गौतमबुद्ध नगर में रोजाना बढ़ रही संक्रमितों की संख्या, फिर भी टेस्टिंग औसत से भी कम
- जांच दर बढ़ी नहीं पर तेजी से बढ़ रहा कोरोना
- स्वास्थ्य विभाग अभी तक करीब 12 हजार लोगों की ही कर सका जांच
- करीब डेढ़ महीने से औसतन हर दिन 120 सैंपल की हो रही जांच
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जमीन पर कोरोना जांच की गति बेशक न बढ़ पाई हो, लेकिन कोरोना के बढ़े आंकड़ों ने सरकारी अफसरों की नींद उड़ा दी है। 8 मार्च से शुरू हुई जांच का आंकड़ा करीब 12 हजार तक ही पहुंच पाया है। दो माह पूर्व प्रत्येक दिन औसत 120 मरीजों की रिपोर्ट में 3 से 10 तक ही पॉजिटिव निकलते थे। अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 40 पॉजिटिव तक पहुंच गया है।
जिले के कोरोना सैंपल करीब 25 लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच का अधिकतम दारोमदार जिम्स, एनआईबी, चाइल्ड पीजीआई, एसआरएल और लाल पैथ लैब पर ही है। 8 मार्च को जिले में पहला केस आया। पूर्व में केवल एनआईबी में जांच होती थी, लेकिन बाद में अन्य मशीनें लगा दी गईं।
जनपद की आबादी करीब 21 लाख है। उम्मीद थी कि सरकारी अफसर बड़ी आबादी को देखते हुए अधिक जांच कराएंगे पर ऐसा नहीं हुआ। दो महीने से जांच औसत 100 व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से ही हो रही है।
विशेष यह है कि गुरुग्राम की निजी लैब ढाई हजार से अधिक जांच कर चुकी है। जांच खुद एक निजी कंपनी ने खर्चे पर कराई थी। अगर यह रिपोर्ट कार्ड विभाग के आंकड़ों में शामिल न हो तो जांच रिकॉर्ड की स्थिति और खराब हो जाएगी।
अफसरों ने बुलाई लैब संचालकों की बैठक
जांच दर बढ़ाना स्वास्थ्य विभाग के लिए सरदर्द बन गया है। सरकारी अफसराें ने इसे लेकर जमीन पर जोर आजमाइश शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने सेक्टर-60 स्थित निजी कंपनी में संचालित कॉल सेंटर में लैब संचालक की बैठक बुलाई।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि करीब 25 लैब जनपद के कोरोना जांच से जुड़ी हैं। सभी के संचालकों को बुलाया, लेकिन 15 लैब संचालक बैठक में पहुंचे। लैब संचालकों को निर्देशित किया गया है कि सैंपल आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप लिया जाए। डाटा स्वास्थ्य विभाग दें।
बैठक में आंकड़े देने में हीलाहवाली करने वाले लैब संचालकों को चेतावनी दी, साथ ही गैर हाजिर 10 लैब संचालकों को नोटिस जारी करने की बात स्वास्थ्य विभाग ने कही है।
जांच में क्यों फेल सरकारी महकमा
सरकारी लैबों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को मिलती है। जबकि निजी लैबों का केवल पॉजीटिव मरीजों का आंकड़ा विभाग को मिल पाता है। शेष आए निगेटिव मरीजों की रिपोर्ट निजी लैब संचालक स्वास्थ्य विभाग को देते ही नहीं है। शासन से दबाव पड़ने पर जबरन रिपोर्ट निजी लैब संचालकों से ली जाती है।
बाद में उसे आंकड़ों में शामिल किया जाता है। ऐसे में अधिकारिक तौर पर जांच दर बढ़ाने में निजी लैबों का खास योगदान नहीं है। इसके अलावा एनआईबी पर पश्चिमी यूपी और कई राज्यों की जांच का भार है। जिम्स, चाइल्ड पीजीआई में भी काफी संख्या में पड़ोसी जिलों के सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं।
28 मई से 3 जून तक बढ़े मामले
3 जून - 25 केस
2 जून- 26 केस
1 जून- 17 केस
31 मई- 51 केस
30 मई- 18 केस
29 मई- 10 केस
28 मई- 11 केस
27 अप्रैल से 3 मई तक की स्थिति
3 मई- 8
2 मई- 5
1 मई- 10
30 अप्रैल- 7
29 अप्रैल- 3
28 अप्रैल- 5
27 अप्रैल- 14
(नोट: आंकड़े दो अलग-अलग सप्ताह के हैं। अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में जांच दर 120 सैंपल प्रतिदिन की रही, लेकिन कोरोना के केस कम रहे। वहीं, मई के अंत और जून की शुरुआत में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, लेकिन जिले की जांच दर करीब 120 सैंपल प्रतिदिन रही है।)
लैब संचालकों को कोरोना जांच की पूर्ण रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में कई सरकारी लैबों में कोरोना की जांच हो रही है। जांच दर में तेजी लाई जा रही है।- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ