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दादरी में लिखी गई राशन घोटाले की पटकथा
Updated Sun, 26 Aug 2018 06:04 PM IST
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दादरी में लिखी गई राशन घोटाले की पटकथा
गाजियाबाद। फर्जी आधार व सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर 12 करोड़ की राशन चोरी के मामले में अहम सुराग हाथ लगे हैं। प्रदेश के 43 जिलों में हुए घोटाले की पटकथा गौतमबुद्धनगर स्थित दादरी में लिखी गई। डीलरों व ऑपरेटरों से की गई पूछताछ में जीत व रोहित के नाम सामने आए हैं, जिनके पास सभी संबंधित जिलों की ई-पॉश मशीनें पहुंचती थीं। दोनों लोग दादरी में मशीनें मंगाते थे। जहां से तीन से पांच दिन के अंदर राशन कार्डों के नाम पर सस्ते अनाज की बिक्री दर्ज कर लौटा देते थे। शासन के निर्देश पर एसटीएफ व स्थानीय पुलिस दोनों लोगों की तलाश में जुटी है।
खाद्य आपूर्ति विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तमाम जिलों के डीलरों व ऑपरेटरों ने बताया है कि उन्हें नहीं पता कि कैसे हेराफेरी की गई। वो अपनी मशीनों को दादरी में पहुंचा थे। जहां पर जीतू व रोहित उन राशन कार्ड पर सस्ते गल्ले की बिक्री दर्ज कर मशीनों को लौटा देते थे, जिनके नाम पर राशन नहीं लिया जाता था। पूछताछ के दौरान कोई भी उनका पूरा पता नहीं बता पाया है लेकिन कहा जा रहा है कि कुछ ई-पॉश मशीन ऑपरेटर उनके लगातार संपर्क में थे, जो उनका पूरा पता भी जानते थे। दूसरे जिले के ऑपरेटर के माध्यम से मशीन भेजी जाती थी। बस उनका नाम हर कोई लेता था और कहा जाता था कि मशीन बस कुछ दिन के लिए दादरी में भेजनी पड़ेगी। बताया जा रहा है कि सोमवार तक पूरा मामले में कोई बड़ी कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि 43 जिलों में 859 आधार कार्ड नंबरों का1,86,737 दफा इस्तेमाल कर करीब 12 करोड़ रुपये का खाद्यान्न निकाल लिया गया।
ई-पॉस मशीन बनाने वाले कंपनी रडार पर
घोटाले में ई-पॉश मशीन बनाने वाले कंपनियां संदेह के घेरे में है। उनके कुछ सिस्टम इंटीग्रेटर भी मामले में संदिग्ध माने जा रहे हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत सूबे के काफी जिलों में विजन टेक कंपनी की तरफ से मशीनों की सप्लाई की गई। जल्द ही इस सिलसिले में कंपनी से जुड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
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तीन हजार आधार नंबर का किया गलत इस्तेमाल
लखनऊ स्थिति जवाहर भवन से सभी जिलों को एक सूची भेजी गई है, जिनमें उन आधार नंबरों को लिखा गया है, जिनका इस्तेमाल कर एक हजार से अधिक बार राशन विभिन्न आधार कार्डों पर निकाला गया। गाजियाबाद में तीन आधार नंबर ऐसे पाए गए हैं, जिन का एक हजार से अधिक बार राशन बिक्री दिखाने के लिए किया गया। सभी जिलों में इन आधार नंबर के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
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गाजियाबाद। फर्जी आधार व सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर 12 करोड़ की राशन चोरी के मामले में अहम सुराग हाथ लगे हैं। प्रदेश के 43 जिलों में हुए घोटाले की पटकथा गौतमबुद्धनगर स्थित दादरी में लिखी गई। डीलरों व ऑपरेटरों से की गई पूछताछ में जीत व रोहित के नाम सामने आए हैं, जिनके पास सभी संबंधित जिलों की ई-पॉश मशीनें पहुंचती थीं। दोनों लोग दादरी में मशीनें मंगाते थे। जहां से तीन से पांच दिन के अंदर राशन कार्डों के नाम पर सस्ते अनाज की बिक्री दर्ज कर लौटा देते थे। शासन के निर्देश पर एसटीएफ व स्थानीय पुलिस दोनों लोगों की तलाश में जुटी है।
खाद्य आपूर्ति विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तमाम जिलों के डीलरों व ऑपरेटरों ने बताया है कि उन्हें नहीं पता कि कैसे हेराफेरी की गई। वो अपनी मशीनों को दादरी में पहुंचा थे। जहां पर जीतू व रोहित उन राशन कार्ड पर सस्ते गल्ले की बिक्री दर्ज कर मशीनों को लौटा देते थे, जिनके नाम पर राशन नहीं लिया जाता था। पूछताछ के दौरान कोई भी उनका पूरा पता नहीं बता पाया है लेकिन कहा जा रहा है कि कुछ ई-पॉश मशीन ऑपरेटर उनके लगातार संपर्क में थे, जो उनका पूरा पता भी जानते थे। दूसरे जिले के ऑपरेटर के माध्यम से मशीन भेजी जाती थी। बस उनका नाम हर कोई लेता था और कहा जाता था कि मशीन बस कुछ दिन के लिए दादरी में भेजनी पड़ेगी। बताया जा रहा है कि सोमवार तक पूरा मामले में कोई बड़ी कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि 43 जिलों में 859 आधार कार्ड नंबरों का1,86,737 दफा इस्तेमाल कर करीब 12 करोड़ रुपये का खाद्यान्न निकाल लिया गया।
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ई-पॉस मशीन बनाने वाले कंपनी रडार पर
घोटाले में ई-पॉश मशीन बनाने वाले कंपनियां संदेह के घेरे में है। उनके कुछ सिस्टम इंटीग्रेटर भी मामले में संदिग्ध माने जा रहे हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत सूबे के काफी जिलों में विजन टेक कंपनी की तरफ से मशीनों की सप्लाई की गई। जल्द ही इस सिलसिले में कंपनी से जुड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
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तीन हजार आधार नंबर का किया गलत इस्तेमाल
लखनऊ स्थिति जवाहर भवन से सभी जिलों को एक सूची भेजी गई है, जिनमें उन आधार नंबरों को लिखा गया है, जिनका इस्तेमाल कर एक हजार से अधिक बार राशन विभिन्न आधार कार्डों पर निकाला गया। गाजियाबाद में तीन आधार नंबर ऐसे पाए गए हैं, जिन का एक हजार से अधिक बार राशन बिक्री दिखाने के लिए किया गया। सभी जिलों में इन आधार नंबर के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।