चालक है। वर्तमान में वह दिल्ली में शास्त्रीनगर मेट्रो स्टेशन के पास रहता है। उसने बताया कि एक बैंक खाता खुलवाकर उसकी डिटेल देने से पांच से दस हजार रुपये मिल जाते थे।
सुमित 10वीं पास है। उसका चार्जिंग सेंटर है। हाल में दिल्ली में सुल्तानपुरी में रह रहा है। उसने पुलिस को बताया कि प्रदीप और आफिक से मुलाकात के बाद वह भी गिरोह से जुड़ गया।
तीनों में से किसी को यह नहीं मालूम कि जिस शातिर को खातों की डिटेल बेचते हैं, वह कौन है और किस देश में रहकर गिरोह चला रहा है। तीनों ने बताया कि इसकी जानकारी बादल के पास हो सकती है। वह खाते खुलवाकर डिटेल उसी को देते थे। वह विदेश में भेजता था। वहां से रकम आने पर उन्हें देता था।


सोशल मीडिया पर डालते हैं वीडियो

पुलिस ने बताया कि शातिर निवेश करने के लिए अपनी वेबसाइट www.lsecbuy.com सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर विज्ञापन के तौर पर डालते हैं।
उस पर क्लिक करने वाले व्यक्ति को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ लेते हैं। इसके बाद क्रिप्टो करंसी में निवेश करने पर कुछ ही समय में 10 गुना मुनाफे का झांसा देते हैं।
इसके बाद उसका डिजिटल वाॅलेट बना देते हैं। इसमें रकम बढ़ती नजर आती है लेकिन इसे निकाल नहीं सकते।
गिरोह के जाल में फंसे लोगों को जब तक इसका पता चलता है, तब तक वह अपनी काफी रकम दे चुके होते हैं।
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