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मेल पर टैक्स की मार, बेजार हुआ मीना बाजा
Updated Mon, 19 Nov 2018 01:28 AM IST
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मेल पर टैक्स की मार, बेजार हुआ मीना बाजार
गढ़मुक्तेश्वर। पौराणिक मेले को सरकारी मान्यता मिलने के बाद भी व्यापारियों को राहत नहीं मिल पा रही है। तहबाजारी और व्यापारियों से टैक्स वसूला जा रहा है। टैक्स की मार पड़ने से मीना बाजार की रौनक फीकी पड़ गई है। श्रद्धालुओं को भी ऊबड़ खाबड़ रास्तों के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सदियों से उपेक्षा का दंश झेलते आ रहे महाभारत कालीन पौराणिक खादर मेले को योगी सरकार ने पिछले साल राजकीय मान्यता देकर प्रदेश मेला मानचित्र में शामिल किया था। इसके बाद भी मेले में आने वाले व्यापारियों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है। टैक्स की मार से वे परेशान हैं। क्षेत्रीय विधायक कमल मलिक के विरोध पर पिछले साल जिला पंचायत ने 2.70 लाख में छोड़ा गया यात्री कर का ठेका निरस्त कर दिया था, जिसे इस बार भी न छोड़े जाने से सड़कों के किनारे होने वाली यात्री कर की वसूली बंद है। इसके अलावा तंबू गाढ़कर पड़ाव डालने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। दुकान लगाने वालों से हजारों का टैक्स वसूले जाने से सदर और मीना बाजार में रौनक नहीं है। इसके चलते झूला, सर्कस, मौत के कुएं, नौटंकी न लगने से मेले की रंगत फीकी हो गई है। मेले में एक से दूसरे सेक्टर को जाने वाले रास्तों समेत संपर्क मार्गों पर बनाई गईं कई मील लंबी कच्ची सड़कें खराब हैं। स्नान के बाद कपड़े बदलने के महिलाओं को विशेष सुविधा नहीं दी गई है। देश के सबसे बड़े अश्वीय मेले में भी टैक्स से पशु व्यापारी परेशान हैं। जिला पंचायत एएमए प्रणव पांडेय का कहना है कि निर्धारित दर से अधिक टैक्स वसूलने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कच्चे रास्तों की नियमित मरम्मत के साथ ही धूल की रोकथाम को पानी का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
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गढ़मुक्तेश्वर। पौराणिक मेले को सरकारी मान्यता मिलने के बाद भी व्यापारियों को राहत नहीं मिल पा रही है। तहबाजारी और व्यापारियों से टैक्स वसूला जा रहा है। टैक्स की मार पड़ने से मीना बाजार की रौनक फीकी पड़ गई है। श्रद्धालुओं को भी ऊबड़ खाबड़ रास्तों के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सदियों से उपेक्षा का दंश झेलते आ रहे महाभारत कालीन पौराणिक खादर मेले को योगी सरकार ने पिछले साल राजकीय मान्यता देकर प्रदेश मेला मानचित्र में शामिल किया था। इसके बाद भी मेले में आने वाले व्यापारियों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है। टैक्स की मार से वे परेशान हैं। क्षेत्रीय विधायक कमल मलिक के विरोध पर पिछले साल जिला पंचायत ने 2.70 लाख में छोड़ा गया यात्री कर का ठेका निरस्त कर दिया था, जिसे इस बार भी न छोड़े जाने से सड़कों के किनारे होने वाली यात्री कर की वसूली बंद है। इसके अलावा तंबू गाढ़कर पड़ाव डालने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। दुकान लगाने वालों से हजारों का टैक्स वसूले जाने से सदर और मीना बाजार में रौनक नहीं है। इसके चलते झूला, सर्कस, मौत के कुएं, नौटंकी न लगने से मेले की रंगत फीकी हो गई है। मेले में एक से दूसरे सेक्टर को जाने वाले रास्तों समेत संपर्क मार्गों पर बनाई गईं कई मील लंबी कच्ची सड़कें खराब हैं। स्नान के बाद कपड़े बदलने के महिलाओं को विशेष सुविधा नहीं दी गई है। देश के सबसे बड़े अश्वीय मेले में भी टैक्स से पशु व्यापारी परेशान हैं। जिला पंचायत एएमए प्रणव पांडेय का कहना है कि निर्धारित दर से अधिक टैक्स वसूलने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कच्चे रास्तों की नियमित मरम्मत के साथ ही धूल की रोकथाम को पानी का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
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