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फर्जी आधार को बना दिया राशन घोटाले का ‘आधार’
Updated Sat, 25 Aug 2018 06:00 PM IST
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फर्जी आधार को बना दिया राशन घोटाले का ‘आधार’
गाजियाबाद। बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर सेवाओं की उपलब्धता को लेकर लाया गया आधार भी सुरक्षित नहीं रह गया है। धड़ल्ले से फर्जी तरीके से आधार तैयार हो रहे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग में फर्जी आधार नंबर और सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर करोड़ों का घोटाला कर दिया गया है। शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच शुरू करा दी गई है। अभी तक की जांच में नोएडा के दो हैकरों के नाम सामने आए हैं, जो प्रदेश भर के डीलरों से संपर्क में थे। राशन डीलरों ने पूछताछ में इन हैकरों के नाम बताए। हैकर उन्हें बता रहे थे कि किस तरह से ई-पॉस मशीन के सॉफ्टवेयर को हैक एक ही राशन कार्ड से हजारों दफा बिक्री दिखाई जा सकती है।
जांच में डीलरों ने कई अहम बातों का खुलासा किया। उन्होंने बताया है कि हैकर प्रति कार्ड 30 से 50 रुपये लेकर ई-पॉस से राशन कार्ड पर खाद्यान्न वितरण दिखा देते थे। बस उन्हें मशीन देनी पड़ती थी और कुछ आधार कार्ड नंबर भी, जिससे कि फर्जी आधार कार्ड नंबर उस व्यक्ति के पते पर बनाए जा सकें। इस पूरे खेल में एनआईसी, ऑपरेटर, कंपनी, डीलर और कुछ राशन कार्ड धारक भी शामिल रहे। सबसे बड़ा घोटाला मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद व नोएडा में हुआ है, जहां एक महीने में पांच से सात करोड़ रुपये के राशन की चोरी हुई है। नोएडा में जिलाधिकारी के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। रिपोर्ट में बिसाहड़ा निवासी राहुल सिंह, रोहित कुमार, दादरी के पुराना कठहेरा रोड स्थित दौलतराम कालोनी निवासी विकास मित्तल, अमित कुमार व दीपक पीलवान और नोएडा के सेक्टर-19 निवासी निशा जोशी के नाम शामिल हैं। उधर, गाजियाबाद में 65 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज कराए जाने की तैयारी है। घोटाला सामने आने के बाद शासन के निर्देश पर सभी संबंधित जिलों में जांच जारी है।
आधार कार्ड बना नहीं, निकाल लिया राशन
केस-1 - (मेरठ): जांच कर रही खाद्य आपूर्ति विभाग की टीम ने अब तक तीन बड़े मामले पकड़े हैं। राशन निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए दो आधार कार्ड नंबर पर पता व संबंधित व्यक्ति का नाम सही था, लेकिन भौतिक सत्यापन करने दोनों लोगों के घर पहुंचे तो उनके द्वारा दिए गए आधार कार्ड का नंबर अलग था। इससे साफ हुआ कि उनके नाम व पते पर फर्जी आधार नंबर बनवाए गए हैं। तीसरा मामला एक ऐसे 16 वर्ष के युवक का है, जिसका अभी आधार बना ही नहीं है लेकिन ई-पॉस मशीन के डेटाबेस में उसका आधार नंबर दर्ज है। उसके नाम पर 100 से अधिक दफा राशन निकाला गया।
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केस -2 (नोएडा ): दादरी तहसील में जांच के बाद छह व्यक्तियों द्वारा बड़े पैमाने पर डाटाबेस से छेड़छाड़ कर एक ही आधार नंबर से अनेक राशन कार्डों पर बायोमेट्रिक डाटा का इस्तेमाल कर राशन वितरण का मामला पकड़ा गया। सभी पर आईटी एक्ट 2000, आधार एक्ट 2016, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 व उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
केस-3 - (गाजियाबाद): आपूर्ति विभाग की टीम ने संदिग्ध आधार नंबर की जांच शुरू कर दी है। कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ट्रॉनिका सिटी के पते पर एक व्यक्ति का आधार नंबर बना है, जिसके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर 200 से अधिक दफा राशन बिक्री दिखाई गई है। जांच करने गई टीम को पता चला कि वह व्यक्ति दिल्ली के शाहदरा में रहता है। संबंधित व्यक्ति के पास शाहदरा पहुंचे, तो उसने कहा कि मैंने आज तक राशन ही नहीं लिया है।
क्या है पूरा घोटाला
प्रदेश के 43 जिलों में 859 आधार कार्ड नंबर को 1,86,737 दफा इस्तेमाल कर करीब 12 करोड़ रुपये का खाद्यान्न निकाल लिया गया। हैकर की मदद से डीलरों ने ई-पॉस मशीन में बायोमेट्रिक डेटा बदलकर राशन निकल लिया। अकेले गाजियाबाद में 69 आधार कार्ड का राशन कार्ड नंबर पर 16,568 बार इस्तेमाल कर राशन निकाल लिया गया।
तो क्या फर्जी तरीके से बन रहे हैं आधार
आधार कार्ड की गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आधार नंबर के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। किसी के भी नाम पर आधार नंबर तैयार हो जा रहा है। तो क्या ऐसी स्थिति में आधार को सुरक्षित माना जा सकता है।
आपूर्ति विभाग ने किया खुलासा
बीते हफ्ते गाजियाबाद आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की नजर ऑनलाइन सिस्टम को चेक करते वक्त उन राशन कार्ड से वितरण पर पड़ी, जिनके नाम पर पांच-छह महीने से कोई राशन नहीं उठाया गया था। एक-एक करके देखा तो पता चला कि इन राशन नंबर पर अपडेट आधार नंबरों को भी बदला गया। दो हजार से अधिक राशन कार्ड पर एक ही नंबर के 10 से 15 आधार नंबर का बायोमेट्रिक डेटा फीड था। उन्होंने आसपास के जिलों में देखा तो वहां भी महीनों से बंद पड़े राशन कार्ड पर जुलाई में खाद्यान्न की बिक्री पाई गई। ऐसे में आपूर्ति अधिकारी का माथा ठनका और उन्होंने लखनऊ पहुंचकर प्रमुख सचिव और आयुक्त को जानकारी दी। इस पर शासन हरकत में आया गया।
प्रदेश का तीन फीसदी खाद्यान्न हो गया चोरी
सरकार ने खाद्यान्न वितरण में धांधली रोकने के लिए बीते वर्ष ई-पॉस मशीन से वितरण की व्यवस्था शुरू की। जीपीएस सिस्टम से लैस विजन टैक कंपनी से मशीनों को खरीदकर प्रदेशभर की12,337 नगरीय क्षेत्र की राशन दुकानों पर लगाया गया। इन मशीनों में राशन कार्ड नंबर के साथ आधार नंबर को फीड किया गया, जिसके बाद उस व्यक्ति को राशन मिल सकता था जिसके नाम पर राशन कार्ड बना है। क्योंकि राशन कार्ड धारक को अपनी अंगुलियों के निशान मशीन पर टच करने होते हैं। फिर बायोमेट्रिक डेटा का मिलान होने पर ही राशन दिया जा सकता है। नगरीय क्षेत्र के 57,24,227 राशन कार्ड धारकों को इसी व्यवस्था के तहत राशन मिलता है, जिनमें से 1,86,737 कार्ड का इस्तेमाल कर हैकर ने बायोमेट्रिक डेटा बदल दिया और राशन बिक्री दिखा दी, जो कुल वितरण की करीब तीन फीसदी है।
वर्जन
यह अपराध करने का नया तरीका है, जिसको लेकर व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है। कई जगह पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी हैं। जो लोग इस साजिश में शामिल हैं, उन्हें चिह्नित करना कोई मुश्किल काम नहीं है। एक हफ्ते में सभी अपराधी पकड़ में होंगे। जांच की आयुक्त और प्रमुख सचिव सीधे स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी मामला आ चुका है।
अतुल गर्ग, खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री
कितनी पर आधार नंबरों का हुआ इस्तेमाल
जिला आधार कार्ड संख्या कितने दफा इस्तेमाल
इलाहाबाद 107 37524
मेरठ 108 27324
मुजफ्फरनगर 64 19795
गाजियाबाद 69 16568
गौतमबुद्ध नगर 36 16058
कानपुर नगर 17 9292
बिजनौर 37 8837
आगरा 41 8468
मुरादाबाद 83 6718
लखनऊ 24 4794
--------------------
पश्चिमी यूपी के अन्य जिले
अमरोहा 32 2527
बागपत 13 1024
शामली 9 463
बुलंदशहर 7 360
हापुड़ 2 160
रामपुर 2 93
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गाजियाबाद। बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर सेवाओं की उपलब्धता को लेकर लाया गया आधार भी सुरक्षित नहीं रह गया है। धड़ल्ले से फर्जी तरीके से आधार तैयार हो रहे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग में फर्जी आधार नंबर और सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर करोड़ों का घोटाला कर दिया गया है। शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच शुरू करा दी गई है। अभी तक की जांच में नोएडा के दो हैकरों के नाम सामने आए हैं, जो प्रदेश भर के डीलरों से संपर्क में थे। राशन डीलरों ने पूछताछ में इन हैकरों के नाम बताए। हैकर उन्हें बता रहे थे कि किस तरह से ई-पॉस मशीन के सॉफ्टवेयर को हैक एक ही राशन कार्ड से हजारों दफा बिक्री दिखाई जा सकती है।
जांच में डीलरों ने कई अहम बातों का खुलासा किया। उन्होंने बताया है कि हैकर प्रति कार्ड 30 से 50 रुपये लेकर ई-पॉस से राशन कार्ड पर खाद्यान्न वितरण दिखा देते थे। बस उन्हें मशीन देनी पड़ती थी और कुछ आधार कार्ड नंबर भी, जिससे कि फर्जी आधार कार्ड नंबर उस व्यक्ति के पते पर बनाए जा सकें। इस पूरे खेल में एनआईसी, ऑपरेटर, कंपनी, डीलर और कुछ राशन कार्ड धारक भी शामिल रहे। सबसे बड़ा घोटाला मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद व नोएडा में हुआ है, जहां एक महीने में पांच से सात करोड़ रुपये के राशन की चोरी हुई है। नोएडा में जिलाधिकारी के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। रिपोर्ट में बिसाहड़ा निवासी राहुल सिंह, रोहित कुमार, दादरी के पुराना कठहेरा रोड स्थित दौलतराम कालोनी निवासी विकास मित्तल, अमित कुमार व दीपक पीलवान और नोएडा के सेक्टर-19 निवासी निशा जोशी के नाम शामिल हैं। उधर, गाजियाबाद में 65 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज कराए जाने की तैयारी है। घोटाला सामने आने के बाद शासन के निर्देश पर सभी संबंधित जिलों में जांच जारी है।
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आधार कार्ड बना नहीं, निकाल लिया राशन
केस-1 - (मेरठ): जांच कर रही खाद्य आपूर्ति विभाग की टीम ने अब तक तीन बड़े मामले पकड़े हैं। राशन निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए दो आधार कार्ड नंबर पर पता व संबंधित व्यक्ति का नाम सही था, लेकिन भौतिक सत्यापन करने दोनों लोगों के घर पहुंचे तो उनके द्वारा दिए गए आधार कार्ड का नंबर अलग था। इससे साफ हुआ कि उनके नाम व पते पर फर्जी आधार नंबर बनवाए गए हैं। तीसरा मामला एक ऐसे 16 वर्ष के युवक का है, जिसका अभी आधार बना ही नहीं है लेकिन ई-पॉस मशीन के डेटाबेस में उसका आधार नंबर दर्ज है। उसके नाम पर 100 से अधिक दफा राशन निकाला गया।
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केस-3 - (गाजियाबाद): आपूर्ति विभाग की टीम ने संदिग्ध आधार नंबर की जांच शुरू कर दी है। कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ट्रॉनिका सिटी के पते पर एक व्यक्ति का आधार नंबर बना है, जिसके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर 200 से अधिक दफा राशन बिक्री दिखाई गई है। जांच करने गई टीम को पता चला कि वह व्यक्ति दिल्ली के शाहदरा में रहता है। संबंधित व्यक्ति के पास शाहदरा पहुंचे, तो उसने कहा कि मैंने आज तक राशन ही नहीं लिया है।
क्या है पूरा घोटाला
प्रदेश के 43 जिलों में 859 आधार कार्ड नंबर को 1,86,737 दफा इस्तेमाल कर करीब 12 करोड़ रुपये का खाद्यान्न निकाल लिया गया। हैकर की मदद से डीलरों ने ई-पॉस मशीन में बायोमेट्रिक डेटा बदलकर राशन निकल लिया। अकेले गाजियाबाद में 69 आधार कार्ड का राशन कार्ड नंबर पर 16,568 बार इस्तेमाल कर राशन निकाल लिया गया।
तो क्या फर्जी तरीके से बन रहे हैं आधार
आधार कार्ड की गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आधार नंबर के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। किसी के भी नाम पर आधार नंबर तैयार हो जा रहा है। तो क्या ऐसी स्थिति में आधार को सुरक्षित माना जा सकता है।
आपूर्ति विभाग ने किया खुलासा
बीते हफ्ते गाजियाबाद आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की नजर ऑनलाइन सिस्टम को चेक करते वक्त उन राशन कार्ड से वितरण पर पड़ी, जिनके नाम पर पांच-छह महीने से कोई राशन नहीं उठाया गया था। एक-एक करके देखा तो पता चला कि इन राशन नंबर पर अपडेट आधार नंबरों को भी बदला गया। दो हजार से अधिक राशन कार्ड पर एक ही नंबर के 10 से 15 आधार नंबर का बायोमेट्रिक डेटा फीड था। उन्होंने आसपास के जिलों में देखा तो वहां भी महीनों से बंद पड़े राशन कार्ड पर जुलाई में खाद्यान्न की बिक्री पाई गई। ऐसे में आपूर्ति अधिकारी का माथा ठनका और उन्होंने लखनऊ पहुंचकर प्रमुख सचिव और आयुक्त को जानकारी दी। इस पर शासन हरकत में आया गया।
प्रदेश का तीन फीसदी खाद्यान्न हो गया चोरी
सरकार ने खाद्यान्न वितरण में धांधली रोकने के लिए बीते वर्ष ई-पॉस मशीन से वितरण की व्यवस्था शुरू की। जीपीएस सिस्टम से लैस विजन टैक कंपनी से मशीनों को खरीदकर प्रदेशभर की12,337 नगरीय क्षेत्र की राशन दुकानों पर लगाया गया। इन मशीनों में राशन कार्ड नंबर के साथ आधार नंबर को फीड किया गया, जिसके बाद उस व्यक्ति को राशन मिल सकता था जिसके नाम पर राशन कार्ड बना है। क्योंकि राशन कार्ड धारक को अपनी अंगुलियों के निशान मशीन पर टच करने होते हैं। फिर बायोमेट्रिक डेटा का मिलान होने पर ही राशन दिया जा सकता है। नगरीय क्षेत्र के 57,24,227 राशन कार्ड धारकों को इसी व्यवस्था के तहत राशन मिलता है, जिनमें से 1,86,737 कार्ड का इस्तेमाल कर हैकर ने बायोमेट्रिक डेटा बदल दिया और राशन बिक्री दिखा दी, जो कुल वितरण की करीब तीन फीसदी है।
वर्जन
यह अपराध करने का नया तरीका है, जिसको लेकर व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है। कई जगह पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी हैं। जो लोग इस साजिश में शामिल हैं, उन्हें चिह्नित करना कोई मुश्किल काम नहीं है। एक हफ्ते में सभी अपराधी पकड़ में होंगे। जांच की आयुक्त और प्रमुख सचिव सीधे स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी मामला आ चुका है।
अतुल गर्ग, खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री
कितनी पर आधार नंबरों का हुआ इस्तेमाल
जिला आधार कार्ड संख्या कितने दफा इस्तेमाल
इलाहाबाद 107 37524
मेरठ 108 27324
मुजफ्फरनगर 64 19795
गाजियाबाद 69 16568
गौतमबुद्ध नगर 36 16058
कानपुर नगर 17 9292
बिजनौर 37 8837
आगरा 41 8468
मुरादाबाद 83 6718
लखनऊ 24 4794
--------------------
पश्चिमी यूपी के अन्य जिले
अमरोहा 32 2527
बागपत 13 1024
शामली 9 463
बुलंदशहर 7 360
हापुड़ 2 160
रामपुर 2 93