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Atlas Cycle: विश्व साइकिल दिवस के दिन एटलस हुई बंद, कंपनी ने फैक्टरी के कर्मचारियों को भेजा घर, मायावती ने कही ये बात

Thu, 04 Jun 2020 01:21 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 04 Jun 2020 01:21 PM IST
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Atlas Cycle Latest News in Hindi: Ghaziabad Cycle manufacturing company atlas send its employees on layoff will get half salary on gate attendance
एटलस साइकिल कंपनी ने कर्मचारियों को ले ऑफ किया - फोटो : सुमित सिसोदिया

विश्व साइकिल दिवस पर ही साहिबाबाद स्थित देश की नामी साइकिल कंपनी एटलस के एक हजार कर्मचारियों पर आफत टूट पड़ी। उत्पादन न होने से आर्थिक संकट का हवाला देकर साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 की एटलस कंपनी ने बुधवार को अपने कर्मचारियों को ले-ऑफ कर दिया।

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इस पर बसपा प्रमुख मायावती सामने आई हैं और उन्होंने सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने ट्वीट किया, 'ऐसे समय जबकि लाॅकडाउन के कारण बंद पड़े उद्योगों को खोलने के लिए आर्थिक पैकेज आदि सरकारी मदद देने की बात की जा रही है, जबकि यूपी के गाजियाबाद स्थित एटलस जैसी प्रमुख साइकिल फैक्ट्री के धन अभाव में बंद होने की खबर चिंताओं को बढ़ाने वाली है। सरकार तुरन्त ध्यान दे तो बेहतर है।'
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नोटिस से गुस्साए कर्मचारियों ने कंपनी के गेट पर प्रदर्शन कर विरोध जताया। कर्मचारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठियां फटकारनी पड़ी। उधर, एटलस साइकिल लिमिटेड इम्प्लॉयज यूनियन ने मामले में श्रम विभाग के प्रमुख सचिव और श्रमायुक्त को पत्र भेजकर विरोध जताया है।  

एटलस साइकिल यूनियन के महासचिव महेश कुमार ने बताया कि साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 स्थित एटलस साइकिल (हरियाणा) लिमिटेड में परमानेंट और कांट्रेक्ट बेस पर करीब एक हजार कर्मचारी काम करते हैं। वह भी पिछले 20 साल से कंपनी में तैनात हैं। 

साहिबाबाद में इस कंपनी की स्थापना करीब मई 1999 में हुई थी। उनका आरोप है कि कंपनी ने लॉकडाउन लागू होने के बावजूद एक और दो जून को सभी कर्मचारियों को कंपनी में काम के लिए बुलाया था। इस दौरान कर्मचारियों ने नियमित रूप से अपना काम पूरा कर रात में घर चले गए। 

बुधवार को कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे तो उन्हें गार्डों ने अंदर नहीं घुसने दिया। इस पर कर्मियों ने रोकने का कारण पूछा तो गार्ड ने बताया कि बैठकी यानी ले-ऑफ लागू कर दी गई है। इसका नोटिस भी बोर्ड पर चस्पा किया गया है। नोटिस देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए। 

उन्होंने कंपनी के प्रबंधकों से इस बारे में बात करने का प्रयास किया, लेकिन किसी की बात नहीं हो सकी। कुछ देर में कर्मचारियों की भीड़ बढ़ती गई। सभी को इस बारे में मालूम हुआ तो उनका गुस्सा भड़क गया। आननफानन में सभी कंपनी के बाहर ही प्रदर्शन करने लगे। 

तब कंपनी की ओर से पुलिस बुलाई गई। लिंक रोड थाने की पुलिस ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बात होती रही। आरोप है कि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कर्मचारियों को वहां से हटाया। 

कर्मचारियों का कहना है कि लॉकडाउन में कारोबार न चलने से परिवार का गुजर-बसर करने में पहले ही दिक्कत आ रही थी। अब कंपनी की तरफ से बैठकी (ले-ऑफ) लागू करने से हालात और बिगड़ जाएंगे। इसे लेकर तमाम कर्मचारी परेशान हैं। 

उधर, एटलस कंपनी के सीईओ एनपी सिंह ने फोन पर आर्थिक स्थिति बिगड़ने की बात जरूर कही, लेकिन उन्होंने मामले में और कुछ भी कहने से मना कर दिया।

यूनियन ने लिखा प्रमुख सचिव को पत्र
परेशान कर्मचारियों ने मामले की शिकायत श्रम विभाग के प्रमुख सचिव और गाजियाबाद के श्रमायुक्त को पत्र लिखकर की है। संगठन का कहना है कि कंपनी ने बिना किसी पूर्व सूचना से अचानक ले-ऑफ लागू कर बोर्ड पर नोटिस चिपका दिया। साथ ही कर्मचारियों को काम करने से गेट पर ही रोक दिया गया। 

लिहाजा यह गैर-कानूनी है। चार बिंदुओं में संगठन ने कंपनी पर गलत तरीके से बैठकी करने व कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप लगाया। यूनियन ने दोनों पक्षों को बुलाकर राहत देने की मांग की है।

क्या होता है ले-ऑफ?
कंपनी के पास जब उत्पादन के लिए पैसे नहीं होते हैं, तो उस परिस्थिति में कंपनी कर्मचारियों की छंटनी न करके और किसी प्रकार का अतिरिक्त काम ना कराकर सिर्फ उसकी हाजिरी लगवाती है। 

कंपनी का कर्मचारी रोजाना गेट पर आकर अपनी हाजिरी नोट कराएगा और उसी हाजिरी के आधार पर कर्मचारी को आधे वेतन का भुगतान किया जाएगा।

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