{"_id":"5950f3d64f1c1b6b058b49a3","slug":"21498477526-ghaziabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बढ़ा हुआ मुआवजा देने को जीडीए हुआ तैयार तो आड़े आएगा किसानों का करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बढ़ा हुआ मुआवजा देने को जीडीए हुआ तैयार तो आड़े आएगा किसानों का करार
Updated Mon, 26 Jun 2017 05:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बढ़े मुआवजे पर भी आड़े आएगा किसानों का करार
मधुबन बापूधाम योजना के लिए 281 एकड़ जमीन का अधिग्रहण जीडीए के लिए टेढ़ी खीर साबित होता जा रहा है। इस 281 एकड़ जमीन के लिए जीडीए अगर किसानों को उनकी मांग के अनुरूप मुआवजा देने को तैयार भी हो जाता है तो पूर्व में 800 एकड़ जमीन के किसानों के साथ हुए करार से जीडीए को परेशानी होगी।
जीडीए को इन किसानों को भी बढ़ी हुई दर के हिसाब से ही मुआवजा देना पडे़गा। ऐसा न करने की स्थिति में 800 एकड़ भूमि के किसान भी जीडीए के खिलाफ कोर्ट को सहारा ले सकते हैं।
दरअसल मधुबन बापूधाम योजना के लिए जीडीए ने 1234 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। इसके लिए 1100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा राशि तय की गई थी।
विज्ञापन
800 एकड़ जमीन के किसानों ने जीडीए इस रेट पर अपनी जमीन जीडीए को दे दी थी, जबकि 281 एकड़ के स्वामी किसान मुआवजा राशि बढ़ाने को कोर्ट चले गए थे।
खास बात यह है कि जिन किसानों ने अपनी 800 एकड़ जमीन जीडीए को 1100 रुपये रेट के हिसाब से दी थी, उन्हीं के साथ जीडीए का एक करार भी हुआ था।
इस करार के हिसाब से जीडीए अफसरों ने स्पष्ट किया था कि जो किसान अभी जीडीए को अपनी जमीन नहीं दे रहे हैं, अगर भविष्य में उन्हें मुआवजा राशि बढ़ाकर दी गई तो 800 एकड़ जमीन के किसानों को भी वही मुआजवा राशि दी जाएगी।
किसान नेता सुदेश पाल सिंह के मुताबिक जब जीडीए किसानों को सात से 14 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा देने की बात कर रहा है, तो उसे इस करार के तहत 800 एकड़ जमीन के किसानों को भी यह बढ़ी हुई राशि देनी होगी। यानी जीडीए को पुराने किसानों को भी बढ़ी हुई दर के हिसाब से मुआवजे के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ सकती है।
विज्ञापन
मधुबन बापूधाम योजना के लिए 281 एकड़ जमीन का अधिग्रहण जीडीए के लिए टेढ़ी खीर साबित होता जा रहा है। इस 281 एकड़ जमीन के लिए जीडीए अगर किसानों को उनकी मांग के अनुरूप मुआवजा देने को तैयार भी हो जाता है तो पूर्व में 800 एकड़ जमीन के किसानों के साथ हुए करार से जीडीए को परेशानी होगी।
जीडीए को इन किसानों को भी बढ़ी हुई दर के हिसाब से ही मुआवजा देना पडे़गा। ऐसा न करने की स्थिति में 800 एकड़ भूमि के किसान भी जीडीए के खिलाफ कोर्ट को सहारा ले सकते हैं।
विज्ञापन
दरअसल मधुबन बापूधाम योजना के लिए जीडीए ने 1234 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। इसके लिए 1100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा राशि तय की गई थी।
विज्ञापन
800 एकड़ जमीन के किसानों ने जीडीए इस रेट पर अपनी जमीन जीडीए को दे दी थी, जबकि 281 एकड़ के स्वामी किसान मुआवजा राशि बढ़ाने को कोर्ट चले गए थे।
खास बात यह है कि जिन किसानों ने अपनी 800 एकड़ जमीन जीडीए को 1100 रुपये रेट के हिसाब से दी थी, उन्हीं के साथ जीडीए का एक करार भी हुआ था।
इस करार के हिसाब से जीडीए अफसरों ने स्पष्ट किया था कि जो किसान अभी जीडीए को अपनी जमीन नहीं दे रहे हैं, अगर भविष्य में उन्हें मुआवजा राशि बढ़ाकर दी गई तो 800 एकड़ जमीन के किसानों को भी वही मुआजवा राशि दी जाएगी।
किसान नेता सुदेश पाल सिंह के मुताबिक जब जीडीए किसानों को सात से 14 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा देने की बात कर रहा है, तो उसे इस करार के तहत 800 एकड़ जमीन के किसानों को भी यह बढ़ी हुई राशि देनी होगी। यानी जीडीए को पुराने किसानों को भी बढ़ी हुई दर के हिसाब से मुआवजे के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ सकती है।