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परमाणु वैज्ञानिक ने कहा, मेरे प्राण संकट में हैं, मुझको बचाओ
Updated Tue, 01 Aug 2017 10:23 PM IST
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परमाणु वैज्ञानिक ने कहा, मेरे प्राण संकट में हैं, मुझको बचाओ
- अमेरिका में नजरबंद वैज्ञानिक ने विदेश राज्य मंत्री से लगाई गुहार
- वैज्ञानिक का आरोप, नस्लभेद कर की जा रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो।
शिकारपुर (बुलंदशहर)। अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में बतौर परमाणु वैज्ञानिक नौकरी करने गए बुलंदशहर के डॉ. तरुण कुमार भारद्वाज ने विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से प्राणों की रक्षा की गुहार लगाई है। डा. भारद्वाज का आरोप है कि उसे यूनिवर्सिटी ने नस्लवादी व्यवहार और भ्रष्टाचार करने पर सात माह से नजरबंद कर रखा है। वह अब वतन लौटना चाहता है। बूढ़ी मां ने बताया कि वह बातचीत की ऑडियो के साथ विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से मिलेंगे और उसे भारत लाने के लिए अपील करेंगे।
डीएपी इंटर कालेज के रिटायर शिक्षक रामकिशन शर्मा का पुत्र डा. तरुण कुमार भारद्वाज भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र से पीएचडी के बाद वर्ष 2010 में एएन्डएम यूनिवर्सिटी टैक्सास (अमेरिका) में बतौर परमाणु वैज्ञानिक तैनात हुआ था। अक्टूबर 2015 में उसे नस्लवादी व्यवहार और भ्रष्टाचार का विरोध करने पर षड्यंत्र के तहत काम पर ध्यान न देने व दुर्व्यवहार करने समेत कई आरोप लगाकर जेल भिजवाया गया। विवि से उसे नौकरी से निकाल दिया था। जिसके विरुद्ध उन्होंने संघीय न्यायालय में अपील की थी। न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवि को 350 मिलियन डालर (दो अरब चौंतीस करोड़ तेईस लाख पिचहत्तर हजार रुपये) देने का आदेश दिया था। विवि प्रशासन ने न्यायालय द्वारा निर्धारित धनराशि को चुकता करने के बजाय 29 दिसंबर 2016 को उसे नजर बंद कर लिया। करीब सात माह से वह ब्रजोस काउंटी डिटेंशन सेंटर में नजरबंद है। 28 जुलाई को वैज्ञानिक तरुण से हुई बातचीत के आधार पर परिजनों ने बताया कि वह भारत आना चाहते हैं। तरुण ने भारत के विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से अपने प्राणों का संकट बताते हुये भारत आने को कहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ह्यूस्टन फैडरल कोर्ट ने 24 अप्रैल को आदेश में कहा है कि तरुण पर नस्लभेद, लिंगभेद और भारतीय होने के कारण भेदभाव किया गया। कोर्ट ने कहा है कि दुर्व्यवहार से संबंधित जो भी सामग्री सोशल मीडिया पर पड़ी है, उसे भी तत्काल हटाया जाये।
तरुण के माता पिता गिरजेश शर्मा व रामकिशन शर्मा ने बताया कि उन्हें लगा था कि कोर्ट के आदेश के बाद अब तरुण की प्रताड़ना का दौर खत्म होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं अब विवि प्रशासन उसे पागल घोषित करने पर तुला है। उन्होंने बताया कि संघीय न्यायालय द्वारा 350 मिलियन डॉलर देने के आदेश पर फैडरल कोर्ट दिसंबर से सुनवाई शुरू करेगा। लिहाजा वो भारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि इस मामले तुरंत हस्तक्षेप करके उनके बेटे को वापस लाया जाए
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- अमेरिका में नजरबंद वैज्ञानिक ने विदेश राज्य मंत्री से लगाई गुहार
- वैज्ञानिक का आरोप, नस्लभेद कर की जा रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो।
शिकारपुर (बुलंदशहर)। अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में बतौर परमाणु वैज्ञानिक नौकरी करने गए बुलंदशहर के डॉ. तरुण कुमार भारद्वाज ने विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से प्राणों की रक्षा की गुहार लगाई है। डा. भारद्वाज का आरोप है कि उसे यूनिवर्सिटी ने नस्लवादी व्यवहार और भ्रष्टाचार करने पर सात माह से नजरबंद कर रखा है। वह अब वतन लौटना चाहता है। बूढ़ी मां ने बताया कि वह बातचीत की ऑडियो के साथ विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से मिलेंगे और उसे भारत लाने के लिए अपील करेंगे।
डीएपी इंटर कालेज के रिटायर शिक्षक रामकिशन शर्मा का पुत्र डा. तरुण कुमार भारद्वाज भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र से पीएचडी के बाद वर्ष 2010 में एएन्डएम यूनिवर्सिटी टैक्सास (अमेरिका) में बतौर परमाणु वैज्ञानिक तैनात हुआ था। अक्टूबर 2015 में उसे नस्लवादी व्यवहार और भ्रष्टाचार का विरोध करने पर षड्यंत्र के तहत काम पर ध्यान न देने व दुर्व्यवहार करने समेत कई आरोप लगाकर जेल भिजवाया गया। विवि से उसे नौकरी से निकाल दिया था। जिसके विरुद्ध उन्होंने संघीय न्यायालय में अपील की थी। न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवि को 350 मिलियन डालर (दो अरब चौंतीस करोड़ तेईस लाख पिचहत्तर हजार रुपये) देने का आदेश दिया था। विवि प्रशासन ने न्यायालय द्वारा निर्धारित धनराशि को चुकता करने के बजाय 29 दिसंबर 2016 को उसे नजर बंद कर लिया। करीब सात माह से वह ब्रजोस काउंटी डिटेंशन सेंटर में नजरबंद है। 28 जुलाई को वैज्ञानिक तरुण से हुई बातचीत के आधार पर परिजनों ने बताया कि वह भारत आना चाहते हैं। तरुण ने भारत के विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह से अपने प्राणों का संकट बताते हुये भारत आने को कहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ह्यूस्टन फैडरल कोर्ट ने 24 अप्रैल को आदेश में कहा है कि तरुण पर नस्लभेद, लिंगभेद और भारतीय होने के कारण भेदभाव किया गया। कोर्ट ने कहा है कि दुर्व्यवहार से संबंधित जो भी सामग्री सोशल मीडिया पर पड़ी है, उसे भी तत्काल हटाया जाये।
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तरुण के माता पिता गिरजेश शर्मा व रामकिशन शर्मा ने बताया कि उन्हें लगा था कि कोर्ट के आदेश के बाद अब तरुण की प्रताड़ना का दौर खत्म होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं अब विवि प्रशासन उसे पागल घोषित करने पर तुला है। उन्होंने बताया कि संघीय न्यायालय द्वारा 350 मिलियन डॉलर देने के आदेश पर फैडरल कोर्ट दिसंबर से सुनवाई शुरू करेगा। लिहाजा वो भारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि इस मामले तुरंत हस्तक्षेप करके उनके बेटे को वापस लाया जाए
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