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नगर निगम का 183 करोड़ रुपया लखनऊ में फंसा
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 02 Apr 2017 12:52 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम का 183 करोड़ रुपया लखनऊ में फंस गया है। बीते पांच साल से नगर निगम को अवस्थापना निधि का पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। अब प्रदेश में सरकार बदली तो निगम अफसरों को भी फंड मिलने की उम्मीद जगी है।
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वहीं भाजपा पार्षद और महापौर भी अब सरकार से इस फंड को लाने का दावा कर रहे हैं। यह रकम मिली तो शहर की सूरत बदल सकती है। वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार की गठन के बाद से ही नगर निगम का अवस्थापना फंड रुकने लगा था। अधिकांश नगर निगमों में भाजपा सत्तासीन है।
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ऐसे में प्रदेश सरकार से निगम के महापौर और प्रशासन को ज्यादा सपोर्ट नहीं मिला। सपा शासनकाल में गाजियाबाद नगर निगम के पार्षदों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ कलक्ट्रेट में धरना देकर अवस्थापना फंड जारी करने की मांग की थी।
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इसके बाद किस्तों में कुछ फंड जारी किया गया, लेकिन अभी भी गाजियाबाद नगर निगम का करीब 183 करोड़ रुपया शासन पर बकाया है। इस रकम से नगर निगम कई बड़े प्रोजेक्ट, सड़क, सीवर, नालों का निर्माण करा सकता है। इस फंड के न मिलने से शहर का विकास रुका हुआ है।
हाल ही में निगम को अवस्थापना फंड से 20 करोड़ रुपया मिला है, लेकिन अभी भी बड़ी रकम शासन ने रोकी हुई है। इसको लेकर नगर विकास मंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र भेजेंगे। यह फंड रिलीज हो जाए तो शहर में कई बड़े विकास कार्य कराए जा सकते हैं। - अशु वर्मा, महापौर