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Ghaziabad News: बाजार में 25 और स्कूल मेें 70 की मिल रही कॉपी
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गाजियाबाद। निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों के लिए आफत बनी है। यहां खुलेआम कोर्स, स्टेशनरी, जूते, बैग, कॉपी, पेंसिल के नाम पर अभिभावकों से चार से पांच गुना ज्यादा रुपयेे वसूले जा रहे हैं। कोई भी सामग्री बाहर से लेने पर प्रतिबंध है। हालत यह है कि बाजार में जो कॉपी 25 रुपये में मिल रही है, उसको स्कूलों में 70-80 में रुपये में बेचा जा रहा है। जिन किताबाें पर बाहर खरीदने पर 40 फीसदी तक की छूट मिलती है, उनके बिल प्रिंट रेट के हिसाब से बनाए जा रहे हैं।
यहां तक कि नाम की स्लिप लेने की भी अनिवार्यता है और इसके 30 रुपये अलग से जोड़े जा रहे हैं जबकि, बाहर बाजार में एक स्लिप सेट पांच से 10 रुपये में मिल जाती है। हिंदी, अंग्रेजी, कंप्यूटर जैसे विषय की दो- दो किताबें कोर्स में शामिल कर दी गई हैं। प्रैक्टिकल की कॉपी 100 रुपये से कम नहीं है। जो बाहर अधिकतम 35 रुपये में मिल जाती है, बाहर जो जूते 300 रुपये में मिल जाते हैं, उनको 700 से 800 रुपये में दिया जा रहा है।
विज्ञान का सेट लेने का दबाव
समीर विहार निवासी मनीष त्यागी ने बताया कि उनके दोनों बेटे नामचीन निजी स्कूल में पढ़ते हैं। छोटा बेटा पांचवीं में है, जिसका कोर्स छह हजार और बड़े बेटे का आठवीं का कोर्स 8600 में मिला है। इसमें दो हजार रुपये विज्ञान की तीन किताबों के सेट और एक कॉपी के जोड़ दिए गए हैं।
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नियम कानून सब ठेंगे पर :
गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने बताया कि एक भी स्कूल में एनसीईआरटी का कोर्स नहीं लगाया है। सरकारी आदेश की निजी स्कूल संचालकों को कोई परवाह नहीं हैं। अधिकारियों को लगातार इसकी शिकायत देकर अवगत कराया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई या रोकथाम नहीं हो रही है। आलम यह है कि किताब के साथ स्टेशनरी, कॉपी, यूनिफॉर्म भी लेने का दबाव है। अभिभावकों की सुनने वाला नहीं है।
कक्षा तीन से पांच तक के छात्रों का कोर्स :
हिंदी रीडर-395
हिंदी व्याकरण-405
इंग्लिश रीडर-520
इंग्लिश ग्रामर-380
गणित-440
विज्ञान-539्र
कर्न्वशेसन-235
एसएसटी-392
जीके-370
कंप्यूटर-465
वैल्यू एंड आई-265
कंप्यूटर एक्टिविटी-195
स्किल फॉर लाइफ-400
आर्ट एंड क्राफ्ट-419
नाम स्लिप-30
संस्कृत-160
ड्राइंग बुक-80
कुल-5660
-- -- -- -- -
12 कॉपी-840
क्रेओन्स कलर-60
दो रोल-100
कुल-6660
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश श्रीवास का कहना है कि अभिभावक स्वतंत्र हैं। वह अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं से भी किताबें या स्टेशनरी खरीद सकते हैं। स्कूल किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकता है। यदि कोई स्कूल इस तरह का दबाव बनाता है और शिकायत मिलती है तो नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
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यहां तक कि नाम की स्लिप लेने की भी अनिवार्यता है और इसके 30 रुपये अलग से जोड़े जा रहे हैं जबकि, बाहर बाजार में एक स्लिप सेट पांच से 10 रुपये में मिल जाती है। हिंदी, अंग्रेजी, कंप्यूटर जैसे विषय की दो- दो किताबें कोर्स में शामिल कर दी गई हैं। प्रैक्टिकल की कॉपी 100 रुपये से कम नहीं है। जो बाहर अधिकतम 35 रुपये में मिल जाती है, बाहर जो जूते 300 रुपये में मिल जाते हैं, उनको 700 से 800 रुपये में दिया जा रहा है।
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विज्ञान का सेट लेने का दबाव
समीर विहार निवासी मनीष त्यागी ने बताया कि उनके दोनों बेटे नामचीन निजी स्कूल में पढ़ते हैं। छोटा बेटा पांचवीं में है, जिसका कोर्स छह हजार और बड़े बेटे का आठवीं का कोर्स 8600 में मिला है। इसमें दो हजार रुपये विज्ञान की तीन किताबों के सेट और एक कॉपी के जोड़ दिए गए हैं।
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नियम कानून सब ठेंगे पर :
गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने बताया कि एक भी स्कूल में एनसीईआरटी का कोर्स नहीं लगाया है। सरकारी आदेश की निजी स्कूल संचालकों को कोई परवाह नहीं हैं। अधिकारियों को लगातार इसकी शिकायत देकर अवगत कराया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई या रोकथाम नहीं हो रही है। आलम यह है कि किताब के साथ स्टेशनरी, कॉपी, यूनिफॉर्म भी लेने का दबाव है। अभिभावकों की सुनने वाला नहीं है।
कक्षा तीन से पांच तक के छात्रों का कोर्स :
हिंदी रीडर-395
हिंदी व्याकरण-405
इंग्लिश रीडर-520
इंग्लिश ग्रामर-380
गणित-440
विज्ञान-539्र
कर्न्वशेसन-235
एसएसटी-392
जीके-370
कंप्यूटर-465
वैल्यू एंड आई-265
कंप्यूटर एक्टिविटी-195
स्किल फॉर लाइफ-400
आर्ट एंड क्राफ्ट-419
नाम स्लिप-30
संस्कृत-160
ड्राइंग बुक-80
कुल-5660
12 कॉपी-840
क्रेओन्स कलर-60
दो रोल-100
कुल-6660
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश श्रीवास का कहना है कि अभिभावक स्वतंत्र हैं। वह अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं से भी किताबें या स्टेशनरी खरीद सकते हैं। स्कूल किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकता है। यदि कोई स्कूल इस तरह का दबाव बनाता है और शिकायत मिलती है तो नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।