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निगम ने लीज पर देकर ठप कर दिया हैबिटेट क्लब-Ghaziabad city
Updated Thu, 13 Jul 2017 01:03 AM IST
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निगम ने लीज पर देकर ठप कर दिया हैबिटेट क्लब
नगर निगम ने शहर के बीचोबीच बने हैबिटेट क्लब को लीज पर देकर ठप कर दिया। लीज पर लेने वाली फर्म ने एक साल का किराया जमा कराया और अगले साल से किराया देना बंद कर दिया।
दो साल से निगम को किराये की रकम नहीं मिली है। इससे निगम को प्रतिवर्ष करीब 46 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। बावजूद इसके निगम अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
नगर निगम ने वर्ष 2015 में हैबीटेट क्लब की पुरानी लीज फर्म खत्म कर नए सिरे से बोली लगवाई थी। पूर्व में भाजपा के एक नेता ने इसे लीज पर ले रखा था। नए सिरे से लगी बोली में नगर निगम को फायदा हुआ। इसमें 15 लाख रुपये निगम को प्रीमियम मिला और 46 लाख रुपये सालाना किराया।
61 लाख रुपये फर्म ने एकमुश्त जमा करा दिया, लेकिन अगले साल से फर्म ने किराया नहीं दिया। अब तक निगम को करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान इस पर नहीं है।
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हैबिटेट क्लब को लीज पर लेने वाली फर्म ने नगर निगम से 6 महीने का समय मांगा था। फर्म के पदाधिकारियों का कहना था कि क्लब का रेनोवेशन कराने में कम से कम छह महीने का समय लगेगा।
ऐसे में छह महीने बाद से उसकी लीज की अवधि शुरू की जाए। यह प्रस्ताव नगर निगम बोर्ड में पहुंचा तो पार्षदों ने अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया। इसी विवाद के चलते फर्म ने अभी तक इस पर काम शुरू नहीं किया है। करीब 3 साल से हैबिटेट क्लब बंद है। इस क्लब में बने स्वीमिंग पूल में प्रतिदिन सैकड़ों युवा और बच्चे स्वीमिंग सीखने आते थे।
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नगर निगम ने शहर के बीचोबीच बने हैबिटेट क्लब को लीज पर देकर ठप कर दिया। लीज पर लेने वाली फर्म ने एक साल का किराया जमा कराया और अगले साल से किराया देना बंद कर दिया।
दो साल से निगम को किराये की रकम नहीं मिली है। इससे निगम को प्रतिवर्ष करीब 46 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। बावजूद इसके निगम अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
नगर निगम ने वर्ष 2015 में हैबीटेट क्लब की पुरानी लीज फर्म खत्म कर नए सिरे से बोली लगवाई थी। पूर्व में भाजपा के एक नेता ने इसे लीज पर ले रखा था। नए सिरे से लगी बोली में नगर निगम को फायदा हुआ। इसमें 15 लाख रुपये निगम को प्रीमियम मिला और 46 लाख रुपये सालाना किराया।
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61 लाख रुपये फर्म ने एकमुश्त जमा करा दिया, लेकिन अगले साल से फर्म ने किराया नहीं दिया। अब तक निगम को करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान इस पर नहीं है।
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हैबिटेट क्लब को लीज पर लेने वाली फर्म ने नगर निगम से 6 महीने का समय मांगा था। फर्म के पदाधिकारियों का कहना था कि क्लब का रेनोवेशन कराने में कम से कम छह महीने का समय लगेगा।
ऐसे में छह महीने बाद से उसकी लीज की अवधि शुरू की जाए। यह प्रस्ताव नगर निगम बोर्ड में पहुंचा तो पार्षदों ने अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया। इसी विवाद के चलते फर्म ने अभी तक इस पर काम शुरू नहीं किया है। करीब 3 साल से हैबिटेट क्लब बंद है। इस क्लब में बने स्वीमिंग पूल में प्रतिदिन सैकड़ों युवा और बच्चे स्वीमिंग सीखने आते थे।